छत्तीसगढ़ के नेताओं की दूसरे राज्यों में बढ़ी भूमिका, गोमती साय से सौरभ सिंह तक मिली नई जिम्मेदारी

रायपुर, 25 सितंबर 2026। भारतीय जनता पार्टी ने 23 सितंबर 2026 को संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रभारी और सह-प्रभारियों की नई नियुक्तियां की हैं। इस बदलाव में छत्तीसगढ़ के दो नेताओं को भी दूसरे राज्यों की संगठनात्मक जिम्मेदारी मिली है। पत्थलगांव की विधायक और रायगढ़ की पूर्व सांसद गोमती साय को गुजरात का सह-प्रभारी बनाया गया है, जबकि अकलतरा के पूर्व विधायक सौरभ सिंह को झारखंड का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है।

छत्तीसगढ़ के नेताओं को दूसरे राज्यों की जिम्मेदारी मिलने का यह पहला उदाहरण नहीं है। इससे पहले करुणा शुक्ला, सरोज पांडेय, रामविचार नेताम और लता उसेंडी अलग-अलग समय में भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में दूसरे राज्यों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

करुणा शुक्ला: झारखंड संगठन से जुड़ी पहली प्रमुख जिम्मेदारियों में नाम

छत्तीसगढ़ के उन नेताओं में करुणा शुक्ला का नाम प्रमुखता से आता है, जिन्हें भाजपा ने दूसरे राज्य का संगठनात्मक प्रभार दिया था। वे झारखंड भाजपा की प्रभारी रही थीं। 2009 में भी वे भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहते हुए झारखंड की प्रभारी थीं। दिसंबर 2009 में झारखंड विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी विधायकों की बैठक में वे केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर भी शामिल हुई थीं।

करुणा शुक्ला लंबे समय तक भाजपा से जुड़ी रहीं और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समेत संगठन में कई जिम्मेदारियां संभालीं। 2004 में वे जांजगीर लोकसभा सीट से सांसद चुनी गई थीं। अक्टूबर 2013 में उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दिया और फरवरी 2014 में कांग्रेस में शामिल हो गईं। 2014 का लोकसभा चुनाव उन्होंने बिलासपुर से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर लड़ा। 2021 में उनका निधन हो गया।

भाजपा के 23 सितंबर 2026 के संगठनात्मक फेरबदल में गोमती साय को गुजरात और सौरभ सिंह को झारखंड का सह-प्रभारी बनाया गया। जानिए करुणा शुक्ला, सरोज पांडेय, रामविचार नेताम और लता उसेंडी की पुरानी संगठनात्मक भूमिकाएं।

सरोज पांडेय: महाराष्ट्र भाजपा का संगठनात्मक प्रभार

छत्तीसगढ़ की वरिष्ठ भाजपा नेता सरोज पांडेय को जुलाई 2015 में महाराष्ट्र भाजपा का प्रभारी बनाया गया था। उस समय वे भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव थीं। महाराष्ट्र की जिम्मेदारी उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में सक्रिय भूमिका के दौरान मिली थी। 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान भी सरोज पांडेय महाराष्ट्र भाजपा की प्रभारी के तौर पर संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहीं। इस तरह महाराष्ट्र का प्रभार संभालना छत्तीसगढ़ से किसी नेता को मिले प्रमुख अंतरराज्यीय संगठनात्मक दायित्वों में शामिल रहा।

रामविचार नेताम: झारखंड में सह-प्रभारी से आगे बढ़ी भूमिका

रामविचार नेताम का नाम इस सूची में अलग इसलिए है क्योंकि उन्होंने झारखंड में एक से अधिक संगठनात्मक भूमिकाएं संभालीं। 2015 में अमित शाह की राष्ट्रीय टीम में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। इसके बाद 2016 में उन्हें त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ झारखंड भाजपा का सह-प्रभारी बनाया गया। उस समय वे छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद थे। 2019 में भी झारखंड भाजपा की संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी भूमिका रही। नवंबर 2019 में झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें पार्टी के सह-प्रभारी के तौर पर दर्ज किया गया था। इस तरह झारखंड भाजपा के साथ रामविचार नेताम का जुड़ाव छत्तीसगढ़ के उन नेताओं के उदाहरणों में आता है, जिन्हें दूसरे राज्य के संगठन में लगातार जिम्मेदारी मिली।

लता उसेंडी: चुनावी जिम्मेदारी से नियमित सह-प्रभारी तक

कोंडागांव की विधायक और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुकीं लता उसेंडी को 2024 में ओडिशा की जिम्मेदारी मिली थी। जनवरी 2024 में लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने राज्यों में चुनाव प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए थे। उस सूची में विजयपाल सिंह तोमर को ओडिशा का चुनाव प्रभारी और लता उसेंडी को सह-चुनाव प्रभारी बनाया गया था। इसके बाद जुलाई 2024 में भाजपा ने राज्यों के नियमित प्रभारी और सह-प्रभारियों की नियुक्ति की। इसमें विजयपाल सिंह तोमर को ओडिशा का प्रभारी और लता उसेंडी को सह-प्रभारी रखा गया। 23 सितंबर 2026 के नए संगठनात्मक फेरबदल में ओडिशा की जिम्मेदारी बदल दी गई। अब डी. पुरंदेश्वरी को प्रभारी और स्वदेश सिंह को सह-प्रभारी बनाया गया है।

भाजपा के संगठनात्मक फेरबदल में लताउसेंडी को ओडिशा का सह-प्रभारी बनाया गया।
भाजपा के संगठनात्मक फेरबदल में लताउसेंडी को ओडिशा का सह-प्रभारी बनाया गया।

गोमती साय: अब गुजरात भाजपा की संगठनात्मक टीम में

23 सितंबर 2026 की नई सूची में पत्थलगांव विधायक गोमती साय को गुजरात भाजपा का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। गुजरात में तरुण चुघ प्रभारी हैं, जबकि अजय महावर और गोमती साय सह-प्रभारी हैं। गोमती साय का राजनीतिक सफर स्थानीय स्तर से शुरू हुआ। वे जशपुर जिला पंचायत की सदस्य और बाद में जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं। 2019 में वे रायगढ़ लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं। इसके बाद 2023 में पत्थलगांव विधानसभा सीट से विधायक बनीं। अब गुजरात भाजपा के संगठन में सह-प्रभारी की भूमिका उनके राजनीतिक सफर में एक नई संगठनात्मक जिम्मेदारी के रूप में जुड़ी है।

गोमती साय और सौरभ सिंह को दूसरे राज्यों में भाजपा संगठन की जिम्मेदारी
भाजपा के संगठनात्मक फेरबदल में गोमती साय को गुजरात और सौरभ सिंह को झारखंड का सह-प्रभारी बनाया गया।

सौरभ सिंह: अकलतरा के बाद झारखंड संगठन की जिम्मेदारी

23 सितंबर के फेरबदल में छत्तीसगढ़ से दूसरे राज्य की जिम्मेदारी पाने वाले दूसरे नेता सौरभ सिंह हैं। अकलतरा के पूर्व विधायक को झारखंड भाजपा का सह-प्रभारी बनाया गया है। झारखंड में गजेंद्र पटेल प्रभारी हैं, जबकि सौरभ सिंह और निवेदिता सिंह सह-प्रभारी हैं। सौरभ सिंह ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी से की थी। 2008 में उन्होंने अकलतरा से पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। बाद में भाजपा में शामिल हुए और 2018 में भाजपा के टिकट पर अकलतरा से जीत दर्ज की। 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

उनकी प्रोफाइल में एक और तथ्य उल्लेखनीय है। वे 1998 और 1999 में संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा के इंटरव्यू चरण तक पहुंचे थे। अब झारखंड भाजपा के सह-प्रभारी के तौर पर संगठनात्मक भूमिका उनके राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय है।

गोमती साय और सौरभ सिंह को दूसरे राज्यों में भाजपा संगठन की जिम्मेदारी
भाजपा के संगठनात्मक फेरबदल में गोमती साय को गुजरात और सौरभ सिंह को झारखंड का सह-प्रभारी बनाया गया।

छत्तीसगढ़ भाजपा की जिम्मेदारी अब स्मृति ईरानी और सिद्धार्थ शंभू के पास

23 सितंबर 2026 के संगठनात्मक फेरबदल में छत्तीसगढ़ भाजपा का प्रभार भी बदला गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाया गया है। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सिद्धार्थ शंभू को सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। दोनों नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू की गई हैं। स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ के साथ हरियाणा का भी प्रभारी बनाया गया है। छत्तीसगढ़ में नई नियुक्तियां भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की ओर से किए गए व्यापक संगठनात्मक बदलाव का हिस्सा हैं।

इस पूरे फेरबदल में एक तरफ छत्तीसगढ़ के दो नेताओं—गोमती साय और सौरभ सिंह—को गुजरात और झारखंड जैसे राज्यों की संगठनात्मक जिम्मेदारी मिली है, वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ भाजपा के लिए स्मृति ईरानी और सिद्धार्थ शंभू की नई भूमिका तय की गई है।

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