USG की डेट को लेकर हुआ विवाद; शिकायत के मुताबिक डॉक्टर को धक्का देकर गिराया, बीच-बचाव करने पहुंची महिला सुरक्षा गार्ड से भी बदसलूकी का आरोप

रायपुर, 7 अक्टूबर 2026।
रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय यानी मेकाहारा में एक महिला इंटर्न डॉक्टर के साथ कथित बदसलूकी और धक्का-मुक्की का मामला सामने आया है। घटना रेडियोडायग्नोसिस विभाग में अल्ट्रासाउंड यानी USG की तारीख को लेकर हुए विवाद के दौरान हुई। पीड़ित पक्ष की शिकायत के मुताबिक, एक व्यक्ति ने महिला डॉक्टर से अभद्र भाषा में बात की, खुद को BSNL का SDO और केंद्र सरकार का क्लास-1 राजपत्रित अधिकारी बताया तथा उसका ट्रांसफर कराने की धमकी दी। इसके बाद डॉक्टर को धक्का देकर गिराने का भी आरोप है।
घटना को लेकर जूनियर डॉक्टरों में नाराजगी है और अस्पताल में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। मामले की शिकायत पुलिस से की गई है और जांच जारी है।
USG की डेट को लेकर शुरू हुआ विवाद
जानकारी के मुताबिक, घटना मंगलवार को मेकाहारा के रेडियोडायग्नोसिस विभाग में हुई। उस समय इंटर्न डॉक्टर डॉ. साक्षी कन्नौजे
तीन अन्य इंटर्न डॉक्टरों के साथ मरीजों को USG की तारीख देने का काम कर रही थीं।
इसी दौरान रमाकांत शर्मा नाम का व्यक्ति काउंटर पर पहुंचा और उसी दिन USG कराने की मांग करने लगा। शिकायत के अनुसार, डॉक्टर ने उसे बताया कि उस दिन का स्लॉट पहले ही फुल है। अगर मामला अर्जेंट है तो वह HOD या वरिष्ठ डॉक्टर से मिल सकता है और उनकी अनुमति से तत्काल जांच की तारीख मिल सकती है।
आरोप है कि इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया।
‘तू औरत है ना… तेरा ट्रांसफर करवा दूंगा’
पीड़ित डॉक्टर के बयान के मुताबिक, व्यक्ति ने पहले उसके साथ कथित तौर पर अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। डॉक्टर का आरोप है कि आरोपी ने महिला होने को लेकर भी टिप्पणी की और वहां मौजूद दूसरी महिला इंटर्न से भी गाली-गलौज की।
डॉ. साक्षी के मुताबिक, जब उन्होंने इस व्यवहार का विरोध किया तो संबंधित व्यक्ति ने खुद को BSNL का SDO और केंद्र सरकार का क्लास-1 राजपत्रित अधिकारी बताया और कथित तौर पर कहा कि वह उनका ट्रांसफर करवा देगा।
शिकायत में आरोपी द्वारा कथित तौर पर यह धमकी देने की बात कही गई है कि, “तू रुक, तेरा ट्रांसफर करवाता हूं, तू मेरे से ऐसे कैसे बात कर रही है।”
यह व्यक्ति वास्तव में BSNL में किस पद पर है या उसने अपनी पहचान को लेकर जो दावा किया, वह सही है या नहीं—इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
डॉक्टर को धक्का देकर गिराने का आरोप
शिकायत के अनुसार, बहस बढ़ने के बाद आरोपी ने डॉ. साक्षी को धक्का दे दिया, जिससे वह गिर गईं। डॉक्टर की चीख-पुकार सुनकर वहां तैनात महिला सुरक्षा गार्ड मदद के लिए पहुंची।
आरोप है कि सुरक्षा गार्ड के साथ भी आरोपी ने गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की। इसके बाद आसपास मौजूद अन्य इंटर्न डॉक्टरों ने हस्तक्षेप किया और व्यक्ति को वहां से बाहर निकाल दिया।
शिकायत के मुताबिक, अस्पताल से बाहर निकलने के बाद भी संबंधित व्यक्ति का हंगामा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ और उसने कुछ अन्य कमरों के दरवाजे खटखटाए।
इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध CCTV फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों से होना बाकी है।
मेडिकल सुपरिटेंडेंट खुद डॉक्टर को लेकर पहुंचे पुलिस चौकी
घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन को इसकी जानकारी दी गई। बताया गया कि मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संतोष सोनकर पीड़ित डॉक्टर के साथ अस्पताल पुलिस चौकी पहुंचे।
इसके बाद मौदहापारा थाने में लिखित शिकायत दी गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में घटनास्थल के CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
JDA ने जताया आक्रोश, सुरक्षा की मांग
घटना को लेकर जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) छत्तीसगढ़ ने भी नाराजगी जताई है। संगठन ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताते हुए अस्पताल में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
JDA अध्यक्ष डॉ. पीयूष पी. श्रीवास्तव के मुताबिक, ड्यूटी के दौरान डॉक्टर या अस्पताल के किसी कर्मचारी के साथ हिंसा अथवा दुर्व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। संगठन ने आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और डॉक्टरों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
मेकाहारा में डॉक्टरों की सुरक्षा फिर सवालों में
मेकाहारा छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में डॉक्टरों, इंटर्न और अन्य मेडिकल स्टाफ का मरीजों और उनके परिजनों से सीधा संपर्क रहता है।
USG, जांच की तारीख, ऑपरेशन, बेड और अन्य चिकित्सा सुविधाओं को लेकर मरीजों और परिजनों में कई बार तत्काल सेवा की अपेक्षा रहती है। लेकिन उपलब्ध स्लॉट और चिकित्सकीय प्राथमिकता के कारण हर मरीज को उसी समय जांच की सुविधा मिलना संभव नहीं होता। ऐसे मामलों में विवाद की स्थिति पैदा होने पर अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
इस मामले में भी विवाद USG की तारीख को लेकर शुरू हुआ और आरोप डॉक्टर से कथित बदसलूकी तथा धक्का-मुक्की तक पहुंच गया।
अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ, किस स्तर की मारपीट या धक्का-मुक्की हुई, आरोपी ने अपनी सरकारी पहचान को लेकर क्या दावा किया और डॉक्टर व सुरक्षा गार्ड के साथ कथित दुर्व्यवहार की पुष्टि किन साक्ष्यों से होती है।
फिलहाल मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। पुलिस जांच के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
डॉ. साक्षी कन्नौजे को आप नीचे दिए वीडियो के माध्य से सुन सकते है

