टेनेसी में 30 सितंबर को फांसी की कोशिश हुई थी नाकाम; छह दिन तक अस्पताल में बेहोश और वेंटिलेटर पर रहने के बाद वकीलों ने बताया- हालत में सुधार, लेकिन पूरी रिकवरी को लेकर अभी अनिश्चितता

नैशविल, अमेरिका, 7 अक्टूबर 2026।
अमेरिका के टेनेसी में घातक इंजेक्शन के जरिए मौत की सजा देने की कोशिश के बावजूद जिंदा बची क्रिस्टा पाइक अब होश में हैं और बात कर रही हैं। उनके वकीलों ने मंगलवार को बताया कि 50 वर्षीय पाइक अस्पताल में होश में आ गई हैं और बोल पा रही हैं। 30 सितंबर को उन्हें मौत की सजा देने के दौरान पेंटोबार्बिटल की दो खुराक दी गई थीं, लेकिन उनकी मौत नहीं हुई। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां वह कई दिनों तक बेहोश और वेंटिलेटर पर रहीं।
पाइक के वकीलों ने उनकी स्थिति को “चिकित्सकीय रूप से अभूतपूर्व” बताया है। हालांकि, डॉक्टरों और उनकी कानूनी टीम का कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि वह पूरी तरह ठीक हो जाएंगी। विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले सप्ताहों या महीनों में ही उनकी रिकवरी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मौत की सजा देने की कोशिश में आखिर हुआ क्या था?
क्रिस्टा पाइक को 30 सितंबर 2026 को टेनेसी की राजधानी नैशविल स्थित रिवरबेंड मैक्सिमम सिक्योरिटी इंस्टीट्यूशन में घातक इंजेक्शन दिया जाना था। यह प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही कानूनी लड़ाई के कारण कई घंटे तक टल गई थी। बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत की रोक हटाई और राज्य को फांसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति मिली।
इसके बाद पाइक को पेंटोबार्बिटल की दो खुराक दी गईं। लेकिन अपेक्षित तरीके से उनकी मौत नहीं हुई। डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर के अनुसार, दो खुराक दिए जाने के बाद भी वह एक घंटे से ज्यादा समय तक सांस लेती रहीं। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
इस घटना को अमेरिकी मृत्युदंड व्यवस्था के इतिहास में बेहद असामान्य माना जा रहा है। डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर के मुताबिक, पाइक ऐसा मामला हैं जिसमें घातक इंजेक्शन की दवाएं वास्तव में दिए जाने के बाद भी कैदी जीवित बची हैं।

अस्पताल में कई दिन बेहोश रहीं, अब बोल पा रही हैं
फांसी की कोशिश नाकाम होने के बाद पाइक को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके वकीलों के मुताबिक वह कई दिनों तक बेहोश रहीं और उन्हें वेंटिलेटर की मदद दी गई।
मंगलवार को उनकी कानूनी टीम ने पहली बार उनकी हालत में स्पष्ट सुधार की जानकारी दी। वकीलों ने बताया कि वह अब होश में हैं और बोल सकती हैं। हालांकि, वह अभी भी गंभीर चिकित्सा निगरानी में हैं।
वकीलों के अनुसार, उनकी बाहों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है और अस्पताल के बिस्तर पर उन्हें अभी तक हथकड़ी और बेड़ियों में रखा गया है।
उनके विशेषज्ञ सलाहकार और एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. जोएल ज़िवोट ने कहा कि उनका होश में आना और बोलना रिकवरी की दिशा में सकारात्मक संकेत है, लेकिन अभी यह नहीं कहा जा सकता कि सभी गंभीर खतरे टल गए हैं। उनके मुताबिक पाइक को पूरी तरह ठीक होने में काफी समय लग सकता है।
पेंटोबार्बिटल ने काम क्यों नहीं किया?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि घातक इंजेक्शन की दो खुराक दिए जाने के बावजूद पाइक की मौत क्यों नहीं हुई।
पाइक की कानूनी टीम से जुड़े विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि दवा संभवतः उनकी नस के जरिए पर्याप्त मात्रा में रक्तप्रवाह में नहीं पहुंची। ऐसी स्थिति में दवा त्वचा के नीचे के ऊतकों में फैल सकती है और उसका अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ता।
डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर ने भी इस मामले में IV लाइन और दवा के शरीर में पहुंचने की प्रक्रिया को महत्वपूर्ण सवाल बताया है।
हालांकि, अभी आधिकारिक जांच पूरी नहीं हुई है। इसलिए यह निश्चित रूप से कहना जल्दबाजी होगी कि इंजेक्शन की विफलता का वास्तविक कारण क्या था।

मेडिकल इतिहास को लेकर पहले ही जताई गई थी चिंता
पाइक की कानूनी टीम ने फांसी से पहले उनकी चिकित्सकीय स्थिति को लेकर चिंता जताई थी। उनके वकीलों के मुताबिक पाइक को थ्रोम्बोसाइटोसिस है और उनकी नसें छोटी हैं, जिससे IV लाइन स्थापित करना मुश्किल हो सकता है।
उनके विशेषज्ञों ने पहले आशंका जताई थी कि अगर पेंटोबार्बिटल पर्याप्त मात्रा में सीधे रक्तप्रवाह में पहुंच गया तो उसका प्रभाव घातक होगा। लेकिन अगर दवा नस के बजाय आसपास के ऊतक में चली गई तो स्थिति अलग हो सकती है।
अब यह जांच का विषय है कि फांसी की प्रक्रिया में वास्तव में क्या हुआ और दवा शरीर में किस तरह पहुंची।
विशेषज्ञ भी पाइक के बचने से हैरान
फोर्डहम लॉ स्कूल की प्रोफेसर और क्रिमिनोलॉजिस्ट डेबोरा डेनो ने पाइक के होश में आने को बेहद असामान्य बताया है। उनके मुताबिक अमेरिका में इससे पहले भी मृत्युदंड की कोशिशें विफल हुई हैं, लेकिन उन मामलों में घातक दवाओं को कैदी के शरीर में सफलतापूर्वक पहुंचाया ही नहीं जा सका था।
पाइक का मामला इसलिए अलग है क्योंकि उन्हें घातक इंजेक्शन की दवा वास्तव में दी गई और इसके बावजूद वह जीवित रहीं। डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर भी इसे आधुनिक अमेरिकी मृत्युदंड व्यवस्था के सबसे असाधारण विफल मामलों में रखता है।
अब क्या दोबारा दी जा सकती है मौत की सजा?
क्रिस्टा पाइक के होश में आने के बाद सबसे बड़ा कानूनी सवाल यह है कि क्या टेनेसी सरकार भविष्य में उन्हें फिर से मृत्युदंड देने की कोशिश करेगी।
अभी राज्य ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि पाइक के लिए आगे क्या कदम उठाया जाएगा। उनकी कानूनी टीम अब फांसी की पूरी प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड और साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग कर रही है। साथ ही वकीलों ने उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग भी उठाई है।
इस मामले में पाइक की स्वास्थ्य स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। यदि उन्हें स्थायी न्यूरोलॉजिकल नुकसान हुआ है या वह भविष्य में कानूनी कार्यवाही समझने और उसमें भाग लेने की स्थिति में नहीं रहतीं, तो उनकी दोबारा फांसी की संभावना को लेकर अलग कानूनी प्रश्न खड़े हो सकते हैं। फिलहाल इन सभी सवालों पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
टेनेसी में इस साल दूसरी बार फांसी की प्रक्रिया विफल
क्रिस्टा पाइक का मामला टेनेसी में 2026 की दूसरी असफल मृत्युदंड प्रक्रिया है।
इससे पहले टोनी कैरुथर्स को 21 मई 2026 को घातक इंजेक्शन दिया जाना था। लेकिन अधिकारियों को आवश्यक IV लाइन स्थापित करने में सफलता नहीं मिली। करीब डेढ़ घंटे की कोशिश के बाद प्रक्रिया रोक दी गई और गवर्नर बिल ली ने कैरुथर्स को एक साल की मोहलत दे दी।
डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर के मुताबिक, पाइक का मामला कैरुथर्स से अलग है क्योंकि पाइक के शरीर में घातक दवा दी गई थी, जबकि कैरुथर्स के मामले में दवा देने की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो सकी थी।
टेनेसी ने बाकी फांसी पर लगाई रोक
पाइक की असफल फांसी के बाद टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने 2026 के बाकी हिस्से के लिए राज्य में होने वाली अन्य फांसियों को रोक दिया और घटना की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं। इस घटना के बाद टेनेसी डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शन के कमिश्नर फ्रैंक स्ट्राडा ने भी अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टेनेसी में कुछ ही महीनों के भीतर दो अलग-अलग मामलों में मृत्युदंड की प्रक्रिया विफल हुई है। अब जांच में यह देखा जाएगा कि क्या दोनों घटनाओं के पीछे प्रशासनिक, चिकित्सकीय या प्रक्रिया संबंधी कोई समान समस्या थी।

क्रिस्टा पाइक को मौत की सजा क्यों मिली थी?
क्रिस्टा पाइक को 1995 में 19 वर्षीय कोलीन स्लेमर की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। उस समय पाइक 18 वर्ष की थीं।
डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर के अनुसार, पाइक और उनके तत्कालीन बॉयफ्रेंड टैडारिल शिप की मुलाकात नॉक्सविल स्थित जॉब कॉर्प्स में हुई थी। स्लेमर भी उसी कार्यक्रम से जुड़ी थीं। 1995 में स्लेमर की हत्या के मामले में पाइक को दोषी ठहराया गया और मौत की सजा सुनाई गई।
पाइक टेनेसी में दो सदी से अधिक समय में मृत्युदंड पाने वाली पहली महिला बनने वाली थीं। लेकिन 30 सितंबर की प्रक्रिया विफल होने के बाद यह सजा पूरी नहीं हो सकी।
अब उनकी हालत में सुधार के बाद मामला केवल एक असफल फांसी तक सीमित नहीं रह गया है। उनके स्वास्थ्य, मृत्युदंड की प्रक्रिया, जेल प्रशासन की जवाबदेही और यह सवाल कि राज्य उन्हें दोबारा मौत की सजा देने की कोशिश कर सकता है या नहीं—इन सभी मुद्दों पर आने वाले दिनों में कानूनी लड़ाई और तेज होने की संभावना है।

