
ब्रेकिंग न्यूज़ | 30 अक्टूबर 2026 | छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में शराब, कोल और जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कथित घोटालों की जांच के बीच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने शुक्रवार सुबह प्रदेश के कई शहरों में एक साथ छापेमारी की। रायपुर, भिलाई, बिलासपुर, राजनांदगांव और गरियाबंद में कारोबारियों के घरों और व्यावसायिक ठिकानों पर जांच की गई। वहीं, कोरबा जिले के कटघोरा में भी DMF मामले से जुड़े ठिकानों पर दबिश दी गई।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जांच टीमें दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और डिजिटल उपकरणों की पड़ताल कर रही हैं। कार्रवाई का दायरा शराब घोटाले, कोल लेवी और DMF से जुड़े अलग-अलग मामलों तक बताया जा रहा है। हालांकि, छापेमारी के दौरान अब तक क्या बरामद हुआ है और किन लोगों के खिलाफ आगे कार्रवाई होगी, इस संबंध में आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।


रायपुर में अनवर ढेबर और रियल एस्टेट कारोबारी के ठिकानों पर जांच
रायपुर में EOW की टीम ने शराब कारोबारी अनवर ढेबर के घर पर छापा मारा। इसके साथ ही VIP स्टेट स्थित रियल एस्टेट कारोबारी सुदर्शन शर्मा के आवास पर भी टीम पहुंची।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सुदर्शन शर्मा के ठिकाने पर दस्तावेजों और अन्य जानकारियों की जांच की जा रही है। रायपुर में तीन से चार स्थानों पर कार्रवाई की सूचना है।



राजनांदगांव में वैभव गोलछा और जय बग्गा के यहां दबिश
राजनांदगांव में रायपुर से पहुंची करीब 20 अधिकारियों की टीम ने दो कारोबारियों के घरों और व्यावसायिक परिसरों में एक साथ जांच की।
- वैभव गोलछा: सनसिटी के बी-ब्लॉक स्थित आवास पर EOW की एक टीम ने छापा मारा।
- जय बग्गा: लालबाग क्षेत्र में उनके घर और व्यावसायिक परिसर में दूसरी टीम ने जांच शुरू की।
उपलब्ध जानकारी में दोनों कारोबारियों को पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा का करीबी बताया गया है। टीम दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और मोबाइल-लैपटॉप जैसे डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है।
भिलाई-3 में ट्रांसपोर्टर जितेंद्र सिंह के घर पहुंची टीम
भिलाई-3 के वसुंधरा नगर में ट्रांसपोर्टर जितेंद्र सिंह के आवास पर शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे EOW और ACB की टीम पहुंची। यहां पांच से छह अधिकारी जांच कर रहे हैं।
यह कार्रवाई कोल लेवी से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में बताई जा रही है। टीम घर में उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। हालांकि, जांच में क्या मिला है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

बिलासपुर में कोल कारोबारी शाहबाज खान के ठिकाने पर छापा
बिलासपुर के उसलापुर स्थित अलका एवेन्यू में कोल कारोबारी शाहबाज खान के घर पर EOW और ACB की टीम ने दबिश दी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कोल लेवी स्कीम से जुड़े मामले में उनके आवास और अन्य ठिकानों पर जांच की जा रही है। टीम दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है।

गरियाबंद में ज्वेलर्स और कारोबारियों के प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई
गरियाबंद जिले के गोबरा नवापारा और राजिम में कारोबारियों के प्रतिष्ठानों पर भी छापेमारी की गई।
कार्रवाई के दायरे में कारोबारी विमल पारख और राजा पारख के प्रतिष्ठान बताए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, शांति विजय और नवकार ज्वेलर्स सहित अन्य ठिकानों पर भी जांच की गई। राजा पारख के आवास पर भी टीम पहुंची।
कटघोरा में DMF मामले की जांच, नगर पालिका अध्यक्ष के घर दबिश
कोरबा जिले के कटघोरा में DMF घोटाले से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में EOW की टीम ने गुरुवार सुबह दो ठिकानों पर दबिश दी।
जांच के दायरे में कटघोरा नगर पालिका अध्यक्ष राज जायसवाल और नगर सैनिक दिलीप कंवर के ठिकाने बताए गए हैं। दोनों स्थानों पर दस्तावेजों की जांच और पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है।
क्या तलाश रही हैं जांच एजेंसियां?
छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों का ध्यान मुख्य रूप से दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और डिजिटल रिकॉर्ड पर बताया जा रहा है। अलग-अलग मामलों में जांच के विषय भी अलग हैं—
- शराब मामला: कारोबार और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड।
- कोल लेवी मामला: कोयला परिवहन, कथित लेवी वसूली और उससे जुड़े आर्थिक लेन-देन।
- DMF मामला: जिला खनिज न्यास की राशि से जुड़े कार्यों, भुगतान और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल।
छत्तीसगढ़ में इन मामलों की जांच पहले से चल रही है। शराब घोटाले में EOW-ACB ने अक्टूबर 2026 में 20 व्यक्तियों और 22 फर्मों को शामिल करते हुए दसवां पूरक आरोपपत्र विशेष अदालत में पेश किया था। वहीं, कोल लेवी मामले में भी एजेंसी ने अक्टूबर में पूरक आरोपपत्र दाखिल किया था। PTIFeed +1
छापेमारी के बाद अब किन सवालों के जवाब जरूरी?
इस कार्रवाई के बाद कई अहम सवाल सामने हैं। क्या जांच एजेंसियों को नए दस्तावेज या वित्तीय साक्ष्य मिले हैं? क्या इन ठिकानों से जब्त डिजिटल उपकरणों में मामलों से जुड़े लेन-देन के प्रमाण मिलेंगे? क्या जांच के आधार पर नए लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा या आगे गिरफ्तारी भी हो सकती है?
इन सवालों का जवाब जांच एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी और आगे की कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा।


