
भिलाई के वार्ड 22 कुरुद में तालाब की बदहाली को लेकर प्रदर्शन, सीवरेज और नालियों के पानी का भी आरोप; निगम अधिकारियों ने जल्द सफाई का दिया आश्वासन
भिलाई, 7 अक्टूबर 2026।
भिलाई नगर निगम के वार्ड क्रमांक 22 कुरुद बस्ती स्थित नकटा तालाब की बदहाल स्थिति को लेकर बुधवार को स्थानीय जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और रहवासियों ने जल सत्याग्रह किया। प्रदर्शन में शामिल कुछ लोग तालाब के पानी में उतर गए और जलकुंभी से भरे तालाब के बीच खड़े होकर निगम प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लंबे समय से तालाब की सफाई, जलकुंभी हटाने, नालियों के जाम होने और आसपास से सीवरेज का पानी तालाब में पहुंचने की शिकायत की जा रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
रेखांकित न्यूज की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान तालाब की स्थिति काफी खराब दिखाई दी। पानी का बड़ा हिस्सा जलकुंभी से ढका हुआ था। जगह-जगह कचरा और अन्य गंदगी दिखाई दे रही थी। गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद बचे अवशेष, लकड़ियां और मिट्टी भी पानी में तैरती दिखाई दी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सफाई के अभाव में तालाब की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
भिलाई नगर निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड में वार्ड 22 को कुरुद बस्ती के नाम से दर्ज किया गया है। निगम के वर्क ऑर्डर रिकॉर्ड में जून 2025 में वार्ड 22 कुरुद के नकटा तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य का उल्लेख भी मिलता है। वहीं सितंबर 2026 में निगम क्षेत्र के चिन्हांकित विसर्जन स्थलों में नकटा तालाब, कुरुद को भी शामिल किया गया था।

जलकुंभी के बीच उतरे प्रदर्शनकारी, सुरक्षा को लेकर उठाए सवाल
जल सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे भानुप्रताप सिंह सहित प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि तालाब की गहराई करीब 16 से 20 फीट तक है और बड़े हिस्से में जलकुंभी फैली हुई है। ऐसे में उनका सवाल है कि इतनी गहराई वाले तालाब में लोगों को उतारकर हाथ से जलकुंभी निकालना कितना सुरक्षित है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि निगम की ओर से स्थानीय मछुआरों को तालाब की सफाई का काम दिए जाने की बात कही जा रही है। उनका कहना है कि यदि सफाई के लिए मछुआरों या मजदूरों को तालाब के भीतर उतारा जाता है तो उनके सामने डूबने या किसी दुर्घटना का खतरा बना रहेगा। इसलिए उनका जोर मैनुअल सफाई के बजाय मशीन से सफाई कराने पर है।
उनकी मांग है कि दुर्ग नगर निगम में उपलब्ध पॉन्ड क्लीनिंग या सरफेस स्किमर मशीन को भिलाई लाकर नकटा तालाब की सफाई कराई जाए। हाल ही में दुर्ग से मशीन मंगाकर रिसाली क्षेत्र के जलकुंभी प्रभावित तालाबों की सफाई शुरू किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब मशीन से बड़े तालाबों की जलकुंभी निकाली जा सकती है तो लोगों की जान जोखिम में डालकर मैनुअली सफाई कराने के बजाय मशीन का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

सिर्फ जलकुंभी नहीं, सीवरेज और नाली की समस्या भी
स्थानीय लोगों की शिकायत केवल तालाब में जमा जलकुंभी तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि आसपास की नालियों के जाम होने और सीवरेज का पानी तालाब तक पहुंचने से इसकी स्थिति और खराब हो रही है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि तालाब को एक बार साफ भी कर दिया गया, लेकिन उसमें गंदा पानी पहुंचने की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो कुछ ही समय बाद फिर वही स्थिति बन जाएगी। इसलिए तालाब की सफाई के साथ-साथ नाली और सीवरेज व्यवस्था को भी दुरुस्त करने की मांग की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने कुरुद क्षेत्र के तीन तालाबों—शीतला तालाब, नकटा तालाब और घासीदास नगर के तालाब—की स्थिति पर भी निगम का ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि इन जलस्रोतों की नियमित सफाई और रखरखाव की जरूरत है।

पार्षद अनीता साहू ने कहा- कई बार निगम को आवेदन दिया
वार्ड 22 की पार्षद अनीता अजय साहू से भी रेखांकित न्यूज ने बातचीत की। पार्षद का कहना है कि तालाब की सफाई और उससे जुड़ी समस्याओं को लेकर निगम प्रशासन तथा अधिकारियों को कई बार आवेदन और शिकायतें दी गई हैं। उनका कहना है कि तालाब की स्थिति को देखते हुए अब ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
उनके मुताबिक आने वाले त्योहारों के दौरान स्थानीय लोगों की तालाब पर निर्भरता बढ़ती है। विशेषकर छठ पर्व के दौरान आसपास के लोग तालाब का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में त्योहारों से पहले तालाब की पूरी तरह सफाई और व्यवस्था दुरुस्त करना जरूरी है।

निगम का पक्ष- हर साल त्योहारों से पहले होती है सफाई
मौके पर निगम के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारी भी मौजूद थे। स्वास्थ्य अधिकारी जावेद अली ने कहा कि त्योहारों को देखते हुए हर साल की तरह इस बार भी तालाबों की सफाई कराई जा रही है।
वहीं भिलाई नगर निगम के जोन-2 आयुक्त अमरनाथ दुबे ने आंदोलन कर रहे लोगों से बातचीत की और मशीन से सफाई के मुद्दे पर निगम की स्थिति स्पष्ट की।
आयुक्त के मुताबिक तालाब की सफाई के लिए मशीन मंगाने के संबंध में निगम की ओर से पहले ही प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है और इसके लिए राशि भी जमा की जा चुकी है। हालांकि, इसी बीच रिसाली नगर निगम की ओर से भी मशीन के लिए आवेदन किया गया था। इसके चलते मशीन पहले रिसाली क्षेत्र में भेजी गई।
आयुक्त ने बताया कि मशीन को भिलाई निगम क्षेत्र में आने में अभी करीब 5 से 7 दिन लग सकते हैं। यानी निगम की ओर से मशीन उपलब्ध होने के बाद नकटा तालाब में मशीन से सफाई की संभावना बन सकती है।

मशीन को लेकर सामने आया अलग-अलग दावों का मामला
मशीन को लेकर इस आंदोलन में एक और मुद्दा सामने आया। निगम अधिकारियों की ओर से बताया गया कि रिसाली में मशीन पहले भेजे जाने के पीछे वहां से आए आवेदन और पहल की भूमिका रही।
वहीं जल सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे भानुप्रताप सिंह का दावा है कि भिलाई निगम के लिए मशीन को लेकर उन्होंने पहले ही आवेदन दिया था। उनका आरोप है कि इसके बावजूद भिलाई निगम ने समय रहते इस दिशा में प्रभावी पहल नहीं की।
भानुप्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि यदि पहले से आवेदन मौजूद था तो मशीन को नकटा तालाब के लिए प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए था। उनका कहना है कि आंदोलन के बाद निगम के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और सफाई शुरू हुई।
हालांकि, यह प्रदर्शनकारियों का आरोप है। निगम की ओर से मशीन की उपलब्धता और प्राथमिकता को लेकर अलग स्थिति बताई गई है। ऐसे में इस मामले में वास्तविक आवेदन की तारीख, राशि जमा करने की तारीख और मशीन आवंटन की प्रक्रिया के दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।

सत्याग्रह के बाद मौके पर जेसीबी और सफाई कर्मचारी
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान नकटा तालाब के किनारों पर जेसीबी के जरिए जलकुंभी हटाने का काम भी होता दिखाई दिया। इसके अलावा कुछ कर्मचारी सफाई के औजारों के साथ मैनुअली जलकुंभी और अन्य गंदगी हटाने का प्रयास करते नजर आए।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जल सत्याग्रह के बाद निगम का अमला मौके पर पहुंचा है। भानुप्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि इससे पहले लंबे समय से शिकायतों के बावजूद इस तरह की सक्रियता दिखाई नहीं दी।
दूसरी ओर निगम का कहना है कि त्योहारों से पहले तालाबों की सफाई नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है और सफाई का काम किया जा रहा है।
तालाब की सफाई से आगे अब जीर्णोद्धार की मांग
प्रदर्शनकारियों की मांग सिर्फ जलकुंभी हटाने तक सीमित नहीं है। वे नकटा तालाब के समग्र जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण की मांग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि तालाब के किनारों, पानी की गुणवत्ता, नाली और सीवरेज व्यवस्था तथा आसपास की स्वच्छता को एक साथ ठीक किया जाना चाहिए। केवल ऊपर दिखाई दे रही जलकुंभी निकाल देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
उनका यह भी कहना है कि तालाब की गहराई को देखते हुए भविष्य में किसी भी सफाई अभियान में सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जाना चाहिए।

जल सत्याग्रह के बीच निगम और पार्षद की जवाबदेही पर भी सवाल
तालाब की सफाई का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक समस्या नहीं रह गया है। मौके पर मौजूद लोगों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए। कुछ लोगों ने पार्षद से पूछा कि यदि समस्या लंबे समय से बनी हुई थी तो उसका स्थायी समाधान पहले क्यों नहीं हुआ।
पार्षद की ओर से पहले दिए गए आवेदनों का हवाला देते हुए कहा गया कि निगम प्रशासन को लगातार जानकारी दी गई थी।
यानी यहां सवाल दो स्तरों पर खड़ा होता है—एक तरफ स्थानीय जनप्रतिनिधि शिकायतों को निगम तक पहुंचाने की बात कर रहे हैं, दूसरी तरफ रहवासी यह जानना चाहते हैं कि शिकायतों के बाद कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

निकाय चुनाव से पहले तालाब की राजनीति भी गरमाई
नकटा तालाब का मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब भिलाई नगर निगम के आगामी नगरीय निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। हाल में वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया भी सामने आ चुकी है और वार्ड 22 कुरुद बस्ती को अनारक्षित श्रेणी में रखा गया है।
ऐसे में शहर के अलग-अलग वार्डों में स्थानीय समस्याओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर चर्चा बढ़ना स्वाभाविक है। नकटा तालाब का मामला भी इसी राजनीतिक माहौल से जुड़ता दिखाई दे रहा है।
मौके पर मौजूद भाजपा से जुड़े जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने आंदोलन का समर्थन किया और निगम प्रशासन तथा महापौर पर शहर के तालाबों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए। प्रदर्शन के दौरान निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली और स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को लेकर भी आलोचना हुई।
हालांकि, तालाब की सफाई की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी तय करने का सवाल राजनीतिक आरोपों से अलग प्रशासनिक रिकॉर्ड और मौके पर किए गए काम के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।
अब असली सवाल- मशीन कब आएगी और तालाब कब साफ होगा?
नकटा तालाब का विवाद फिलहाल तीन प्रमुख सवालों पर आकर टिक गया है। पहला, तालाब की जलकुंभी और गंदगी पूरी तरह कब हटेगी? दूसरा, क्या दुर्ग से आने वाली पॉन्ड क्लीनिंग मशीन वास्तव में नकटा तालाब में लगाई जाएगी? और तीसरा, तालाब में पहुंच रहे गंदे पानी और नालियों की समस्या का स्थायी समाधान कब होगा?
निगम के जोन-2 आयुक्त ने मशीन आने में करीब 5 से 7 दिन लगने की बात कही है। अब देखना होगा कि इस समयसीमा के भीतर मशीन नकटा तालाब तक पहुंचती है या नहीं और उससे कितने हिस्से की सफाई हो पाती है।
फिलहाल प्रदर्शनकारी लिखित आश्वासन और स्थायी कार्रवाई की मांग पर कायम हैं। उनका कहना है कि जब तक निगम प्रशासन की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक जल सत्याग्रह जारी रखने का निर्णय लिया जा सकता है।
यह मामला अब केवल एक तालाब की सफाई का नहीं रह गया है। यह इस सवाल से भी जुड़ गया है कि शहर के पारंपरिक जलस्रोतों का रखरखाव किस तरह किया जा रहा है, शिकायतों पर निगम कितनी जल्दी कार्रवाई करता है और त्योहारों से पहले नागरिकों को स्वच्छ एवं सुरक्षित तालाब उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किस तरह निभाई जाती है।
पूरी ग्राउंड रिपोर्ट आप निचे दिए विडियो पर क्लिक कर के देख सकते है
रेखांकित न्यूज की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई तस्वीर के मुताबिक नक्टी तालाब इस समय जलकुंभी और गंदगी से जूझ रहा है। अब निगाह निगम के अगले कदम पर है—मशीन आती है, तालाब साफ होता है और जीर्णोद्धार की मांग पर क्या फैसला लिया जाता है, यही इस पूरे विवाद की अगली कड़ी होगी।

