
नई दिल्ली। Special Intensive Revision (SIR) के दौरान मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में कथित बदलाव को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने Form 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी थी। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद यह देखा जाएगा कि फॉर्म में बदलाव किसने किया।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना तेज कर दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने चुनाव आयोग के पहले के दावे पर सवाल उठाते हुए CEC पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह निष्कर्ष नहीं दिया है कि CEC ने गैरकानूनी तरीके से Form 6 बदला था। कोर्ट ने रिकॉर्ड मंगाकर मामले की जांच की दिशा में कदम बढ़ाया है।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के सामने Form 6 में बदलाव का मुद्दा उठा। याचिकाकर्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान इस्तेमाल होने वाले ऑनलाइन Form 6 में बदलाव किया गया है।
इस पर CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि कोर्ट ने किसी संशोधित Form 6 को मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड आने के बाद अदालत यह देखना चाहेगी कि आखिर फॉर्म में बदलाव किसने किया।
कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। हालांकि, CEC को तत्काल निलंबित करने या उनके कामकाज पर रोक लगाने की मांग पर फिलहाल कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया गया।
Form 6 में आखिर विवाद क्या है?
Form 6 वह वैधानिक आवेदन है जिसका इस्तेमाल पात्र नागरिक पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए करते हैं।
SIR के दौरान इसके ऑनलाइन संस्करण के साथ एक अतिरिक्त घोषणा यानी declaration जोड़े जाने को लेकर विवाद हुआ। इसमें आवेदक से उसके या उसके माता-पिता/दादा-दादी के पुराने SIR रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी देने की बात सामने आई।
याचिकाकर्ता पक्ष का आरोप है कि इस अतिरिक्त आवश्यकता को Form 6 में बिना निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के शामिल किया गया। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना रहा है कि Form 6 में मूल रूप से कोई बदलाव नहीं किया गया, बल्कि SIR के दौरान उसके साथ एक अतिरिक्त declaration लगाया गया था।
यही अंतर अब पूरे विवाद का केंद्रीय मुद्दा बन गया है—क्या Form 6 में बदलाव किया गया या केवल SIR के लिए उसके साथ अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई?
26 सितंबर की ECI प्रेस रिलीज से क्यों बढ़ा विवाद?
मामला इसलिए भी राजनीतिक रूप से गरमा गया है क्योंकि 26 सितंबर की चुनाव आयोग की प्रेस रिलीज को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, ECI ने कहा था कि SIR के लिए Form 6 के साथ जुड़े declaration को सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के आदेश में स्वीकार किया था। अब 5 अक्टूबर को CJI की यह टिप्पणी कि किसी modified Form 6 को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी, विपक्ष के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है: ECI का पक्ष यह है कि Form 6 को संशोधित नहीं किया गया था, बल्कि SIR के लिए अतिरिक्त declaration जोड़ा गया था। इसलिए यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने यह न्यायिक रूप से साबित कर दिया है कि CEC ने Form 6 को गैरकानूनी तरीके से बदला था।
राहुल गांधी बोले- ‘अब कोई शक नहीं’
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने Form 6 में “गैरकानूनी और एकतरफा” बदलाव किया और इसे BJP को फायदा पहुंचाने से जोड़ा। राहुल गांधी ने कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी CEC पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि Form 6 में कथित बदलाव जानबूझकर किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका असर खास तौर पर Gen Z यानी पहली बार वोट देने वाले युवा मतदाताओं पर पड़ सकता है।
यही वजह है कि अब राजनीतिक बयानबाजी में यह सवाल तेजी से उठ रहा है—“अगर सुप्रीम कोर्ट ने बदलाव को मंजूरी नहीं दी, तो फिर Form 6 में यह बदलाव या अतिरिक्त declaration आया कैसे?”
CEC के खिलाफ याचिकाओं पर भी सुनवाई
Form 6 विवाद केवल एक अलग तकनीकी मुद्दा नहीं है। यह मामला उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिनमें CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और SIR से जुड़े कई फैसलों को चुनौती दी गई है।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉय माल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि चुनाव आयोग के किसी फैसले में कानून का उल्लंघन पाया गया तो अदालत उस पर विचार कर सकती है।
अब रिकॉर्ड से खुलेगा असली राज
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब सबसे अहम सवाल यह है कि Form 6 में बदलाव/अतिरिक्त declaration की प्रक्रिया वास्तव में कैसे हुई और इसे किस स्तर पर मंजूरी दी गई थी।
अदालत के सामने रिकॉर्ड आने के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि बदलाव किसने किया, किस प्रक्रिया के तहत किया गया और क्या वह वैधानिक नियमों के अनुरूप था।
फिलहाल कांग्रेस और विपक्ष CEC पर आरोप लगा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग Form 6 में संशोधन के आरोप को खारिज करते हुए अतिरिक्त SIR declaration की बात कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस विवाद पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। इसलिए “CEC ने झूठ बोला” या “CEC ने गैरकानूनी बदलाव किया” जैसे आरोपों को फिलहाल राजनीतिक दलों के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

