
नई दिल्ली, 2 अक्टूबर 2026। देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने एक अहम कदम उठाया है। आयोग ने उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
इस अभियान का उद्देश्य SIR के दौरान मतदाता सूची से छूट गए पात्र लोगों, युवा मतदाताओं और पहली बार मतदान करने वाले पात्र नागरिकों को दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। आयोग ने इसके लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs), जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) को निर्देश दिए हैं।
SIR के बाद पहले और अब की वोटर लिस्ट का होगा मिलान
चुनाव आयोग के निर्देश के मुताबिक संबंधित अधिकारी SIR से पहले की मतदाता सूची और मौजूदा सूची की तुलना करेंगे। इसका मकसद ऐसे मतदाताओं की पहचान करना है, जिनके नाम पहले की सूची में थे लेकिन बाद की सूची में दिखाई नहीं दे रहे हैं।
ऐसे पात्र मतदाताओं की पहचान होने के बाद उन्हें मतदाता सूची में शामिल करने के लिए Form-6 के माध्यम से आवेदन कराया जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR पूरा हो चुके राज्यों में मतदाता सूची में शामिल होने के लिए सामान्य वैधानिक Form-6 का इस्तेमाल किया जाएगा।
BLO घर-घर जाकर करेंगे संपर्क
इस अभियान में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की भूमिका अहम होगी। अधिकारियों को ऐसे मामलों में घर-घर जाकर मतदाताओं की स्थिति की जानकारी लेने और पात्र लोगों से Form-6 भरवाने के लिए कहा गया है।
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) से भी इस प्रक्रिया में सहयोग लेने की बात कही है। इससे मतदाता सूची में छूटे लोगों की पहचान और उनके पुनः नामांकन की प्रक्रिया को बूथ स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
पहली बार वोट देने वालों पर भी फोकस
विशेष अभियान सिर्फ SIR के दौरान नाम छूटने वाले मतदाताओं तक सीमित नहीं है। इसमें युवा और पहली बार मतदान करने के पात्र नागरिकों को भी शामिल किया गया है।
आयोग के 26 सितंबर के फैसले के अनुसार SIR पूरा हो चुके 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसे नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने के लिए लगातार अपडेट की सामान्य प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं।
बूथ स्तर पर विशेष कैंप भी लगाए जा सकते हैं
मतदाता पंजीकरण को आसान बनाने के लिए बूथ स्तर पर विशेष कैंप आयोजित किए जाने की व्यवस्था भी अभियान का हिस्सा हो सकती है। खास तौर पर ऐसे इलाकों पर ध्यान दिया जा सकता है, जहां लोगों तक सामान्य प्रक्रिया के जरिए पहुंचना मुश्किल होता है।
इनमें श्रमिक बस्तियां, बेघर लोग, शेल्टर होम और अन्य वंचित या हाशिए पर रहने वाले समूह शामिल हो सकते हैं।
राजनीतिक दलों के BLA को भी दी जाएगी जानकारी
BLO द्वारा तैयार की जाने वाली सूची को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) के साथ साझा करने का निर्देश दिया गया है।
फील्ड वेरिफिकेशन और Form-6 से जुड़ी जानकारी संबंधित ERO तक भेजी जाएगी। इसके बाद मतदाता का नाम सूची में शामिल करने का अंतिम निर्णय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी करेंगे।
Form-6 में अतिरिक्त घोषणा को लेकर भी बदलाव
SIR को लेकर उठे सवालों के बीच Form-6 से जुड़ी व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। आयोग के मुताबिक SIR के दौरान Form-6 के साथ इस्तेमाल की गई अतिरिक्त घोषणा SIR चरण तक सीमित रहेगी।
जहां SIR पूरा हो चुका है, वहां सामान्य वैधानिक Form-6 के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल करने की प्रक्रिया होगी। आयोग ने यह भी कहा है कि SIR के दौरान इस्तेमाल की गई अतिरिक्त घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था, जबकि गैर-SIR अवधि में Registration of Electors Rules, 1960 के तहत लागू फॉर्म इस्तेमाल किए जाएंगे।
आयोग ने कहा- SIR के बड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए
SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबरों के बीच आयोग ने 26 सितंबर की बैठक के बाद कहा था कि देशभर में SIR से जुड़े प्रमुख फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
आयोग ने यह भी बताया कि 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है और बाकी राज्यों में प्रक्रिया जारी है। अंतिम राष्ट्रीय मतदाता संख्या शेष राज्यों में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
20 राज्यों में अभियान क्यों महत्वपूर्ण?
SIR के दौरान मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर बदलाव को लेकर राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों ने सवाल उठाए हैं। इसी पृष्ठभूमि में अब चुनाव आयोग का यह अभियान छूटे हुए पात्र मतदाताओं को दोबारा नामांकन का रास्ता उपलब्ध कराने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
हालांकि, इस अभियान को चुनाव आयोग की ओर से किसी फैसले की वापसी के तौर पर पेश नहीं किया गया है। आयोग ने इसे continuous updation यानी मतदाता सूची के निरंतर अद्यतन की प्रक्रिया के तहत चलाया जाने वाला विशेष अभियान बताया है।


