
बिलासपुर। निलंबित IPS अधिकारी रतनलाल डांगी से जुड़े महिला उत्पीड़न मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सरकार ने अदालत को बताया कि मामले की प्राथमिक जांच में लगाए गए आरोप प्रमाणित पाए गए हैं। इसके बाद अब मामले की आगे की विभागीय जांच के लिए जांच अधिकारियों में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है।
हाईकोर्ट को दी गई जानकारी के अनुसार, पुलिस महानिदेशक (DGP) की ओर से गृह सचिव को प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें IPS दीपांशु काबरा को जांचकर्ता अधिकारी और IPS प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाए जाने का प्रस्ताव है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह फिलहाल प्रस्ताव है और आगे की प्रक्रिया में गृह विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
पहले की जांच पर उठे थे सवाल
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पहले की जांच प्रक्रिया और जांच अधिकारियों की निष्पक्षता को लेकर हाईकोर्ट में सवाल उठाए गए थे। शिकायत की प्रारंभिक जांच IPS आनंद छाबड़ा और IPS मिलना कुर्रे को सौंपी गई थी। याचिकाकर्ता ने जांच की निष्पक्षता को लेकर आपत्ति जताते हुए जांच व्यवस्था में बदलाव की मांग की थी।
मामले में हाईकोर्ट ने 12 अगस्त 2026 की सुनवाई के बाद संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा था। इसके बाद 2 सितंबर की सुनवाई में जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर अदालत की ओर से नाराजगी जताए जाने की बात भी सामने आई थी।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला एक महिला योग प्रशिक्षक की शिकायत से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, महिला ने आरोप लगाया है कि ऑनलाइन योग सत्रों के दौरान IPS रतनलाल डांगी के साथ संपर्क हुआ और बाद में कथित तौर पर आपत्तिजनक संदेश तथा वीडियो कॉल के दौरान अनुचित व्यवहार किया गया। महिला ने विरोध करने पर धमकी दिए जाने के भी आरोप लगाए हैं।महिला ने 15 अक्टूबर 2025 को तत्कालीन DGP के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। बाद में कार्रवाई से असंतुष्ट होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने केंद्र और राज्य के गृह विभाग के अधिकारियों के समक्ष भी शिकायत की और हाईकोर्ट का रुख किया।
अब आगे क्या?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्राथमिक जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने की जानकारी सरकार ने हाईकोर्ट के सामने रखी है। आगे की विभागीय जांच के लिए दीपांशु काबरा और प्रशांत कुमार अग्रवाल के नाम की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होने की जानकारी सामने आई है। अब अगली सुनवाई में गृह विभाग के प्रस्ताव और आगे की जांच प्रक्रिया को लेकर अदालत के सामने क्या स्थिति रखी जाती है, इस पर नजर रहेगी।
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