
दुर्ग, 26 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के उतई थाना क्षेत्र में साढ़े 4 साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या की कोशिश करने के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। बच्ची को आरोपी ने मृत समझकर जूट के बोरे में बंद कर घर के पीछे स्थित खंडहर में फेंक दिया था। हालांकि, उसकी सांसें चल रही थीं और समय रहते लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाया।
मामले में आरोपी धनेश्वर साहू उर्फ जनता (40) को पुलिस ने घटना के बाद गिरफ्तार किया था। वारदात के 153 दिन बाद 25 सितंबर 2026 को विशेष पॉक्सो अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। इसके अगले दिन, 26 सितंबर को सजा का आदेश जारी किया गया।

5 रुपये लेकर दुकान गई थी बच्ची
घटना 10 अप्रैल 2026 की दोपहर करीब 11:30 बजे बंजारीपारा क्षेत्र में हुई। बच्ची अपनी दादी से 5 रुपये लेकर घर के पास स्थित दुकान से खाने का सामान लेने निकली थी।
आरोप है कि इसी दौरान धनेश्वर साहू उसे बहला-फुसलाकर अपने घर की छत पर ले गया। पास की दुकान के CCTV फुटेज में बच्ची को आरोपी के साथ जाते हुए देखा गया था।
पुलिस के मुताबिक, दुष्कर्म के बाद बच्ची के चिल्लाने पर आरोपी ने उसके मुंह पर कपड़ा दबाया और गला घोंटकर उसकी हत्या करने की कोशिश की। बच्ची के बेहोश होने के बाद आरोपी ने उसे मृत समझ लिया और साक्ष्य छिपाने के लिए तकिया कवर और जूट के बोरे में बंद कर घर के पीछे खंडहर में फेंक दिया।


बोरे से पैर बाहर दिखा तो खुला राज
बच्ची के काफी देर तक घर नहीं लौटने पर परिजनों और मोहल्ले के लोगों ने तलाश शुरू की। इसी दौरान दो युवकों की नजर खंडहर में पड़े बोरे पर गई। बोरे से बच्ची का पैर बाहर निकला हुआ था।
दोनों युवकों ने बोरा खोला तो बच्ची गंभीर हालत में मिली। इसके बाद उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया था और लोगों ने थाने का घेराव कर कार्रवाई की मांग की थी।

15 दिन में पुलिस ने पेश किया चालान
पुलिस ने CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया। उसे अगले दिन अदालत में पेश किया गया। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने 25 अप्रैल 2026 को चालान पेश कर दिया।
मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 87, 109, 238 और 65(2) के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 5(ड) सहपठित धारा 6 और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत कार्रवाई की।
DNA और फोरेंसिक साक्ष्यों ने भी जोड़ा
जांच के दौरान आरोपी के घर से बाल, तकिया कवर, जूट की बोरी, बच्ची के कपड़े और आरोपी के कपड़े बरामद किए गए। इनका फोरेंसिक परीक्षण और DNA मिलान कराया गया।
चिकित्सकीय जांच में बच्ची के शरीर, जांघ और गले पर खरोंच के निशान, अंदरूनी चोट और अधिक रक्तस्राव की बात सामने आई। पुलिस के अनुसार, फोरेंसिक और DNA से मिले साक्ष्यों ने आरोपी को घटना से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
कोर्ट में बच्ची ने आरोपी की पहचान की
मामले की सुनवाई के दौरान साढ़े 4 साल की बच्ची ने अदालत में पर्दे के पीछे खड़े आरोपी धनेश्वर साहू की पहचान की और अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया।
अदालत के सामने CCTV फुटेज, DNA और फोरेंसिक साक्ष्य, चिकित्सकीय रिपोर्ट तथा बच्ची की गवाही समेत अन्य साक्ष्य रखे गए। इन साक्ष्यों के आधार पर विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को दोषी माना।
उम्रकैद के साथ अलग-अलग धाराओं में सजा
अपर सत्र न्यायाधीश की विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म, हत्या के प्रयास और साक्ष्य छिपाने से जुड़े अपराधों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा अलग-अलग धाराओं में 7 साल, 10 साल और 7 साल के सश्रम कारावास की सजा भी दी गई।
अदालत ने विभिन्न धाराओं में कुल 13 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना जमा नहीं करने पर अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
नोट: नाबालिग पीड़ित की पहचान उजागर न हो, इसलिए खबर में बच्ची का नाम, पता या पहचान बताने वाली कोई व्यक्तिगत जानकारी शामिल नहीं की गई है।

