दिल्ली में CJP के प्रदर्शन से पहले बड़ा फैसला: जंतर-मंतर के आसपास 4 किमी तक 24 घंटे मोबाइल इंटरनेट बंद, गृह मंत्रालय की मंजूरी

9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक लागू रहेगा प्रतिबंध; मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर CJP ने प्रदर्शन का ऐलान किया है। दिल्ली पुलिस पहले ही अनुमति देने से इनकार कर चुकी है और राजधानी में सुरक्षा व परिवहन पर कई पाबंदियां लगाई गई हैं।

CJP प्रदर्शन से पहले दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट निलंबन का पुलिस आदेश
CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले जनपथ–कर्तव्य पथ क्रॉसिंग के चार किलोमीटर के दायरे में 24 घंटे मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित रहेंगी।

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, जनपथ–कर्तव्य पथ क्रॉसिंग के चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 24 घंटे के लिए निलंबित रहेंगी। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक लागू रहेगा। आदेश में सभी तरह की मोबाइल इंटरनेट तकनीकों को निलंबित करने के लिए दूरसंचार कंपनियों को आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है। इस फैसले को केंद्रीय गृह सचिव की मंजूरी मिलने की बात आदेश में दर्ज है।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब CJP और कुछ छात्र संगठनों ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। आयोजक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। निर्वाचन आयोग और सरकार पर लगाए गए आरोप विवाद का विषय हैं; इन्हें साबित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से किया इनकार

इंटरनेट बंद करने का आदेश ऐसे घटनाक्रम के बाद आया है, जब दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। पुलिस के अनुसार, आयोजकों की ओर से प्रदर्शन की सूचना निर्धारित समय से काफी देर से दी गई थी। पुलिस ने यह भी कहा कि पिछले प्रदर्शन के दौरान आयोजकों ने कथित तौर पर तय शर्तों और लिखित आश्वासनों का पालन नहीं किया था। नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक प्रावधान लागू होने का भी हवाला दिया गया है।

दिल्ली पुलिस ने अपने सार्वजनिक बयान में कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन इसके साथ आम लोगों की सुरक्षा, यातायात और शहर की सामान्य गतिविधियों को बनाए रखना भी जरूरी है। पुलिस ने जुलाई में हुए पिछले प्रदर्शन का हवाला देते हुए भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी चिंताएं रखी हैं।

दूसरी ओर, CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और अन्य आयोजकों ने संकेत दिया है कि अनुमति नहीं मिलने के बावजूद वे प्रदर्शन की योजना से पीछे नहीं हटेंगे। आयोजकों ने कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि उसका उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना है।

मेट्रो स्टेशन और ट्रेनों पर भी असर

प्रदर्शन से पहले राजधानी में परिवहन व्यवस्था को लेकर भी कई कदम उठाए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने तथा कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों को रद्द करने की व्यवस्था की गई है। इन कदमों का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों की भीड़ को संवेदनशील इलाकों में एकत्र होने से रोकना और संभावित यातायात बाधाओं को नियंत्रित करना बताया गया है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मेट्रो स्टेशनों को बड़े पैमाने पर बंद करने और परिवहन पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्तावों पर चिंता जताई। रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सुरक्षा इंतजामों के नाम पर आम नागरिकों के लिए अनावश्यक कठिनाइयां पैदा न हों।

विवाद के केंद्र में चुनाव आयोग और SIR

CJP के प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR है। आयोजक आरोप लगा रहे हैं कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम हटाने को लेकर अनियमितताएं हुई हैं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को इसकी जवाबदेही लेनी चाहिए। वहीं, निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची की शुद्धता और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार पुनरीक्षण करने की बात कही जाती रही है।

इसी बीच, निर्वाचन आयोग ने 9 अक्टूबर को Form-7 के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाने संबंधी आपत्तियों पर भी नए निर्देश जारी किए हैं। इनके तहत दावे और आपत्तियों की पूरी अवधि में एक व्यक्तिगत मतदाता अधिकतम 10 आवेदन और मतदाता सूची के नियमित अद्यतन के दौरान अधिकतम पांच आवेदन प्रति माह दाखिल कर सकेगा। यह आदेश ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों पर लागू है। हालांकि, यह निर्देश अलग प्रशासनिक कदम है और इसे CJP प्रदर्शन के लिए लगाए गए इंटरनेट प्रतिबंध का प्रत्यक्ष कारण नहीं बताया गया है।

10 अक्टूबर को सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन की परीक्षा

जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले इंटरनेट सेवाओं पर रोक, परिवहन प्रतिबंध और भारी सुरक्षा तैनाती ने राजधानी में नागरिक अधिकारों तथा सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज कर दी है। पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को इन कदमों का आधार बताया है, जबकि प्रदर्शन के आयोजक इसे अपनी मांगों को उठाने के अधिकार के संदर्भ में देख रहे हैं।

फिलहाल, मोबाइल इंटरनेट निलंबन का आदेश निर्धारित समय के अनुसार 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक लागू रहेगा। प्रदर्शन के दिन प्रशासन की कार्रवाई, आयोजकों का रुख और आम लोगों की आवाजाही पर इन प्रतिबंधों का वास्तविक असर आगे की स्थिति तय करेगा।


Nagendra sahu
Nagendra sahu
नागेन्द्र साहू छत्तीसगढ़ के भिलाई से हैं। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक (BJMC) और वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (MJ) की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वीडियो एडिटिंग ( Ex- भिलाई Times Sr Editor ) और डिजिटल कंटेंट में भी विशेषज्ञता के साथ वर्तमान में रेखांकित न्यूज़ का संचालन कर रहे हैं।
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