चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) का कार्यक्रम जारी किया। 11 दिसंबर तक दर्ज करा सकेंगे दावे और आपत्तियां, 28 दिसंबर तक होगा निपटारा। पहली बार मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों को पढ़ने योग्य PDF उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।

नई दिल्ली | 16 अक्टूबर 2026
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने छत्तीसगढ़ समेत 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision—SSR) की घोषणा की है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना, पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करना और मौजूदा प्रविष्टियों में सुधार करना है। यह कार्यक्रम ऐसे समय आया है, जब देश के कई हिस्सों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया और मतदाता सूची में नाम जोड़ने तथा हटाने को लेकर बहस चल रही है।
आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, 12 नवंबर 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होगी। इसके बाद मतदाता 11 दिसंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। इनका निपटारा 28 दिसंबर तक किया जाएगा और अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित की जाएगी।
आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। इस प्रक्रिया में पहली बार वोट डालने के योग्य हो रहे युवाओं और ऐसे पात्र नागरिकों को सूची में शामिल करने पर भी जोर रहेगा, जिनके नाम किसी कारण से दर्ज नहीं हैं।
SSR किन 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में होगा?
निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस चरण में निम्नलिखित 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण किया जाएगा।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया जारी है या हाल ही में पूरी हुई है, वहां SSR का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा। इसलिए यह कार्यक्रम फिलहाल सभी राज्यों पर एक साथ लागू नहीं होगा।
SSR का पूरा शेड्यूल: कब क्या होगा?

स्रोत: निर्वाचन आयोग का कार्यक्रम, जिसे इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट किया है।
SSR क्या है और SIR से कैसे अलग है?
SSR यानी Special Summary Revision (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) मतदाता सूची को नियमित रूप से अपडेट करने की प्रक्रिया है। इसमें नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना, गलत विवरणों में सुधार करना और नियमों के अनुसार अपात्र या अमान्य प्रविष्टियों पर कार्रवाई करना शामिल है।
इसके विपरीत, SIR यानी Special Intensive Revision (विशेष गहन पुनरीक्षण) अधिक व्यापक सत्यापन प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता सूची की गहन जांच और नए सिरे से गणना जैसी प्रक्रिया अपनाई जाती है।

SSR में भी नाम हटाने या किसी प्रविष्टि में बदलाव के लिए निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी है। इसे केवल इसलिए नहीं समझना चाहिए कि SIR पहले हुआ है, तो अब किसी नाम की जांच नहीं होगी।
मतदाता अपना नाम जुड़वाने या सुधार कराने के लिए क्या करें?
SSR के दौरान नागरिक निर्वाचन आयोग के निर्धारित फॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं।
फॉर्म 6: मतदाता सूची में नया नाम दर्ज कराने के लिए, जिसमें पहली बार वोट देने वाले पात्र नागरिक भी शामिल हैं।
फॉर्म 7: किसी नाम को हटाने या मतदाता सूची में दर्ज प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए।
फॉर्म 8: नाम, पता या अन्य विवरणों में सुधार, निवास स्थान बदलने अथवा मतदाता पहचान पत्र से जुड़े निर्धारित संशोधनों के लिए।
फॉर्म जमा करने से पहले संबंधित जानकारी और दस्तावेजों की जरूरत आधिकारिक निर्देशों के अनुसार जांचना उचित होगा। केवल आवेदन जमा होने से नाम जुड़ना या हटना अपने आप तय नहीं हो जाता; आवेदन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
पहली बार वोट डालने वालों के लिए क्यों अहम है यह प्रक्रिया?
SSR का एक प्रमुख उद्देश्य उन युवाओं को मतदाता सूची में शामिल करना है, जो मतदान की पात्रता हासिल कर चुके हैं या निर्धारित पात्रता तारीख तक हासिल करेंगे। इस कार्यक्रम में 1 जनवरी 2027 को मुख्य qualifying date यानी पात्रता की संदर्भ तारीख माना गया है।
आयोग ने 2027 में आगे आने वाली तीन अन्य पात्रता तारीखों—1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर—के लिए भी अग्रिम आवेदन स्वीकार करने की व्यवस्था बताई है। इन तारीखों के आधार पर पात्र होने वाले नागरिकों के आवेदन संबंधित अवधि में निपटाए जाएंगे।
इसका मतलब है कि युवाओं और पहली बार वोट देने वाले नागरिकों को अपनी पात्रता के अनुसार आवेदन करने का अवसर मिलेगा। जिन मतदाताओं का नाम पहले से सूची में है, उन्हें भी ड्राफ्ट सूची में अपना नाम, पता और अन्य विवरण जांच लेने चाहिए।
2027 के विधानसभा चुनावों से पहले क्यों महत्वपूर्ण है SSR?
यह प्रक्रिया ऐसे समय हो रही है, जब 2027 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश, गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तराखंड उन राज्यों में शामिल हैं, जहां अगले वर्ष चुनाव प्रस्तावित हैं।
मतदाता सूची का अद्यतन चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया है। पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करना, गलत विवरण ठीक करना और दावों तथा आपत्तियों का समय पर निपटारा करना चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत निर्वाचन आयोग को मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का अधिकार प्राप्त है। चुनाव से पहले सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने में मदद करती है कि पात्र मतदाता मतदान के अधिकार का इस्तेमाल कर सकें।
राजनीतिक दलों को पढ़ने योग्य PDF में मतदाता सूची देने की व्यवस्था
SSR से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि निर्वाचन आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में राजनीतिक दलों को ड्राफ्ट और अंतिम मतदाता सूची की पढ़ने योग्य PDF प्रतियां उपलब्ध कराने की व्यवस्था बताई है। इसका उद्देश्य सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन से जुड़े बदलावों को समझना और उनकी जांच करना आसान बनाना है।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मतदाता सूची की जांच और उसमें संभावित गलतियों को पहचानने के लिए राजनीतिक दल लंबे समय से अधिक उपयोगी डिजिटल प्रतियों की मांग करते रहे हैं। हालांकि, किसी भी आपत्ति या संभावित गड़बड़ी पर अंतिम कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होगी।
मतदाताओं के लिए क्या जरूरी है?
छत्तीसगढ़ समेत सूची में शामिल 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मतदाताओं के लिए सबसे जरूरी कदम यह है कि वे 12 नवंबर को ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद अपना नाम और विवरण जांचें। यदि नाम छूटा है या किसी प्रविष्टि में गलती है, तो निर्धारित अवधि में संबंधित फॉर्म और आवश्यक दस्तावेजों के साथ दावा या आपत्ति दर्ज कराएं।
11 दिसंबर दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तारीख है। अंतिम मतदाता सूची 4 जनवरी 2027 को प्रकाशित होनी है। इसलिए मतदाताओं को केवल अंतिम सूची का इंतजार करने के बजाय ड्राफ्ट सूची में ही अपनी जानकारी की जांच कर लेनी चाहिए।

