
बैलाडीला के डिपॉजिट-13 में पहले चरण में 7,200 पेड़ों की कटाई की अनुमति का दावा; लौह अयस्क का सैंपल नगरनार भेजे जाने से ग्रामीणों में नाराजगी
दंतेवाड़ा/बैलाडीला। बैलाडीला के विवादित डिपॉजिट-13 (नंदराज पहाड़) में लौह अयस्क खनन को लेकर एक बार फिर विरोध के हालात बनते नजर आ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति के मुताबिक, परियोजना के लिए वन विभाग ने पहले चरण में 7,200 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी है। इसके बाद क्षेत्र के 50 से ज्यादा गांवों के ग्रामीण दोबारा आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
डिपॉजिट-13 में खनन का मुद्दा नया नहीं है। वर्ष 2019 में भी आदिवासी समुदाय ने बड़े पैमाने पर विरोध किया था। उस दौरान ग्रामसभा की अनुमति और खनन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। विरोध के बाद परियोजना पर रोक की स्थिति बनी थी। 2019 के आंदोलन से जुड़ी रिपोर्टों में भी नंदराज पहाड़ को आदिवासी समुदाय के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया गया था।
7,200 पेड़ों की कटाई की अनुमति का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान प्रक्रिया में पहले चरण में करीब 7,200 पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई है। उनका दावा है कि आगे भी परियोजना के लिए और पेड़ों की कटाई की जा सकती है।
वर्ष 2019 में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, डिपॉजिट-13 परियोजना के लिए लगभग 25 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई प्रस्तावित थी। पर्यावरण और वन क्षेत्र को लेकर डिपॉजिट-13 पर पहले भी विवाद रहा है।
ग्रामीणों के लिए नंदराज पहाड़ धार्मिक आस्था का केंद्र
संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति के मुताबिक, नंदराज पहाड़ केवल लौह अयस्क का भंडार नहीं है, बल्कि आदिवासी समुदाय की धार्मिक आस्था से जुड़ा स्थान है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार नंदराज पहाड़ प्रकृति देवता नंदराज और उनकी पत्नी पितोर रानी माता/पितोद देवी से जुड़ा पवित्र स्थल है। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ को खनन के लिए काटने और वहां के जंगलों को हटाने से उनके धार्मिक स्थल और प्राकृतिक परिवेश को नुकसान पहुंचेगा।
डिपॉजिट-13 में खनन के विरोध का यही धार्मिक और पर्यावरणीय पहलू वर्ष 2019 के आंदोलन में भी प्रमुख मुद्दा रहा था।
10 टन लौह अयस्क का सैंपल नगरनार भेजे जाने की खबर
ग्रामीणों में नाराजगी उस समय और बढ़ गई, जब 10 टन लंप लौह अयस्क का पहला सैंपल नगरनार स्टील प्लांट भेजे जाने की जानकारी सामने आई।
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल यह नियमित व्यावसायिक खनन नहीं है। सैंपल की जांच के लिए लौह अयस्क भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।
वन विभाग की एसडीओ द्रोपदी ठाकुर के मुताबिक, पहाड़ पर बिखरे पत्थरों को जमा किया जा रहा है। वहीं एनसीएल अधिकारी अमित सिंग के अनुसार, अभी खदान में व्यावसायिक खनन शुरू नहीं हुआ है और केवल सैंपल भेजा गया है।
डिपॉजिट-13 में खनन का पुराना विवाद
डिपॉजिट-13 को लेकर खनन परियोजना लंबे समय से विवाद में रही है। 2019 में हजारों आदिवासियों ने यहां प्रस्तावित खनन के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उस समय ग्रामीणों ने ग्रामसभा की अनुमति और पेड़ों की कटाई को लेकर सवाल उठाए थे।
सरकारी दस्तावेजों में भी डिपॉजिट-13 को बैलाडीला क्षेत्र के भविष्य के लौह अयस्क उत्पादन विस्तार से जोड़ा गया है। हाल के सरकारी दस्तावेजों में डिपॉजिट-13 और डिपॉजिट-4 को भविष्य की उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाली परियोजनाओं में शामिल किया गया है।
वहीं, सीएमडीसी की ओर से पहले यह बताया जा चुका है कि एनएमडीसी-सीएमडीसी की संयुक्त कंपनी एनसीएल के जरिए डिपॉजिट-4 और डिपॉजिट-13 में 2026 में उत्पादन शुरू करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
फिलहाल सैंपल की जांच और खनन की आगे की प्रक्रिया के बीच ग्रामीणों के प्रस्तावित आंदोलन पर सबकी नजर है। आंदोलन की स्थिति में एक बार फिर पर्यावरण, पेड़ों की कटाई, धार्मिक आस्था और खनन परियोजना के बीच टकराव का मुद्दा सामने आ सकता है।

