
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के आधार पर तीन हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया। इनमें जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह शामिल हैं। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने नियुक्तियों की अधिसूचना जारी कर दी है।
तीनों न्यायाधीश 6 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे। इसके बाद शीर्ष अदालत में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़कर 37 हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृत न्यायिक क्षमता, CJI समेत, 38 जजों की है।
28 सितंबर को कॉलेजियम ने की थी सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर 2026 को हुई बैठक में तीनों मुख्य न्यायाधीशों को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने की सिफारिश की थी। कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार की प्रक्रिया पूरी हुई और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नियुक्तियों को औपचारिक रूप दिया गया।
तीनों नियुक्तियां अलग-अलग हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से हुई हैं—
- जस्टिस सुनीता अग्रवाल — गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश
- जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय — दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
- जस्टिस अपरेश कुमार सिंह — तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
राष्ट्रपति की नियुक्ति संबंधी आधिकारिक अधिसूचना में भी इन्हीं तीनों नामों की पुष्टि की गई है।
जस्टिस सुनीता अग्रवाल कौन हैं?
जस्टिस सुनीता अग्रवाल का न्यायिक करियर इलाहाबाद हाई कोर्ट से शुरू हुआ। उन्होंने 1989 में अवध विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की और 16 दिसंबर 1990 को अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया। उन्होंने मुख्य रूप से इलाहाबाद हाई कोर्ट में सिविल मामलों की पैरवी की।
21 नवंबर 2011 को उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 6 अगस्त 2013 को वह स्थायी न्यायाधीश बनीं। इसके बाद 23 जुलाई 2023 को गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।
सुप्रीम कोर्ट में उनका जाना न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, वह सुप्रीम कोर्ट की दूसरी महिला न्यायाधीश होंगी।
जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय का लंबा न्यायिक अनुभव
जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने 1991 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की और 11 मई 1991 को अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुए। उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में मुख्य रूप से सिविल और संवैधानिक मामलों में प्रैक्टिस की।
मई 2007 में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार का चीफ स्टैंडिंग काउंसल नियुक्त किया गया। नवंबर 2011 में वह इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश बने और अगस्त 2013 में स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।
इसके बाद 29 जुलाई 2023 को उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला। जनवरी 2025 में उनका तबादला दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में हुआ। उन्होंने 21 जनवरी 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला था।
कई हाई कोर्ट में न्यायिक जिम्मेदारी संभाल चुके हैं जस्टिस अपरेश कुमार सिंह
जस्टिस अपरेश कुमार सिंह का न्यायिक करियर भी काफी लंबा रहा है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए ऑनर्स और एलएलबी की पढ़ाई की और 1990 में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया। शुरुआत में उन्होंने पटना हाई कोर्ट में वकालत की और बाद में झारखंड हाई कोर्ट में प्रैक्टिस की।
24 जनवरी 2012 को उन्हें झारखंड हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 16 जनवरी 2014 को स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। उन्होंने दिसंबर 2022 से फरवरी 2023 तक झारखंड हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली।
इसके बाद अप्रैल 2023 में वह त्रिपुरा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। जुलाई 2025 में उनका तबादला तेलंगाना हाई कोर्ट किया गया, जहां उन्होंने 19 जुलाई 2025 को मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।
सुप्रीम कोर्ट में अब सिर्फ एक पद रहेगा खाली
तीनों न्यायाधीशों के शपथ लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट में 37 न्यायाधीश हो जाएंगे, जबकि स्वीकृत क्षमता 38 है। यानी नियुक्तियों के बाद शीर्ष अदालत में सिर्फ एक पद खाली रहेगा।
इन नियुक्तियों से सुप्रीम कोर्ट को अनुभवी हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीशों का अनुभव मिलेगा। खास तौर पर जस्टिस सुनीता अग्रवाल की नियुक्ति महिला न्यायिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

