CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन के बाद रविवार को हुई विशेष सुनवाई; चार पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत नेताओं की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई 13 अक्टूबर को, 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने पर अधिकारियों से जवाब तलब

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026। दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई की। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने निर्देश दिया कि लोगों की आवाजाही कानून के मुताबिक निर्बाध रहे और किसी व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया के बिना हिरासत में न लिया जाए। अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रूप से चलाने, इंटरनेट सेवाओं में गैरकानूनी बाधा नहीं डालने और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का पालन सुनिश्चित करने को भी कहा।
सुनवाई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों को हिरासत में लिए जाने तथा सार्वजनिक परिवहन पर लगाए गए प्रतिबंधों से जुड़ी याचिकाओं पर हुई। अदालत ने अधिकारियों से अनुपालन रिपोर्ट और हिरासत में लिए गए लोगों का विवरण देने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश
अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू नहीं होने वाले क्षेत्रों में कानून के अनुसार शांतिपूर्ण सभा की अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही, अदालत परिसर तक आने-जाने और न्याय पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य अदालत में व्यक्तिगत रूप से पहुंचने में बाधा नहीं होनी चाहिए।
पीठ ने मेट्रो और रेल सेवाएं सामान्य रखने, यातायात नियमों के तहत लोगों की आवाजाही सुनिश्चित करने और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की समीक्षा करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि कानून के विपरीत इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं की जानी चाहिए।
चार पूर्व मुख्यमंत्रियों की हिरासत को चुनौती
तृणमूल कांग्रेस की सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका दाखिल कर विपक्षी नेताओं की हिरासत को चुनौती दी है। इसमें पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार की हिरासत का मुद्दा उठाया गया है। याचिका में आरोप है कि कई नेताओं को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया।
45 मेट्रो स्टेशन बंद करने पर अधिकारियों से जवाब
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने अलग याचिका में आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वार बंद किए गए, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बाधित नहीं करने का निर्देश दिया था। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि इस मामले में अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। उनसे जवाब और अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई है।
सुनवाई के दौरान अन्य याचिकाओं में भी कथित अवैध हिरासत, पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप उठाए गए। ये आरोप हैं, जिनकी न्यायिक जांच और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
आगे क्या होगा?
हिरासत को चुनौती देने वाली याचिकाओं और संबंधित मामलों पर अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन और अधिकारियों के जवाब से यह स्पष्ट होगा कि प्रदर्शन के दौरान अपनाई गई पुलिस तथा परिवहन संबंधी व्यवस्थाएं कानून और पूर्व न्यायिक आदेशों के अनुरूप थीं या नहीं।

