Delhi CJP Protest: ‘लड़ाई लंबी चलने वाली है’, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले CJP की बड़ी मांगें

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ आपराधिक कार्रवाई, SIR फ्रीज करने, जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट बहाल करने और चुनावी व्यवस्था में सुधार की मांग; दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया


नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की तैयारी तेज कर दी है। CJP के सह-संयोजक और प्रवक्ता सौरव दास ने कहा है कि आंदोलन को केवल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उनका कहना है कि चुनावी व्यवस्था और मतदाता सूची से जुड़े सुधारों की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

हालांकि, 8 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियों का हवाला दिया है। CJP की ओर से कहा गया है कि अगर प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोका गया, तो वे जहां रोके जाएंगे, वहीं प्रदर्शन करेंगे।

इस्तीफा हुआ तो भी आंदोलन खत्म नहीं होगा

सौरव दास ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा देने की स्थिति में भी CJP आंदोलन वापस नहीं लेगी। उनके मुताबिक संगठन की मांग केवल एक व्यक्ति को पद से हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में व्यापक बदलाव की है। उन्होंने नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को भी लोकतांत्रिक और पारदर्शी बनाने की मांग की है।

दास ने प्रदर्शनकारियों और समर्थकों से देशभर से दिल्ली पहुंचने की अपील करते हुए कहा कि यह आंदोलन लंबा चल सकता है। उन्होंने लोगों से ट्रेन, फ्लाइट या दूसरे साधनों से दिल्ली पहुंचने और लंबे समय तक आंदोलन के लिए तैयार रहने को कहा है।

CJP की प्रमुख मांगें क्या हैं?

CJP ने अपने आंदोलन के लिए कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। संगठन ने उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू किए जाने की भी मांग की है। यह मांग संगठन की ओर से लगाए गए चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोपों के संदर्भ में रखी गई है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि को अलग से देखा जाना जरूरी है।

इसके अलावा CJP ने Special Intensive Revision यानी SIR को फ्रीज करने, आगामी चुनावों को रोकने, जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने और मतदाता सूची से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग रखी है। संगठन ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को वापस लेने और एक स्वतंत्र तथा विश्वसनीय चयन प्रक्रिया बनाने की मांग भी की है।

छात्र संगठनों का भी समर्थन

10 अक्टूबर के प्रदर्शन में CJP के साथ कई छात्र संगठनों के शामिल होने की बात सामने आई है। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के प्रतिनिधि मौजूद रहे। आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन ASAP की भागीदारी का भी उल्लेख किया गया है।

CJP ने इस आंदोलन को चुनावी व्यवस्था और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर व्यापक विरोध के रूप में पेश किया है। संगठन का कहना है कि प्रदर्शन में युवाओं और छात्र संगठनों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।

दिल्ली पुलिस को दी थी प्रदर्शन की सूचना

CJP के सह-संयोजक सौरव दास 7 अक्टूबर को संसद मार्ग पुलिस थाने पहुंचे और 10 अक्टूबर के प्रदर्शन की औपचारिक सूचना पुलिस को दी। संगठन ने कहा था कि आयोजक कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करेंगे। दास ने प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगने के बजाय पुलिस को सूचना देने की बात कही थी।

लेकिन इसके बाद दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। पुलिस के मुताबिक नई दिल्ली इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू हैं और बड़ी भीड़ के जुटने से सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा बढ़ाई गई

10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की तैयारी की है। रिपोर्टों के मुताबिक दिल्ली की सीमाओं, प्रमुख रेलवे स्टेशनों और मेट्रो टर्मिनलों पर निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है। बाहरी राज्यों से आने वाली संभावित भीड़ को देखते हुए उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सीमाओं पर भी निगरानी की तैयारी है।

दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली क्षेत्र में लागू प्रतिबंधों का हवाला देते हुए कहा है कि बिना अनुमति बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी। दूसरी ओर, CJP ने संकेत दिया है कि जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोके जाने की स्थिति में वह वैकल्पिक स्थान पर प्रदर्शन कर सकती है।

पिछली गतिविधियों का भी दिया हवाला

CJP नेताओं ने अपने पिछले आंदोलनों का हवाला देते हुए कहा है कि संगठन पहले भी लंबे समय तक सड़क पर आंदोलन कर चुका है। सौरव दास ने 10 अक्टूबर के आंदोलन को भी लंबा चलने वाला बताते हुए समर्थकों से उसी तरह की तैयारी के साथ दिल्ली आने की अपील की है। CJP का दावा है कि उसके पिछले आंदोलनों में पुलिस कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों को चोटें भी आई थीं; इन दावों को संगठन के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

फिलहाल 10 अक्टूबर का प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि एक ओर CJP और छात्र संगठन इसे व्यापक चुनावी सुधारों से जोड़ रहे हैं, जबकि दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। अब प्रदर्शन के दिन आयोजकों और प्रशासन के बीच स्थिति किस तरह आगे बढ़ती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

Nagendra sahu
Nagendra sahu
नागेन्द्र साहू छत्तीसगढ़ के भिलाई से हैं। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक (BJMC) और वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (MJ) की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वीडियो एडिटिंग ( Ex- भिलाई Times Sr Editor ) और डिजिटल कंटेंट में भी विशेषज्ञता के साथ वर्तमान में रेखांकित न्यूज़ का संचालन कर रहे हैं।
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