
रायपुर | 10 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ में जमीन के इस्तेमाल से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य के आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 38 में संशोधन किया है। संशोधित प्रावधान 7 अक्टूबर 2026 को राजपत्र में प्रकाशित हुए। नई व्यवस्था में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक, परिवहन, मनोरंजन और कृषि—इन सात भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची तय की गई है।
इस बदलाव की मुख्य बात यह है कि अब भूमि उपयोग की संबंधित श्रेणी में उन गतिविधियों को सामान्य रूप से अनुमत माना जाएगा, जिन्हें उस श्रेणी की प्रतिबंधित सूची में शामिल नहीं किया गया है। इसे ‘नेगेटिव लिस्ट’ मॉडल कहा जा रहा है। हालांकि, प्रतिबंधित सूची में किसी गतिविधि का नाम नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि जमीन मालिक बिना किसी अन्य मंजूरी के निर्माण या कारोबार शुरू कर सकता है। भूमि उपयोग योजना, भवन निर्माण नियम, पर्यावरणीय शर्तें और संबंधित विभागों की अनुमतियां लागू रहेंगी।
नए नियमों में क्या बदला?
पहले भूमि उपयोग के संबंध में किसी गतिविधि की स्वीकार्यता समझने के लिए लागू श्रेणी, निर्धारित उपयोग और संबंधित नियमों को देखना पड़ता था। संशोधित व्यवस्था में प्रत्येक भूमि उपयोग श्रेणी के लिए उन गतिविधियों की सूची निर्धारित की गई है, जिन्हें वहां प्रतिबंधित रखा गया है। सूची से बाहर की गतिविधियों को भूमि उपयोग के इस ढांचे के तहत सामान्य अनुमति के दायरे में माना जा सकता है, बशर्ते अन्य लागू नियम इसकी अनुमति देते हों।
सरकार की इस पहल को भूमि उपयोग से जुड़े नियमन को स्पष्ट और व्यावहारिक बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इससे जमीन मालिकों, कारोबारियों और विकास परियोजनाओं की योजना बनाने वालों को शुरुआती स्तर पर यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी खास श्रेणी की जमीन पर कौन-सी गतिविधियां प्रतिबंधित हैं। हालांकि, नियमों के वास्तविक लाभ का आकलन इनके जमीनी क्रियान्वयन और मंजूरी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकेगा।
आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने इस सुधार को राज्य की विकास संबंधी जरूरतों से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया है। सरकार का तर्क है कि स्पष्ट नियमों और अनुपालन का बोझ कम होने से निवेश, रोजगार और स्थानीय विकास की गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सकता है।
सात भूमि उपयोग श्रेणियां: कहां क्या प्रतिबंधित रहेगा?
संशोधित नियम 38 के तहत सात प्रमुख श्रेणियों के लिए प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची दी गई है। नीचे प्रमुख प्रावधानों का सरल विवरण है। यह सूची आपके उपलब्ध विवरण के आधार पर प्रमुख प्रतिबंधों का सार है; किसी विशिष्ट प्लॉट या परियोजना पर अंतिम निर्णय के लिए संबंधित राजपत्र अधिसूचना और लागू विकास योजना देखना जरूरी होगा।
1. आवासीय क्षेत्र: उद्योग, खनन और कई भारी गतिविधियों पर रोक
आवासीय क्षेत्र का उद्देश्य मुख्य रूप से लोगों के रहने के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण बनाए रखना है। इसलिए इस श्रेणी में ऐसी गतिविधियों को प्रतिबंधित किया गया है, जो आवासीय क्षेत्र की प्रकृति, सुरक्षा या पर्यावरण के लिए अनुपयुक्त हो सकती हैं।
प्रमुख प्रतिबंधों में शामिल हैं:
- हरे, नारंगी, लाल और नीले वर्ग के उद्योग।
- गोदाम, बूचड़खाने और कबाड़खाने।
- संक्रामक रोगों के अस्पताल और जेल।
- बड़े परिवहन टर्मिनल और थोक व्यापार।
- तेल डिपो, पेट्रोलियम तथा ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण और गैस गोदाम।
- पशुपालन, मछली पालन, दुग्ध उत्पादन और मुर्गी पालन।
- दाह संस्कार और कब्रिस्तान से जुड़ी गतिविधियां।
- खनन गतिविधियां।
इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि आवासीय श्रेणी की जमीन पर किसी उद्योग, गोदाम या अन्य व्यावसायिक गतिविधि की योजना बनाने से पहले यह जांचना होगा कि संबंधित गतिविधि प्रतिबंधित सूची में आती है या नहीं। केवल जमीन का मालिक होना ऐसी गतिविधि की अनुमति नहीं देता।
2. वाणिज्यिक क्षेत्र: कारोबार की अनुमति के साथ कुछ गतिविधियों पर रोक
वाणिज्यिक भूमि उपयोग का संबंध दुकानों, व्यापार और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से होता है। लेकिन इस श्रेणी में भी हर तरह का उद्योग या कारोबार स्वतः अनुमत नहीं होगा।
प्रमुख प्रतिबंधों में शामिल हैं:
- नारंगी, लाल और नीले वर्ग के उद्योग।
- खतरनाक या जहरीले रसायनों का भंडारण।
- विस्फोटकों का भंडारण।
- पशुपालन, मछली पालन, दुग्ध उत्पादन और मुर्गी पालन।
- दाह संस्कार और कब्रिस्तान से जुड़ी गतिविधियां।
- खनन गतिविधियां।
इसलिए किसी व्यावसायिक प्लॉट पर दुकान, कार्यालय, गोदाम या अन्य कारोबार शुरू करने से पहले संबंधित भूमि उपयोग श्रेणी और प्रतिबंधों की जांच जरूरी होगी। विशेष रूप से खतरनाक पदार्थों के भंडारण और औद्योगिक गतिविधियों के लिए अलग-अलग नियामकीय शर्तें भी लागू हो सकती हैं।
3. औद्योगिक क्षेत्र: हर तरह की गतिविधि को स्वतः मंजूरी नहीं
औद्योगिक भूमि उपयोग का उद्देश्य उद्योगों और उनसे जुड़ी गतिविधियों के लिए स्थान उपलब्ध कराना है। लेकिन औद्योगिक श्रेणी में भी ऐसे उपयोगों पर प्रतिबंध हो सकता है, जो उद्योग के संचालन, सुरक्षा, पर्यावरण या क्षेत्र की नियोजित प्रकृति से मेल नहीं खाते।
प्रमुख प्रतिबंधों में शामिल हैं:
- पूरी तरह आवासीय टाउनशिप। हालांकि, नियमों में निर्धारित अपवादों के तहत कर्मचारी आवास, छात्रावास और डॉरमेट्री की अनुमति हो सकती है।
- स्कूल और संक्रामक रोगों के अस्पताल।
- जेल और बड़े परिवहन टर्मिनल।
- थोक व्यापार और तेल डिपो।
- पेट्रोलियम तथा ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण और गैस गोदाम।
- पशुपालन, डेयरी और मुर्गी पालन।
- उद्योग से असंबंधित वाणिज्यिक मनोरंजन गतिविधियां।
- पर्यावरण के प्रति संवेदनशील उपयोग।
- दाह संस्कार और कब्रिस्तान से जुड़ी गतिविधियां।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि औद्योगिक जमीन पर किसी गतिविधि की स्वीकार्यता केवल इस आधार पर तय नहीं होगी कि वह कारोबार या उद्योग से जुड़ी है। संबंधित उपयोग की प्रकृति, निर्धारित अपवाद और अन्य कानूनी शर्तें भी देखनी होंगी।
4. सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक क्षेत्र: संस्थागत उपयोग पर जोर
सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक श्रेणी में आम तौर पर सार्वजनिक सेवाओं, संस्थानों और संबंधित सुविधाओं के लिए भूमि उपयोग की योजना बनाई जाती है। इस श्रेणी में ऐसी गतिविधियों को प्रतिबंधित किया गया है, जो इस उद्देश्य से असंगत हो सकती हैं।
प्रमुख प्रतिबंधों में शामिल हैं:
- पूरी तरह आवासीय टाउनशिप, हालांकि निर्धारित शर्तों के तहत कर्मचारी आवास को अपवाद मिल सकता है।
- भारी वाणिज्यिक गतिविधियां।
- हरे, नारंगी और लाल वर्ग के उद्योग।
- खतरनाक पदार्थों का भंडारण।
- असंबंधित वाणिज्यिक दोहन और थोक बाजार।
- थोक व्यापार, बूचड़खाने और कबाड़खाने।
- खनन गतिविधियां।
- तेल डिपो, पेट्रोलियम तथा ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण और गैस गोदाम।
- पशुपालन, मुर्गी पालन और गोदाम।
इस श्रेणी की जमीन पर कोई निजी व्यावसायिक या अन्य परियोजना प्रस्तावित करने से पहले यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि वह संबंधित भूमि उपयोग और योजना के अनुरूप है या नहीं।
5. परिवहन क्षेत्र: मुख्य उपयोग से असंगत गतिविधियों पर रोक
परिवहन श्रेणी का उद्देश्य सड़क, परिवहन सुविधाओं और उनसे जुड़ी आवश्यकताओं के लिए भूमि उपयोग को व्यवस्थित करना है। इस क्षेत्र में ऐसी गतिविधियां प्रतिबंधित हो सकती हैं, जो परिवहन व्यवस्था, सुरक्षा या नियोजित उपयोग में बाधा पैदा करें।
प्रमुख प्रतिबंधों में शामिल हैं:
- आवासीय बस्तियां।
- खतरनाक रसायनों का भंडारण।
- भूमि उपयोग से असंगत वाणिज्यिक गतिविधियां।
- नारंगी, लाल और नीले वर्ग के उद्योग।
- खनन गतिविधियां।
- पशुपालन, मछली पालन, दुग्ध उत्पादन और मुर्गी पालन।
- दाह संस्कार और कब्रिस्तान से जुड़ी गतिविधियां।
इसका मतलब है कि परिवहन श्रेणी की जमीन पर आवासीय या असंबंधित व्यावसायिक निर्माण की योजना बनाते समय संबंधित नियमों की जांच आवश्यक होगी। किसी उपयोग को अनुमत मानने से पहले यह देखना होगा कि वह भूमि की निर्धारित श्रेणी से मेल खाता है या नहीं।
6. मनोरंजन क्षेत्र: उद्योग और असंगत व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक
मनोरंजन या आमोद-प्रमोद श्रेणी में पार्क, मनोरंजन स्थलों और इस उद्देश्य से जुड़ी सुविधाओं के लिए भूमि उपयोग की योजना बनाई जा सकती है। इस श्रेणी में ऐसे उपयोगों को प्रतिबंधित किया गया है, जो मनोरंजन के उद्देश्य से असंगत हों या पर्यावरण और सुरक्षा संबंधी जोखिम पैदा कर सकते हों।
प्रमुख प्रतिबंधों में शामिल हैं:
- आवासीय कॉलोनियां।
- सभी प्रकार के उद्योग।
- वाणिज्यिक परिसर और गोदाम।
- प्रदूषणकारी वाणिज्यिक गतिविधियां।
- खनन गतिविधियां।
- खतरनाक पदार्थों का भंडारण।
- असंबंधित वाणिज्यिक दोहन और थोक बाजार।
- तेल डिपो, पेट्रोलियम तथा ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण और गैस गोदाम।
- पशुपालन, मुर्गी पालन और दुग्ध उत्पादन।
इस श्रेणी में किसी निर्माण या व्यावसायिक गतिविधि की योजना बनाते समय यह जांचना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तावित उपयोग मनोरंजन क्षेत्र के उद्देश्य के अनुरूप है या नहीं।
7. कृषि क्षेत्र: बड़े व्यावसायिक और कुछ आवासीय उपयोगों पर प्रतिबंध
कृषि भूमि के उपयोग से जुड़े प्रावधान जमीन के कृषि उद्देश्य और नियोजित विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। संशोधित सूची में कुछ बड़े आवासीय और व्यावसायिक उपयोगों पर प्रतिबंध निर्धारित किए गए हैं।
प्रमुख प्रतिबंधों में शामिल हैं:
- आवासीय लेआउट, हालांकि किफायती आवास और एकीकृत टाउनशिप के लिए निर्धारित अपवाद दिए गए हैं।
- वाणिज्यिक परिसर और बड़ी वाणिज्यिक परियोजनाएं।
- खतरनाक वाणिज्यिक उपयोग।
- नारंगी और लाल वर्ग के उद्योग।
- उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं।
- बड़े मॉल।
इसका अर्थ यह नहीं है कि कृषि भूमि पर हर प्रकार का निर्माण या उपयोग हमेशा प्रतिबंधित होगा। किसी प्रस्ताव की स्वीकार्यता संबंधित अपवादों, भूमि उपयोग योजना और अन्य लागू नियमों पर निर्भर करेगी। कृषि भूमि पर कॉलोनी, बड़ा व्यावसायिक परिसर या अन्य परियोजना विकसित करने की योजना बनाने वालों को निवेश से पहले संबंधित विभाग से नियमों की पुष्टि करनी चाहिए।
जमीन मालिकों और आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
नए नियमों का असर जमीन मालिकों, बिल्डरों, कारोबारियों, उद्योग संचालकों और विकास परियोजनाओं की योजना बनाने वालों पर पड़ सकता है। प्रतिबंधित गतिविधियों की श्रेणीवार सूची उपलब्ध होने से किसी जमीन के प्रस्तावित उपयोग की शुरुआती जांच करना आसान हो सकता है।
इसके संभावित असर को चार बिंदुओं में समझा जा सकता है:
1. जमीन खरीदने से पहले उपयोग की जांच: केवल जमीन की कीमत, स्थान या रजिस्ट्री देखकर फैसला करना पर्याप्त नहीं होगा। खरीदार को यह भी देखना चाहिए कि जमीन किस भूमि उपयोग श्रेणी में आती है और प्रस्तावित गतिविधि उस श्रेणी में प्रतिबंधित तो नहीं है।
2. कारोबार या निर्माण की योजना: किसी प्लॉट पर दुकान, गोदाम, वर्कशॉप, उद्योग या अन्य व्यावसायिक गतिविधि शुरू करने से पहले संबंधित विकास योजना, भूमि उपयोग और भवन निर्माण नियमों की जांच जरूरी होगी।
3. डेवलपर्स और निवेशकों के लिए स्पष्टता: प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची से परियोजना की शुरुआती व्यवहार्यता जांचने में मदद मिल सकती है। लेकिन इससे हर परियोजना को मंजूरी मिलने या अनुमति की समयसीमा कम होने की गारंटी नहीं मिलती।
4. कृषि भूमि पर विशेष सावधानी: कृषि श्रेणी की जमीन पर आवासीय लेआउट, बड़े मॉल या वाणिज्यिक परियोजना की योजना बनाने वालों को संबंधित प्रतिबंधों और निर्धारित अपवादों को समझना होगा। जमीन की मौजूदा श्रेणी और प्रस्तावित उपयोग में अंतर होने पर अतिरिक्त प्रक्रिया या मंजूरी की जरूरत पड़ सकती है।
क्या प्रतिबंधित सूची से बाहर की हर गतिविधि की अनुमति मिल जाएगी?
यह नए नियमों को समझने का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। किसी गतिविधि का प्रतिबंधित सूची में उल्लेख नहीं होना, अपने-आप में निर्माण या कारोबार की अंतिम मंजूरी नहीं है।
भूमि उपयोग के नियमों के अलावा संबंधित विकास योजना, भवन निर्माण उपविधियां, पर्यावरण संबंधी कानून, अग्नि सुरक्षा, स्थानीय निकाय की अनुमति और गतिविधि के अनुसार अन्य कानूनी शर्तें लागू हो सकती हैं। किसी परियोजना के लिए अलग लाइसेंस या विभागीय अनुमति जरूरी है, तो वह आवश्यकता भी बनी रह सकती है।
उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति ऐसी जमीन पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान खोलना चाहता है जहां उस गतिविधि का नाम प्रतिबंधित सूची में नहीं है, तो भी उसे संबंधित भूमि उपयोग योजना और निर्माण नियमों की जांच करनी होगी। इसी तरह, किसी उद्योग के लिए जमीन उपयुक्त दिखने के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण और अन्य नियामकीय अनुमतियां अलग से जरूरी हो सकती हैं।
इसलिए नियमों में बदलाव को सभी तरह के निर्माण और कारोबार के लिए खुली छूट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों में आवासीय विस्तार, व्यापार, उद्योग, परिवहन और संस्थागत सुविधाओं की जरूरतें समय के साथ बदल रही हैं। पुराने नियमों में नई तरह की गतिविधियों को लेकर स्पष्टता की आवश्यकता महसूस हो सकती है। ऐसे में प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची पर आधारित व्यवस्था भूमि उपयोग के नियमन को अधिक स्पष्ट बनाने का प्रयास है।
नई व्यवस्था से जमीन मालिकों और परियोजना तैयार करने वालों को यह समझने में सुविधा मिल सकती है कि किसी श्रेणी में कौन-से उपयोग प्रतिबंधित हैं। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित विभाग नियमों को किस तरह लागू करते हैं, जमीन की श्रेणी की जानकारी कितनी सुलभ होती है और आवश्यक मंजूरियों की प्रक्रिया कितनी स्पष्ट रहती है।
जमीन खरीदने या निर्माण शुरू करने से पहले क्या करें?
नए नियमों के बाद भी जमीन से जुड़ा कोई बड़ा आर्थिक फैसला लेने से पहले कुछ जरूरी जांच करना उचित होगा।
- संबंधित प्लॉट की भूमि उपयोग श्रेणी और लागू विकास योजना की पुष्टि करें।
- संशोधित नियम 38 में उस श्रेणी के लिए प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची देखें।
- प्रस्तावित निर्माण या कारोबार के लिए भवन अनुमति और अन्य विभागीय मंजूरियों की जरूरत पता करें।
- कृषि भूमि या बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट के मामले में लागू अपवादों और विशेष शर्तों की पुष्टि करें।
- केवल मौखिक जानकारी या दलाल के दावे के आधार पर निवेश न करें; संबंधित विभाग से लागू प्रावधानों की पुष्टि करें।
छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 के नियम 38 में संशोधन से राज्य में भूमि उपयोग के नियमन का तरीका बदला है। सात श्रेणियों के लिए प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची तय होने और सूची से बाहर के उपयोगों को सामान्य रूप से अनुमत मानने की व्यवस्था से भूमि उपयोग संबंधी शुरुआती स्पष्टता बढ़ सकती है। लेकिन यह बदलाव जमीन पर हर प्रकार के निर्माण या कारोबार की स्वतः अनुमति नहीं देता। किसी भी परियोजना के लिए अंतिम निर्णय संबंधित भूमि उपयोग, विकास योजना और अन्य लागू कानूनी मंजूरियों के आधार पर ही लिया जाना चाहिए।

