
बिलासपुर | रेखांकित न्यूज़
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की परीक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में शामिल एक अभ्यर्थी की उत्तरपुस्तिका से चार पन्ने गायब मिले। इन पन्नों पर 30 अंकों के प्रश्नों के उत्तर लिखे जाने थे। मामले की सुनवाई करते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट ने आयोग की कार्यप्रणाली और जांच में देरी पर नाराजगी जताई। अदालत ने आयोग पर ₹50 हजार का जुर्माना लगाया और अभ्यर्थी को ₹50 हजार मुआवजा देने का निर्देश दिया।
RTI से खुली उत्तरपुस्तिका की गड़बड़ी
यह मामला अभ्यर्थी नारायण दत्त तिवारी से जुड़ा है, जिन्होंने वर्ष 2018 के विज्ञापन के आधार पर राज्य सेवा परीक्षा के लिए आवेदन किया था। प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने मुख्य परीक्षा दी, लेकिन चयनित अभ्यर्थियों में उनका नाम नहीं आया।
इसके बाद उन्होंने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत अपनी उत्तरपुस्तिका की प्रति मांगी। उपलब्ध कराई गई कॉपी की जांच करने पर पता चला कि सामान्य अध्ययन-पांच के प्रश्नपत्र में पृष्ठ क्रमांक 17 से 20 तक गायब थे। इन चार पन्नों पर प्रश्न क्रमांक 9 से 12 तक के उत्तर लिखे जाने थे, जिनके कुल अंक 30 थे।
मूल्यांकन के दौरान ही सामने आ गई थी गड़बड़ी
मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि उत्तरपुस्तिका के पन्ने गायब होने की जानकारी मूल्यांकन के समय ही आयोग को मिल गई थी। इसके बावजूद अभ्यर्थी को समय पर इसकी सूचना नहीं दी गई और जिम्मेदार व्यक्ति का पता लगाने के लिए जांच भी प्रभावी ढंग से पूरी नहीं हुई।
हाईकोर्ट ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई। अदालत के सामने यह भी आया कि उत्तरपुस्तिका में पन्ने निकाले जाने के निशान मौजूद थे। आयोग की ओर से समय पर जानकारी नहीं देने और जांच पूरी नहीं होने को मामले में गंभीर लापरवाही के रूप में देखा गया।
आयोग ने क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से बताया गया कि अनारक्षित वर्ग के अंतिम चयनित अभ्यर्थी के 737.5 अंक थे, जबकि नारायण दत्त तिवारी को 695.5 अंक मिले थे। आयोग की दलील थी कि गायब पन्नों के पूरे 30 अंक भी जोड़ दिए जाएं, तब भी उनके अंक अंतिम चयनित अभ्यर्थी से कम रहते।
आयोग ने यह भी कहा कि उत्तरपुस्तिका देखने के बाद अभ्यर्थी ने संतुष्टि प्रमाणपत्र दिया था। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि पन्ने गायब होने और समय पर उचित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें मानसिक परेशानी हुई तथा न्याय पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।
जस्टिस पी.पी. साहू की एकलपीठ का आदेश
मामले की सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की एकलपीठ ने की। अदालत ने उत्तरपुस्तिका में गंभीर गड़बड़ी सामने आने के बाद भी प्रभावी जांच नहीं होने और अभ्यर्थी को समय पर जानकारी नहीं दिए जाने पर सवाल उठाए।
रिपोर्टों के मुताबिक, हाईकोर्ट ने आयोग पर 50 हजार का जुर्माना लगाया और संबंधित अभ्यर्थी को 50 हजार मुआवजा देने का निर्देश दिया। मुआवजे की राशि तीन महीने के भीतर देने को कहा गया है।
परीक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल
यह मामला प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तरपुस्तिकाओं के सुरक्षित रखरखाव, मूल्यांकन प्रक्रिया और शिकायतों की समयबद्ध जांच की जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल उठाता है।
हालांकि, इस मामले में गायब पन्नों पर लिखे उत्तरों के पूरे अंक मिल जाने पर भी अभ्यर्थी अंतिम चयन के निर्धारित अंक तक नहीं पहुंचते—यह दलील आयोग की ओर से दी गई थी। इसलिए अदालत के आदेश को अभ्यर्थी के चयन का निर्देश मानना सही नहीं होगा। मुआवजे का आदेश उत्तरपुस्तिका में गड़बड़ी और उसके बाद की कार्रवाई से जुड़ा है।
सवाल: जब मूल्यांकन के दौरान ही उत्तरपुस्तिका के पन्ने गायब होने की जानकारी सामने आ गई थी, तो अभ्यर्थी को समय पर सूचना क्यों नहीं दी गई? जांच पूरी करने और जिम्मेदारी तय करने में देरी क्यों हुई? प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसी चूक दोबारा न हो, इसके लिए आयोग क्या व्यवस्था करेगा?

