
भोपाल | रेखांकित न्यूज़
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पांच नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म और यौन शोषण के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने 78 वर्षीय प्यारे मियां को 10 अलग-अलग आजीवन कारावास की सजाएं सुनाई हैं। अदालत ने उस पर कुल ₹77.64 लाख का जुर्माना भी लगाया है। मामले में उसकी सहयोगी राबिया बी को 20 साल के कारावास की सजा सुनाई गई है। फैसला मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को सुनाया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, प्यारे मियां को पॉक्सो अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया। सुनाई गई 10 सजाओं में आठ शेष प्राकृतिक जीवन तक जेल में रहने की सजाएं और दो आजीवन कारावास की सजाएं शामिल हैं। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, यानी इन्हें जोड़कर लगातार अलग-अलग अवधि के रूप में नहीं भुगतना होगा।
नौकरी दिलाने का लालच देकर बच्चियों को निशाना बनाने का आरोप
अभियोजन के मुताबिक, प्यारे मियां वर्ष 2014 से नाबालिग बच्चियों को निशाना बना रहा था। वह उन्हें अपने यहां नौकरी दिलाने और हर महीने ₹10,000 वेतन देने का भरोसा देता था। आरोपों के अनुसार, इसी बहाने बच्चियों को बुलाकर उनका यौन शोषण किया जाता था।
मामले में राबिया बी पर प्यारे मियां की मदद करने और बच्चियों को इस प्रक्रिया में फंसाने में सहयोग करने का आरोप था। अदालत ने सुनवाई के बाद उसे भी दोषी ठहराते हुए 20 साल के कारावास की सजा सुनाई।
जुलाई 2020 में सामने आया था मामला
यह मामला 11 जुलाई 2020 को सामने आया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, भोपाल के शाहपुरा इलाके में जन्मदिन मनाने के बहाने एक बच्ची को फ्लैट पर बुलाया गया था। वहां उसके साथ यौन अपराध किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद अन्य नाबालिग बच्चियों ने भी इसी तरह की घटनाओं के बारे में बताया।
पुलिस ने मामले की जांच की और प्यारे मियां सहित अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। जांच के बाद प्यारे मियां और राबिया बी के खिलाफ मुकदमा चला। अभियोजन पक्ष ने अदालत में साक्ष्य पेश किए, जिनके आधार पर दोनों को दोषी ठहराया गया।
अदालत ने सुनाई कड़ी सजा
विशेष पॉक्सो अदालत ने प्यारे मियां को अलग-अलग धाराओं में 10 आजीवन कारावास की सजाएं सुनाईं और ₹77.64 लाख का जुर्माना लगाया। अभियोजन पक्ष के विशेष लोक अभियोजक पी.एन. सिंह राजपूत के अनुसार, आरोप साबित होने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया।
राबिया बी को 20 साल की सजा सुनाई गई है। फैसले में निर्धारित सजाओं और जुर्माने का विवरण मामले की कानूनी गंभीरता को दर्शाता है।
नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर न्यायिक कार्रवाई
यह मामला बच्चों की सुरक्षा, यौन अपराधों की जांच और पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया की अहमियत सामने लाता है। पॉक्सो अधिनियम के तहत नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों की सुनवाई विशेष अदालतों में की जाती है।
भोपाल की विशेष अदालत का यह फैसला मामले की न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव है। सजा के साथ लगाया गया जुर्माना भी अदालत के आदेश का हिस्सा है।

