
बालोद | छत्तीसगढ़ | अपराध एवं न्यायालय
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में ससुर की करंट लगाकर हत्या करने के मामले में अदालत ने मृतक की बहू और उसके प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र के ग्राम खड़ेनाडीह में हुई इस वारदात को आरोपियों ने कथित तौर पर हादसा बताकर छिपाने की कोशिश की थी। लेकिन अंतिम संस्कार की तैयारी के दौरान मृतक के शरीर पर चोट और जलने के निशान देखकर ग्रामीणों को संदेह हुआ। पुलिस जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले का खुलासा हुआ।

हारमोनियम सिखाने के बहाने घर आता था प्रेमी
मामले के अनुसार, मृतक मनोहर निर्मलकर की बहू गीताबाई निर्मलकर (30) गांव की सेवा मंडली में भजन गाने जाती थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात पड़ोसी गांव के संगीतकार लेखराम निषाद (25) से हुई। लेखराम उसे हारमोनियम सिखाता था और इसी बहाने अक्सर उसके घर आता था।
पुलिस और अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। मनोहर निर्मलकर को लेखराम का घर आना पसंद नहीं था और वह इसका विरोध करते थे। जांच में सामने आया कि इसी विरोध के चलते दोनों ने मिलकर मनोहर की हत्या की साजिश रची।

सोते समय करंट लगाकर हत्या का आरोप
अभियोजन के मुताबिक, 16 जुलाई 2025 की रात मनोहर निर्मलकर सो रहे थे। इसी दौरान उन्हें बिजली का करंट लगाकर उनकी हत्या कर दी गई। इसके बाद मौत को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई।
आरोपियों ने कथित तौर पर ग्रामीणों और परिजनों को बताया कि मनोहर शराब के नशे में साइकिल से गिर गए थे, जिससे उन्हें चोट लगी और उनकी मौत हो गई। शरीर पर दिख रहे निशानों को छिपाने के लिए चेहरे और घावों पर हल्दी, गुलाल और तेल लगाने की बात भी जांच में सामने आई।

अंतिम संस्कार की तैयारी में खुला हत्या का राज
17 जुलाई की सुबह परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे। बहू ने ग्रामीणों को बताया कि मनोहर की मौत साइकिल से गिरने के कारण हुई है। लेकिन जब महिलाएं शव को अंतिम संस्कार के लिए लेकर पहुंचीं और शरीर पर हल्दी लगे हिस्सों के साथ गहरे घाव दिखाई दिए, तो संदेह बढ़ गया।
ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट में मौत का कारण बिजली का करंट लगना सामने आया। इसके बाद पुलिस ने घटना को हत्या मानकर जांच आगे बढ़ाई।

बिजली के तार, दस्ताने और मोबाइल फोन बने अहम सबूत
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और कॉल डिटेल रिकॉर्ड सहित तकनीकी साक्ष्य जुटाए। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने घटना से जुड़े बिजली के तार, रबर के दस्ताने, खून लगा गमछा और मोबाइल फोन भी जब्त किए।
इन साक्ष्यों, वैज्ञानिक जांच और गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। दोनों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया गया। मामले की विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक मुकेश सिंह ने की थी। राज्य शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक घनश्याम सिंह साहू ने अदालत में पैरवी की।
करीब 15 महीने बाद अदालत का फैसला
मामले की सुनवाई के बाद बालोद के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (ADJ Court) ने गीताबाई निर्मलकर और लेखराम निषाद को हत्या का दोषी ठहराते हुए दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले के साथ जुलाई 2025 में सामने आए मामले में न्यायिक प्रक्रिया का अहम पड़ाव पूरा हुआ।

