
रायपुर | रेखांकित न्यूज़
छत्तीसगढ़ में सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी के मामलों को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के आंकड़े सामने आए हैं। वर्ष 2021 से मई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, रिश्वत लेते पकड़ने के लिए की गई 154 ट्रैप कार्रवाइयों में 193 शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। विभागवार आंकड़ों में राजस्व विभाग सबसे आगे है, जबकि स्कूल शिक्षा विभाग दूसरे और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तीसरे स्थान पर है।
राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा 56 मामले
रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्व विभाग में रिश्वतखोरी के 56 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में 67 लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें 34 पटवारी और 12 लिपिक शामिल बताए गए हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग में 20 मामले दर्ज हुए, जिनमें 25 लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें तीन प्राचार्य और 10 लिपिक शामिल हैं।
वहीं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में 14 मामले दर्ज हुए और 15 लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें तीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और तीन अनुविभागीय अधिकारी शामिल बताए गए हैं।
सूरजपुर में सबसे ज्यादा गिरफ्तारी
जिलावार आंकड़ों में सूरजपुर सबसे आगे बताया गया है। यहां रिश्वतखोरी के मामलों में 16 अधिकारी-कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। रायपुर में 15 और रायगढ़ में 12 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
ये आंकड़े उन मामलों से जुड़े हैं जिनमें ACB ने रिश्वत लेते पकड़ने के लिए कार्रवाई की। गिरफ्तारी अपने आप में दोषसिद्धि नहीं होती; संबंधित मामलों का अंतिम परिणाम न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है।
जमीन के काम से लेकर बिजली कनेक्शन तक रिश्वत की शिकायतें
रिपोर्ट में आम नागरिकों के रोजमर्रा के सरकारी कामों से जुड़े कई तरह के मामलों का उल्लेख है। इनमें जमीन का नामांतरण, सीमांकन, भूमि रिकॉर्ड में सुधार, निर्माण कार्यों के भुगतान, बिजली कनेक्शन जारी करने और शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत भुगतान संबंधी काम शामिल हैं।
ऐसे मामलों में आरोप है कि संबंधित काम आगे बढ़ाने या भुगतान जारी करने के बदले रिश्वत मांगी गई। इन शिकायतों पर ACB ने कार्रवाई की।
आम लोगों से जुड़े विभागों में ज्यादा मामले
राजस्व, शिक्षा और पंचायत जैसे विभागों में नागरिकों को जमीन के रिकॉर्ड, प्रमाणपत्र, निर्माण भुगतान और अन्य सरकारी सेवाओं के लिए सीधे अधिकारियों-कर्मचारियों से संपर्क करना पड़ता है। इन विभागों में दर्ज ट्रैप मामलों की संख्या सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने की जरूरत को सामने लाती है।
हालांकि, इन आंकड़ों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी पूरे विभाग का हर कर्मचारी भ्रष्ट है। आंकड़े ACB की कार्रवाई में सामने आए मामलों को दर्शाते हैं, न कि विभाग के सभी कर्मचारियों की स्थिति को।
कार्रवाई के आंकड़े क्या बताते हैं?
पांच साल के आंकड़ों में 154 ट्रैप कार्रवाइयों और 193 गिरफ्तारियों का उल्लेख है। विभागवार संख्या में राजस्व विभाग सबसे आगे है। इससे रिश्वतखोरी की शिकायतों पर कार्रवाई के साथ-साथ सरकारी सेवाओं में शिकायत निवारण, प्रक्रिया की पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने पर ध्यान देने की जरूरत भी सामने आती है।
सवाल: क्या विभागवार रिश्वतखोरी के मामलों में आरोपपत्र और दोषसिद्धि की स्थिति भी सार्वजनिक की जाएगी? कितने मामलों में जांच पूरी हुई और कितने अब भी लंबित हैं? इन सवालों के जवाब से कार्रवाई के आंकड़ों की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।

