कोयला लेवी केस: देवेंद्र यादव से जुड़ी 11 डायरी प्रविष्टियां, 9500 पन्नों के चालान में ‘C PARTY’ और खैरागढ़ उपचुनाव का भी जिक्र, EOW ने बताई नेताओं-अफसरों की कथित भूमिका

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला लेवी मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने रायपुर की विशेष अदालत में 12 आरोपियों के खिलाफ करीब 9,500 पन्नों का पूरक चालान पेश किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस पूरक चालान में कोयला परिवहन से कथित तौर पर ₹25 प्रति टन की अवैध वसूली, रकम के वितरण, राजनीतिक गतिविधियों में कथित इस्तेमाल और जमीन, वाशरी समेत अन्य संपत्तियों में निवेश से जुड़े साक्ष्यों का विवरण शामिल है।

EOW की विवेचना में कोयले के अलावा आयरन पैलेट के परिवहन से ₹100 प्रति टन की कथित वसूली से जुड़े तथ्य सामने आने की बात भी कही गई है। चालान में विधायक, पूर्व विधायक, राजनीतिक पदाधिकारियों और अधिकारियों समेत 12 आरोपियों की कथित भूमिकाओं का अलग-अलग विवरण दिया गया है।

हालांकि, ये सभी आरोप जांच एजेंसी की विवेचना और पूरक चालान में दर्ज दावों पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में होने वाली सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी।

डिजिटल साक्ष्य, डायरी और सरकारी पत्राचार बने जांच का आधार

EOW के अनुसार, इस मामले की जांच में जब्त की गई डायरियों, WhatsApp चैट, बैंक लेन-देन, संपत्ति दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों से मिले साक्ष्यों को आधार बनाया गया है।

पूरक चालान में सरकारी आदेशों से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों के साथ-साथ सीएम हाउस के नाम से विश्राम गृहों में बुकिंग, बालको और RKTC से संबंधित पत्राचार तथा खनिज विभाग से जुड़े दस्तावेजों का भी उल्लेख किया गया है।

जांच एजेंसी का दावा है कि इन दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए कथित अवैध वसूली की व्यवस्था, रकम के संग्रह, उसके वितरण और बाद में विभिन्न माध्यमों से निवेश किए जाने की कड़ियां सामने आईं।

कोयला लेवी मामले में इससे पहले भी EOW की ओर से एक मुख्य चालान और पांच पूरक चालान विशेष न्यायालय में पेश किए जा चुके हैं।

कैसे शुरू हुई 25रू प्रति टन की कथित वसूली?

EOW की विवेचना के मुताबिक, सूर्यकांत तिवारी ने तत्कालीन अधिकारियों और अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कोयला कारोबारियों तथा परिवहनकर्ताओं से 25रु प्रति टन की दर से कथित अवैध वसूली की व्यवस्था बनाई थी।

जांच के अनुसार, 15 जुलाई 2020 के एक आदेश के बाद ऑनलाइन ई-परमिट जारी करने से पहले जिला खनिज अधिकारी का अनुमोदन अनिवार्य किया गया। EOW का आरोप है कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल कोयला परिवहन की अनुमति प्रक्रिया को प्रभावित करने और कथित अवैध रकम की वसूली के लिए किया गया।

विभिन्न जिलों से कथित तौर पर जुटाई गई रकम रायपुर पहुंचाई जाती थी। इसके बाद रकम का हिसाब रखे जाने और अलग-अलग लोगों तक उसे पहुंचाए जाने की बात जांच में सामने आने का दावा किया गया है।

पूर्व में दाखिल चालानों के बाद हुई आगे की जांच में इस रकम को कथित तौर पर राजनीतिक और व्यक्तिगत कार्यों में खर्च करने, नकद रखने तथा जमीन, वाशरी और दूसरी संपत्तियों में निवेश करने से संबंधित दस्तावेज मिलने की बात कही गई है।

15 जुलाई 2020 के आदेश से जुड़े डिजिटल साक्ष्य का दावा

EOW के अनुसार, अनुराग दीवान के जब्त मोबाइल से 15 जुलाई 2020 के आदेश को जारी किए जाने से संबंधित डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।

जांच एजेंसी का कहना है कि इन साक्ष्यों से यह पता चलता है कि राजस्व हानि का ठोस आधार नहीं होने के बावजूद उसका हवाला देते हुए कोयला परिवहन की अनुमति प्रक्रिया में बदलाव किया गया और जिला खनिज अधिकारी का अनुमोदन अनिवार्य बनाया गया।

इसी अवधि में सूर्यकांत तिवारी और उसके सहयोगियों के विभिन्न जिलों में जाकर बैठकें करने की बात भी चालान में कही गई है। जांच के मुताबिक, इन लोगों के ठहरने के लिए संबंधित जिलों के विश्राम गृहों में ‘सीएम हाउस’ के नाम से बुकिंग कराए जाने से संबंधित साक्ष्य भी मिले।

बालको के पत्राचार में ‘Incidental Expenses’ का जिक्र

जांच एजेंसी के मुताबिक, बालको कंपनी का एक ईमेल और उससे संबंधित पत्राचार भी जब्त किया गया है। इसमें परिवहन बिलों में 25रु प्रति टन की राशि को ‘Incidental Expenses’ के रूप में जोड़े जाने का उल्लेख होने का दावा किया गया है।

इसके अलावा 15 जुलाई 2020 के आदेश के बाद कोयला परिवहन के टीपी पास जारी करने के संबंध में अंबुजा कंपनी की ओर से खनिज विभाग को भेजे गए पत्र को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।

EOW ने इन डिजिटल साक्ष्यों और कंपनियों के पत्राचार को कथित वसूली की व्यवस्था से जोड़ते हुए पूरक चालान में शामिल किया है।

कोयले के बाद आयरन पैलेट से भी 100रु प्रति टन की कथित वसूली

पूरक चालान में कोयले के अलावा लौह अयस्क पैलेट के परिवहन से जुड़ी कथित अवैध वसूली का भी उल्लेख है।

EOW के मुताबिक, लौह अयस्क और पैलेट के परिवहन के लिए अभिवहन पास की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव 14 दिसंबर 2021 को संचालनालय से शासन को भेजा गया था। इसके बाद 5 जनवरी 2022 के आदेश से सड़क और रेल मार्ग से परिवहन के लिए यह व्यवस्था लागू की गई।

जांच एजेंसी का आरोप है कि इसी दौरान तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म जयप्रकाश मौर्य ने पैलेट उद्योग से जुड़े लोगों की बैठक लेकर उन्हें 100रु प्रति टन की रकम सूर्यकांत तिवारी अथवा उसके लोगों को देने के निर्देश दिए।

EOW के अनुसार, पैलेट उद्योग से कथित वसूली की प्रविष्टियां जब्त डायरियों में भी मिली हैं। इस पूरी व्यवस्था और उसमें संबंधित अधिकारियों की कथित भूमिका का विवरण पूरक चालान में दिया गया है।

‘भवन’ और ‘C PARTY’ नाम से 104.20रु करोड़ की प्रविष्टियां

पूरक चालान में सबसे बड़ी रकम से संबंधित प्रविष्टियां राम गोपाल अग्रवाल से जुड़ी बताई गई हैं।

EOW के अनुसार, संबंधित अवधि में राम गोपाल अग्रवाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष और छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष थे। जांच एजेंसी का दावा है कि जब्त डायरियों में ‘भवन’ और ‘C PARTY’ के नाम से 32 प्रविष्टियां मिलीं, जिनमें कुल 104.20रु करोड़ दर्ज हैं।

विवेचना के मुताबिक, इन प्रविष्टियों से संबंधित रकम राजीव भवन पहुंचाए जाने और देवेन्द्र डडसेना के माध्यम से राम गोपाल अग्रवाल द्वारा पार्टी के लिए प्राप्त किए जाने के तथ्य मिले हैं।

चालान में परिवार से जुड़ी कंपनियों के नाम पर जमीन खरीद और रजिस्ट्री मूल्य से अतिरिक्त कथित नकद भुगतान से संबंधित विवरण भी शामिल किए जाने की बात कही गई है।

देवेंद्र यादव से जुड़ी 11 डायरी प्रविष्टियों में 3रु करोड़

भिलाई नगर विधायक देवेंद्र सिंह यादव से संबंधित कथित लेन-देन का भी पूरक चालान में उल्लेख किया गया है।

EOW के अनुसार, देवेंद्र सिंह यादव और उनके लिए रकम प्राप्त करने वाले नवाज से जुड़ी 11 डायरी प्रविष्टियों में कुल 3रु करोड़ दर्ज हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि इन प्रविष्टियों में खैरागढ़ उपचुनाव के लिए भेजी गई रकम भी शामिल है।

विवेचना में सूर्यकांत तिवारी की ओर से रकम प्राप्त करने और उसके कथित तौर पर चुनाव संबंधी गतिविधियों तथा व्यक्तिगत इस्तेमाल में आने से संबंधित तथ्य मिलने का दावा किया गया है।

विनोद तिवारी से जुड़ी प्रविष्टियों में 2.12रु करोड़

EOW के अनुसार, विनोद तिवारी के नाम अथवा उनसे जुड़े नामों से जब्त डायरियों में 22 प्रविष्टियां मिलीं, जिनमें कुल 2 करोड़ 12 लाख 11 हजार दर्ज हैं।

जांच एजेंसी का दावा है कि सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसे राजनीतिक गतिविधियों में इस्तेमाल करने से जुड़े तथ्य सामने आए हैं।

चालान में खैरागढ़ उपचुनाव के दौरान होर्डिंग के भुगतान और जिला पंचायत के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के लिए कथित तौर पर रकम की व्यवस्था से संबंधित विवरण भी शामिल है।

‘R P Singh’ और ‘RP’ नाम से 2.93 करोड़ की प्रविष्टियां

रामप्रताप सिंह से संबंधित प्रविष्टियां भी जब्त डायरियों में मिलने का दावा किया गया है।

EOW के अनुसार, ‘R P Singh’ और ‘RP’ नाम से कुल 25 प्रविष्टियों में करीब 2.93 करोड़ दर्ज हैं।

विवेचना में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसके कथित इस्तेमाल को व्यक्तिगत खर्च, राजनीतिक गतिविधियों, मीडिया प्रबंधन तथा वाहन व्यवस्था से जोड़ा गया है।

चंद्रदेव राय से संबंधित 49.50 लाख की प्रविष्टियां

तत्कालीन बिलाईगढ़ विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय से संबंधित चार डायरी प्रविष्टियों का भी चालान में उल्लेख है।

EOW के अनुसार, इन चार प्रविष्टियों में कुल 49.50 लाख दर्ज हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और उसे चुनाव संबंधी खर्च में इस्तेमाल किए जाने के तथ्य मिले हैं।

इसके अलावा सूर्यकांत तिवारी द्वारा उन्हें कथित तौर पर आभूषण उपलब्ध कराए जाने से संबंधित विवरण भी चालान में शामिल किए जाने की बात कही गई है।

जयप्रकाश मौर्य पर 1 करोड़ की प्रविष्टियों और पैलेट वसूली से जुड़ा आरोप

तत्कालीन संचालक, भौमिकी एवं खनिकर्म जयप्रकाश मौर्य से संबंधित दो डायरी प्रविष्टियों में कुल ₹1 करोड़ दर्ज होने का दावा किया गया है।

EOW के अनुसार, जांच में सूर्यकांत तिवारी से नकद रकम प्राप्त करने और खनिज विभाग से जुड़े मामलों में उसके संपर्क में रहने के तथ्य सामने आए हैं।

इसके साथ ही पैलेट उद्योग से 100रु प्रति टन की कथित वसूली के लिए उद्योगपतियों को सूर्यकांत तिवारी या उसके लोगों को रकम देने के निर्देश दिए जाने का आरोप भी पूरक चालान में शामिल है।

पियूष कुमार साहू और संपत्तियों में निवेश

पियूष कुमार साहू की भूमिका को उनकी बहन रानू साहू से संबंधित कथित कोयला लेवी की रकम के निवेश से जोड़ा गया है।

EOW के मुताबिक, परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गई 13 संपत्तियों में बैंक खातों से भुगतान के अलावा रजिस्ट्री मूल्य से अतिरिक्त नकद भुगतान किए जाने के तथ्य मिले हैं।

जांच एजेंसी ने दावा किया है कि रकम के लेन-देन और संपत्तियों की खरीद में पियूष कुमार साहू तथा परिवार के सदस्यों के बैंक खातों का इस्तेमाल हुआ।

जोगेन्दर सिंह: करीब 40 करोड़ के लेन-देन का उल्लेख

जोगेन्दर सिंह को EOW ने सूर्यकांत तिवारी का व्यावसायिक भागीदार बताया है।

जांच एजेंसी के अनुसार, जय अम्बे रोड लाइन्स के माध्यम से कथित नकद रकम की व्यवस्था करने और अपनी फर्मों के बैंक खातों से लेन-देन की प्रविष्टियां उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका सामने आई।

पूरक चालान में सात फर्मों को भेजी गई करीब 40 करोड़ की रकम और उससे जुड़े लेन-देन का विवरण शामिल किए जाने की बात कही गई है।

अनुराग चौरसिया: फ्लैट और जमीन में निवेश का आरोप

अनुराग चौरसिया की भूमिका को सौम्या चौरसिया से संबंधित कथित कोयला लेवी की रकम के निवेश से जोड़ा गया है।

EOW के अनुसार, इस रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर परिवार के सदस्यों के नाम फ्लैट और जमीन खरीदने में किया गया।

जांच में मोटल मधुबन और परिवार के सदस्यों के बैंक खातों के इस्तेमाल की बात कही गई है। इन खातों में आई रकम, आगे किए गए भुगतान और संपत्तियों में निवेश से संबंधित विवरण चालान में शामिल किए गए हैं।

दीपेश टांक पर नकद रकम को कृषि आय दिखाने का आरोप

दीपेश टांक से संबंधित मामले में EOW ने भूमि सौदे में रजिस्ट्री मूल्य से अतिरिक्त नकद रकम प्राप्त करने और उसे कथित तौर पर कृषि आय के रूप में दिखाने का उल्लेख किया है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, जमीन की बिक्री के बाद भी दीपेश टांक ओम एग्रो फार्म के कामकाज और भुगतान से जुड़े रहे।

अवैध रकम को कथित तौर पर जमीन और फार्म से संबंधित गतिविधियों में लगाने तथा उसे वैध आय के तौर पर प्रस्तुत करने से जुड़े तथ्यों को भी चालान का हिस्सा बनाया गया है।

सुनील कुमार अग्रवाल: वाशरी और जमीन में निवेश की जांच

इंद्रमणि समूह के सुनील कुमार अग्रवाल की कथित भूमिका भी पूरक चालान में शामिल है।

EOW के अनुसार, सूर्यकांत तिवारी की ओर से भेजी गई नकद रकम को अपने पास रखने, आगे भुगतान करने और कथित तौर पर वाशरी की खरीद में निवेश करने से संबंधित तथ्य सामने आए हैं।

इंद्रमणि समूह से जुड़े लेन-देन, वाशरी और जमीन की खरीद तथा नकद रकम के इस्तेमाल से संबंधित दस्तावेजों को जांच का हिस्सा बनाया गया है।

राहुल मिश्रा के पास नकद रकम रखे जाने का दावा

राहुल मिश्रा को सूर्यकांत तिवारी से जुड़ी निर्माण परियोजनाओं में काम करने वाला बताया गया है।

EOW के अनुसार, विवेचना में उनके पास बड़ी मात्रा में नकद रकम रखे जाने और आवश्यकता पड़ने पर निखिल चंद्राकर के माध्यम से सूर्यकांत तिवारी को रकम वापस उपलब्ध कराए जाने से संबंधित तथ्य मिले हैं।

निर्माण कार्यों के भुगतान और कथित तौर पर नकद रकम सुरक्षित रखने में उनकी भूमिका का विवरण भी पूरक चालान में शामिल किया गया है।

आगे भी जारी रहेगी जांच

EOW के मुताबिक, मामले में अभी जांच पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। अन्य संभावित संदिग्धों और बाकी लेन-देन के संबंध में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(8) के तहत आगे की विवेचना जारी है।

इस तरह 9,500 पन्नों का यह पूरक चालान कथित कोयला लेवी नेटवर्क में वसूली की व्यवस्था से लेकर रकम के वितरण, राजनीतिक गतिविधियों में संभावित इस्तेमाल और संपत्तियों में निवेश तक की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश करता है।

महत्वपूर्ण: पूरक चालान में दर्ज आरोप जांच एजेंसी के दावे हैं। जिन व्यक्तियों के नाम आरोपी के रूप में शामिल हैं, उनके विरुद्ध आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायालय में साक्ष्यों और सुनवाई के बाद होगा।

Nagendra sahu
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नागेन्द्र साहू छत्तीसगढ़ के भिलाई से हैं। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक (BJMC) और वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (MJ) की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वीडियो एडिटिंग ( Ex- भिलाई Times Sr Editor ) और डिजिटल कंटेंट में भी विशेषज्ञता के साथ वर्तमान में रेखांकित न्यूज़ का संचालन कर रहे हैं।
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