बलरामपुर-रामानुजगंज में शिक्षा विभाग की खरीदी जांच के बाद कार्रवाई; नरेंद्र कुमार निरापुरे को बनाया गया नया प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी

बलरामपुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव को उनके पद से हटा दिया गया है। यह कार्रवाई वित्तीय वर्ष 2025-26 में शिक्षा विभाग की करीब ₹4.51 करोड़ की खरीदी में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर हुई जांच के बाद सामने आई है। विभागीय आदेश के अनुसार यादव को अब सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परसा में प्राचार्य के पद पर पदस्थ किया गया है। उनकी जगह प्राचार्य नरेंद्र कुमार निरापुरे को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।
कलेक्टर की जांच में सामने आईं कई वित्तीय अनियमितताएं
मामला वित्तीय वर्ष 2025-26 का है। उपलब्ध जांच संबंधी रिपोर्टों के अनुसार बलरामपुर शिक्षा विभाग को छह योजनाओं के लिए करीब ₹4.57 करोड़ का बजट मिला था। इस राशि से विद्यार्थियों के लिए साइकिल, विज्ञान एवं तकनीकी सामग्री, फर्नीचर, खेल सामग्री, स्टेशनरी और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदी जानी थी।
जांच में आरोप है कि खरीद प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया और करीब ₹4.51 करोड़ के भुगतान में वित्तीय एवं प्रक्रियागत अनियमितताएं सामने आईं।
रिपोर्टों के मुताबिक, खरीद प्रक्रिया, स्टॉक रजिस्टर, कैशबुक और सामग्री के भौतिक सत्यापन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई थी।
4,025 साइकिलों के ₹1.62 करोड़ के भुगतान पर भी सवाल
जांच में 4,025 साइकिलों के लिए करीब ₹1.62 करोड़ के भुगतान का मामला भी सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक इन साइकिलों की स्टॉक एंट्री और चालान से जुड़े दस्तावेज जांच के दौरान उपलब्ध नहीं मिले। इसी तरह विज्ञान किट की खरीद में करीब ₹42 लाख के भुगतान का उल्लेख सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इसके भौतिक सत्यापन और स्टॉक में दर्ज किए जाने को लेकर भी सवाल उठे।
स्टेशनरी से लेकर नाश्ते के खर्च तक पर सवाल
जांच रिपोर्ट से जुड़े विवरणों के अनुसार स्टेशनरी के नाम पर करीब ₹11.20 लाख का भुगतान बिना कोटेशन और स्टॉक एंट्री के किए जाने का आरोप है।
परीक्षा की मुद्रण सामग्री के लिए रांची की एक फर्म को करीब ₹17.96 लाख का भुगतान किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
सबसे अलग मामला विभागीय बैठकों में अधिकारियों के नाश्ते पर खर्च का है। रिपोर्टों के मुताबिक इस मद में करीब ₹4 लाख खर्च किए गए। कई अन्य भुगतानों को लेकर भी जांच में सामग्री की उपलब्धता और दस्तावेजों पर सवाल उठाए गए हैं।
कैशबुक में कटिंग और ओवरराइटिंग का भी उल्लेख
जांच के दौरान कैशबुक में कटिंग, ओवरराइटिंग और अप्रमाणित सुधार पाए जाने की बात रिपोर्टों में सामने आई है। कार्यालय के कुछ कर्मचारियों ने भी कई सामग्रियों की खरीद अथवा प्राप्ति की जानकारी होने से इनकार किया।
रिपोर्ट के अनुसार कुछ भुगतान छोटे-छोटे हिस्सों में किए जाने की बात भी सामने आई, जिससे निर्धारित खरीद प्रक्रिया से बचने की आशंका पर सवाल उठे। एक ही फर्म को किए गए भुगतान की भी जांच की गई।
पहले भी विवादों में रहा है नाम
मनीराम यादव का नाम इससे पहले भी वित्तीय अनियमितता के आरोपों को लेकर सामने आता रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में उनके खिलाफ पूर्व में ₹2.42 करोड़ की कथित वित्तीय गड़बड़ी और अलग-अलग जिलों में चार बार निलंबन का उल्लेख किया गया है। हालांकि इन पुराने मामलों के संबंध में अलग-अलग रिपोर्टों में अलग विवरण हैं, इसलिए उन्हें वर्तमान जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
कार्रवाई के बाद नए प्रभारी DEO की नियुक्ति
विभागीय कार्रवाई के तहत मनीराम यादव को प्रभारी DEO के पद से हटाकर प्राचार्य पद पर भेजा गया है। वहीं नरेंद्र कुमार निरापुरे को बलरामपुर-रामानुजगंज जिले का नया प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बनाया गया है। यह प्रशासनिक बदलाव 28 सितंबर 2026 को सामने आया।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में मनीराम यादव को लेकर सामने आई वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच और उसके आधार पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी है। आरोपों का अंतिम आपराधिक या न्यायिक निष्कर्ष अलग प्रक्रिया का विषय है।

