
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग ने 16 अक्टूबर 2026 को अधिसूचना जारी की। इसमें आधार नामांकन, पहचान सत्यापन और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से संबंधित दस्तावेजों के प्रावधान स्पष्ट किए गए हैं।
नई दिल्ली। भारत सरकार ने आधार आधारित पहचान सत्यापन और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान स्थापित करने से जुड़े प्रावधानों को लेकर राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित की है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की ओर से जारी यह अधिसूचना 16 अक्टूबर 2026 की है। इसमें आधार संख्या के सत्यापन, नामांकन और पहचान साबित करने के लिए इस्तेमाल किए जा सकने वाले दस्तावेजों से संबंधित व्यवस्था का उल्लेख है।
अधिसूचना में कहा गया है कि आधार संख्या के उपयोग से विभिन्न सेवाओं और सुविधाओं का लाभ लेने वाले लोगों की पहचान स्थापित करने में दस्तावेजों की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही, सरकारी योजनाओं के तहत लाभ पाने के लिए पहचान और पात्रता से संबंधित जानकारी की पुष्टि करने की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
यह अधिसूचना आधार से जुड़ी पहचान सत्यापन व्यवस्था और संबंधित योजना के प्रावधानों पर केंद्रित है। इसे सभी नागरिकों के आधार कार्ड में बदलाव या प्रत्येक व्यक्ति के लिए नए दस्तावेज जमा करने के सामान्य आदेश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।


16 अक्टूबर 2026 को जारी हुई अधिसूचना
भारत के राजपत्र के असाधारण अंक में प्रकाशित इस अधिसूचना का संबंध सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग से है। दस्तावेज में आधार संख्या के उपयोग, लाभार्थियों की पहचान स्थापित करने और निर्धारित दस्तावेजों के माध्यम से जानकारी की पुष्टि करने से जुड़े नियमों का उल्लेख किया गया है।
अधिसूचना में आधार (वित्तीय और अन्य सहायकियों, लाभों तथा सेवाओं का लक्षित परिदान) अधिनियम, 2016 की धारा 7 का संदर्भ भी दिया गया है। यह धारा सरकारी निधि से दिए जाने वाले कुछ लाभों, सुविधाओं और सेवाओं के लिए आधार आधारित पहचान से संबंधित व्यवस्था प्रदान करती है।


पहचान सत्यापन के लिए कई दस्तावेजों का उल्लेख
राजपत्र में पहचान और नामांकन से संबंधित दस्तावेजों की सूची दी गई है। इसमें विभिन्न परिस्थितियों में इस्तेमाल किए जा सकने वाले दस्तावेजों का उल्लेख शामिल है।
दस्तावेज में सूचीबद्ध प्रमाणों में राशन कार्ड, जाति प्रमाणपत्र या अधिवास प्रमाणपत्र, सरकारी संस्थान अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम द्वारा जारी पहचान पत्र, भारतीय पासपोर्ट, मान्यता प्राप्त विद्यालय से जारी अंकपत्र या प्रमाणपत्र, दिव्यांगता प्रमाणपत्र और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज शामिल हैं।
हालांकि, प्रत्येक दस्तावेज हर व्यक्ति और हर परिस्थिति में स्वतः स्वीकार्य होगा, ऐसा निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। संबंधित प्रावधानों में व्यक्ति की उम्र, स्थिति, अभिभावक या कानूनी संरक्षक से संबंध और दस्तावेज जारी करने वाले प्राधिकारी की पात्रता जैसे पहलुओं का भी उल्लेख है।

बच्चों के लिए अलग प्रावधान
अधिसूचना में बच्चों के नामांकन और पहचान सत्यापन से जुड़ी स्थितियों के लिए भी प्रावधान दिए गए हैं। कुछ मामलों में बच्चे की पहचान स्थापित करने के लिए माता-पिता या कानूनी संरक्षक से संबंधित दस्तावेजों की जरूरत हो सकती है।
दस्तावेज में जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के तहत जारी जन्म प्रमाणपत्र, भारतीय पासपोर्ट, मान्यता प्राप्त विद्यालय से जारी प्रमाणपत्र और बाल देखरेख संस्थानों से संबंधित प्रमाण जैसे दस्तावेजों का उल्लेख है। विदेशी नागरिकों से संबंधित कुछ परिस्थितियों के लिए भी अलग दस्तावेजों का संदर्भ दिया गया है।
इन प्रावधानों का उद्देश्य अलग-अलग परिस्थितियों में पहचान सत्यापन के लिए स्वीकार्य दस्तावेजों का निर्धारण करना है। संबंधित व्यक्ति को अपनी स्थिति के अनुसार लागू नियमों और दस्तावेजों की पुष्टि करनी चाहिए।

दिव्यांग व्यक्तियों की पहचान से जुड़े दस्तावेज
दस्तावेज में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों से जुड़े कानूनों के तहत जारी प्रमाणपत्रों का भी उल्लेख है। इसमें दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत अधिसूचित चिकित्सा प्राधिकरण द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र और संबंधित विभाग द्वारा जारी विशिष्ट दिव्यांगता पहचान से जुड़े प्रमाणों का संदर्भ दिया गया है।
ऐसे दस्तावेज पहचान स्थापित करने की प्रक्रिया में प्रासंगिक हो सकते हैं, लेकिन उनकी स्वीकार्यता संबंधित योजना और लागू प्रावधानों के अनुसार तय होगी।
नामांकन और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया
अधिसूचना में नामांकन केंद्र पर प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच और सत्यापन से संबंधित जिम्मेदारियों का भी उल्लेख है। संबंधित विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रस्तुत दस्तावेज निर्धारित मानकों के अनुरूप हों और लाभार्थी की पहचान तथा पात्रता की पुष्टि नियमानुसार की जाए।
इसमें दस्तावेजों की प्रामाणिकता और नामांकन प्रक्रिया के दौरान उपलब्ध कराई गई जानकारी की जांच से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इसका उद्देश्य पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना और योजना के लाभों को पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने में सहायता करना है।
आम लोगों के लिए क्या मायने हैं?
इस अधिसूचना को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि दस्तावेजों की सूची और पहचान सत्यापन के प्रावधान संबंधित योजना तथा विशेष परिस्थितियों के संदर्भ में पढ़े जाने चाहिए। केवल इस अधिसूचना के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि सभी नागरिकों को आधार बनवाने, आधार अपडेट कराने या नए दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता है।
यदि कोई व्यक्ति संबंधित सरकारी योजना के तहत लाभ लेने के लिए आवेदन कर रहा है, तो उसे अपने मामले में लागू दस्तावेजों और प्रक्रिया की जानकारी संबंधित विभाग या अधिकृत नामांकन केंद्र से प्राप्त करनी चाहिए।
16 अक्टूबर 2026 की राजपत्र अधिसूचना आधार आधारित पहचान सत्यापन और सरकारी योजना के लाभार्थियों से संबंधित दस्तावेजी प्रक्रिया को स्पष्ट करती है। इसके वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए अधिसूचना के लागू प्रावधानों, संबंधित योजना और व्यक्ति की स्थिति को साथ में देखना आवश्यक है।

