सुप्रीम कोर्ट ने कहा- “मेडिकल बिरादरी को छुआ नहीं जा सकता”; 6 जुलाई के डोंबिवली अस्पताल कांड में चल रहा है ट्रायल, 3 अक्टूबर को महिला डॉक्टर की गवाही

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के डोंबिवली में डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों से कथित मारपीट के मामले में शिवसेना पार्षद रमेश सुक्र्या म्हात्रे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से दी गई जमानत को रद्द कर दिया और म्हात्रे को तीन दिन के भीतर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ महाराष्ट्र सरकार की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के 7 अगस्त के जमानत आदेश को चुनौती दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मेडिकल बिरादरी को छुआ नहीं जा सकता
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर हमले को लेकर कड़ा रुख अपनाया। पीठ ने कहा कि संदेश “जोरदार और स्पष्ट” तरीके से जाना चाहिए कि मेडिकल बिरादरी को छुआ नहीं जा सकता। अदालत ने कहा कि डॉक्टर लोगों की सेवा करते हैं और उन पर इस तरह हमला नहीं किया जा सकता।
पीठ ने यह भी कहा कि म्हात्रे से जुड़ी घटना के बाद उसी राजनीतिक दल से जुड़े लोगों द्वारा डॉक्टरों पर हमले की एक और घटना सामने आई है। कोर्ट ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेने की जरूरत पर जोर दिया।
3 दिन में सरेंडर करना होगा
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रमेश म्हात्रे को अब तीन दिनों के भीतर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना होगा। अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को हटाया, जिसके तहत उन्हें जमानत पर रिहा किया गया था।
मामले में महाराष्ट्र सरकार ने जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। वहीं म्हात्रे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने जमानत जारी रखने के पक्ष में दलीलें रखीं।
बचाव पक्ष ने कहा- ट्रायल शुरू हो चुका है
सिद्धार्थ दवे ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मामले का ट्रायल शुरू हो चुका है और दो गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता महिला डॉक्टर की गवाही 3 अक्टूबर को होनी है।
बचाव पक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि म्हात्रे ने जांच और ट्रायल में सहयोग किया है और कार्यवाही में उनकी जमानत के कारण कोई बाधा नहीं आई है। दवे ने मामले को मजिस्ट्रेट के समक्ष विचारणीय बताते हुए मुख्य अपराध में अधिकतम पांच साल की सजा का भी उल्लेख किया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने जमानत जारी रखने के बजाय उसे रद्द करने का फैसला किया।
19 आपराधिक मामलों का भी जिक्र
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने म्हात्रे के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया। पीठ ने कहा कि मौजूदा मामला मिलाकर उनके खिलाफ 19 आपराधिक मामले रहे हैं।
इस पर बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि ये मामले राजनीतिक कारणों से दर्ज किए गए थे और 18 मामलों में म्हात्रे बरी हो चुके हैं। कोर्ट ने इन मामलों के रिकॉर्ड मंगाने की बात कही। यह संख्या मौजूदा मामले में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से इन मामलों को लेकर अपनी स्थिति रखी गई है।
6 जुलाई को डोंबिवली के अस्पताल में हुआ था विवाद
मामला 6 जुलाई 2026 की घटना से जुड़ा है। डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल, जो कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका के अधीन है, में एक गर्भवती महिला के इलाज को लेकर विवाद हुआ था।
आरोप है कि इलाज में देरी को लेकर विवाद के बाद रमेश म्हात्रे और उनके साथ आए लोगों ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट की। घटना के CCTV फुटेज सामने आने के बाद मामला काफी चर्चा में आया था। पुलिस ने इसके बाद म्हात्रे समेत आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया और म्हात्रे को गिरफ्तार किया गया था।
1,832 पन्नों की चार्जशीट, पांच आरोपियों पर आरोप तय सितंबर में पुलिस ने इस मामले में 1,832 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद कल्याण की अदालत ने रमेश म्हात्रे और चार अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए।
म्हात्रे के अलावा प्रमोद निकम, रमेश पवार, अक्षय करांडे और साधना करांडे के नाम आरोपियों में शामिल हैं। सभी ने आरोपों से इनकार किया है और मामले में ट्रायल आगे बढ़ रहा है।
पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी थी जमानत
घटना के बाद निचली अदालत से जमानत मिलने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने जुलाई में मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए उस जमानत पर रोक लगा दी थी। बाद में 7 अगस्त को हाईकोर्ट ने म्हात्रे को जमानत देते हुए कई कड़ी शर्तें लगाईं और ट्रायल को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया।
इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सितंबर की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान जमानत को लेकर गंभीर टिप्पणियां की थीं। इसके बाद अब 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट का जमानत आदेश ही रद्द कर दिया।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद रमेश म्हात्रे को तीन दिन के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा। दूसरी तरफ मूल आपराधिक मामले में ट्रायल जारी रहेगा।
3 अक्टूबर को शिकायतकर्ता महिला डॉक्टर की गवाही इस मामले की अगली महत्वपूर्ण कार्यवाही है। इससे पहले दो अभियोजन गवाहों के बयान दर्ज होने की जानकारी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई थी।
इस पूरे मामले में अंतिम दोषसिद्धि या बरी होने का फैसला अभी बाकी है। सुप्रीम कोर्ट का मौजूदा आदेश जमानत के सवाल पर है; इससे मूल आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं निकलता।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का बड़ा संदेश
रमेश म्हात्रे की जमानत रद्द करने के साथ सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है। अदालत की टिप्पणी का केंद्र यह था कि अस्पताल में सेवा दे रहे मेडिकल पेशेवरों के साथ हिंसा को सामान्य कानून-व्यवस्था की घटना के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
अब इस मामले में निगाहें 3 अक्टूबर की महिला डॉक्टर की गवाही और आगे होने वाली ट्रायल कार्यवाही पर रहेंगी।

