
छात्रवृत्ति, आश्रम स्कूलों और छात्रावासों की सुविधाओं को लेकर 10 दिन से आंदोलन का दावा; कांग्रेस ने आदिवासी विकास मंत्री के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया
मुंबई, 5 अक्टूबर। महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सोमवार को कांग्रेस और पुलिस के बीच आरोप-प्रत्यारोप सामने आए। महाराष्ट्र कांग्रेस ने दावा किया कि आदिवासी विकास विभाग से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर मुंबई पहुंचे कई छात्रों को पुलिस ने तड़के रोककर हिरासत में लिया। कांग्रेस के मुताबिक, ये छात्र आजाद मैदान में प्रदर्शन करने वाले थे और आदिवासी विकास मंत्री तथा विभाग के आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। हालांकि, मुंबई पुलिस ने कांग्रेस के उस आरोप से इनकार किया कि छात्रों को तिलक भवन स्थित कांग्रेस कार्यालय से गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि लोक भवन की ओर मार्च करने की योजना बना रहे प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
कांग्रेस के अनुसार, आदिवासी छात्र पिछले 10 दिनों से अधिक समय से छात्रवृत्ति, आश्रम स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, छात्रावासों की स्थिति और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। पार्टी का दावा है कि मांगों पर समाधान नहीं होने के बाद कई छात्र बसों से और कुछ पैदल मुंबई पहुंचे। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर आजाद मैदान में प्रदर्शन की तैयारी की थी।
कांग्रेस का आरोप है कि मुंबई पहुंचने के बाद नासिक से आए कुछ छात्रों को दादर स्थित महाराष्ट्र कांग्रेस के मुख्यालय तिलक भवन में ठहराया गया था। पार्टी के मुताबिक, छात्रों के पास मुंबई में रुकने की व्यवस्था नहीं थी, इसलिए उन्हें कार्यालय में जगह दी गई। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने
कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने तड़के करीब तीन बजे छात्रों को रोका, उनकी तस्वीरें लीं और कुछ छात्रों को हिरासत में ले लिया। पार्टी के मुताबिक, छात्रों को पुलिस कार्रवाई और मामले दर्ज किए जाने की चेतावनी भी दी गई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि छात्रों को मुंबई लाने वाली एक बस को भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन उनकी छात्रवृत्ति, आश्रम स्कूलों और छात्रावासों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए था। उन्होंने पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा और कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों की आवाज को पुलिस कार्रवाई के जरिए दबाया नहीं जाना चाहिए। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से छात्रों की मांगों पर बातचीत करने की अपील भी की।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि वह आदिवासी छात्रों की मांगों के समर्थन में उनके साथ खड़ी है। पार्टी ने आरोप लगाया कि छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जा रही है। सपकाल ने कथित तौर पर कांग्रेस कार्यालय में पुलिस के प्रवेश और छात्रों को हिरासत में लेने की कोशिश को तत्काल रोकने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्रों और NSUI पदाधिकारियों को रिहा नहीं किया गया तो कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ का घेराव कर सकते हैं।
दूसरी ओर, मुंबई पुलिस ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के अनुसार, तिलक भवन से किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया। पुलिस अधिकारी डीसीपी मनीष कलवानिया ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने लोक भवन, यानी महाराष्ट्र के राज्यपाल के आवास की ओर मार्च करने का आह्वान किया था और ऐसे प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिया गया। पुलिस ने कहा कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम में फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने हैं। कांग्रेस का कहना है कि पुलिस ने छात्रों को उनके प्रदर्शन से पहले रोका और कुछ छात्रों को तिलक भवन से हिरासत में लिया, जबकि पुलिस का कहना है कि तिलक भवन से किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया और कार्रवाई उन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई जो लोक भवन की ओर बढ़ने की योजना बना रहे थे। इसलिए हिरासत की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई के पूरे क्रम की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

