अमेरिका में पढ़ाई और स्कॉलरशिप दिलाने के नाम पर कथित धोखाधड़ी; पिता ने जमीन बेची, मां ने गहने गिरवी रखे। FIA ने दो संदिग्धों के खिलाफ केस दर्ज किया, मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की खबर।

इस्लामाबाद, 11 अक्टूबर 2026। अमेरिका की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़कर वैज्ञानिक बनने का सपना देख रही पाकिस्तान की भौतिकी गोल्ड मेडलिस्ट लायबा एजाज की मौत ने देश में विदेशी शिक्षा के नाम पर होने वाली कथित धोखाधड़ी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। The Media Line की रिपोर्ट के अनुसार, 24 वर्षीय लायबा और उनके परिवार से हार्वर्ड में दाखिला, स्कॉलरशिप और अमेरिकी वीजा दिलाने के नाम पर 93 लाख पाकिस्तानी रुपये (करीब 34 हजार अमेरिकी डॉलर) लेने का आरोप है। परिवार का दावा है कि उन्हें फर्जी प्रवेश पत्र, स्कॉलरशिप दस्तावेज और फीस की रसीदें दी गई थीं। मामले में पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (FIA) ने दो संदिग्धों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है।

पेड़ से लटका मिला शव, परिवार ने धोखाधड़ी का आरोप लगाया
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा की रहने वाली लायबा का शव 9 अक्टूबर को इस्लामाबाद के G-10 सेक्टर स्थित संडे बाजार के पास मिला था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। परिवार के मुताबिक, लायबा अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल कर वैज्ञानिक बनना चाहती थीं। उन्होंने इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी इस्लामाबाद से भौतिकी में स्नातक की पढ़ाई गोल्ड मेडल के साथ पूरी की थी।
परिवार का आरोप है कि विदेश में दाखिले के लिए सलाहकार की तलाश के दौरान उनकी मुलाकात मोहम्मद नौमान से हुई। उसने हार्वर्ड में प्रवेश, स्कॉलरशिप और वीजा दिलाने का भरोसा दिया। आरोप है कि रकम लेने के बाद उसने विश्वविद्यालय के नाम पर फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए। अमेरिकी दूतावास में वीजा इंटरव्यू के दौरान प्रवेश संबंधी दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठे। इसके बाद परिवार ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय और अपने संपर्कों के माध्यम से कागजात की पुष्टि करने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हो सका।

जमीन बेचकर और गहने गिरवी रखकर जुटाए पैसे
लायबा के परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी। उनके पिता 1994 से इस्लामाबाद की सड़कों पर मोटरसाइकिल से दूध और दही बेचकर परिवार चलाते हैं। परिवार के अनुसार, वह अपनी चार बेटियों को मास्टर डिग्री तक पढ़ाना चाहते थे।
लायबा की पढ़ाई के लिए पिता ने वह जमीन का प्लॉट बेच दिया, जिसे उन्होंने परिवार के लिए घर बनाने के उद्देश्य से खरीदा था। उनकी मां ने भी गहने गिरवी रखकर पैसे जुटाए। परिवार को उम्मीद थी कि इन पैसों से लायबा का अमेरिका में पढ़ने का सपना पूरा होगा।
परिवार के मुताबिक, लायबा को इससे पहले विश्वविद्यालय के माध्यम से सऊदी अरब में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप का अवसर मिला था, लेकिन वह अमेरिका में आगे की पढ़ाई करना चाहती थीं।

29 लाख रुपये बैंक से ट्रांसफर, बाकी रकम नकद देने का आरोप
The Media Line के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया कि कथित 93 लाख रुपये में से 29 लाख रुपये लायबा के बैंक खाते के जरिए ट्रांसफर किए गए, जबकि बाकी रकम नकद दी गई। परिवार का आरोप है कि संदिग्धों ने फर्जी स्कॉलरशिप लेटर, विश्वविद्यालय के प्रवेश प्रस्ताव और फीस भुगतान की रसीदों के जरिए उन्हें भरोसे में लिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, वीजा इंटरव्यू कई बार टाले जाने के बाद भी नौमान ने कथित तौर पर परिवार को बताया कि अगला इंटरव्यू 12 अक्टूबर को निर्धारित है। उसने इंटरव्यू से पहले बाकी 22 लाख रुपये देने की मांग भी की थी। परिवार के अनुसार, तब तक लायबा को दस्तावेजों में गड़बड़ी का पता चलने लगा था और वह मानसिक दबाव में थीं।
उनके बहनोई जैद बिन अफजल ने The Media Line को बताया कि लायबा ने मौत से पहले उनसे पिता को धोखाधड़ी की जानकारी न देने की गुजारिश की थी। यह विवरण परिवार के सदस्य के बयान पर आधारित है।

FIA ने दो संदिग्धों के खिलाफ केस दर्ज किया
पाकिस्तान की FIA ने 10 अक्टूबर को मोहम्मद नौमान और फातिमा सरवर के खिलाफ मामला दर्ज किया। शिकायत लायबा के मामा अमजद उर रहमान की ओर से दी गई थी। FIR में आरोप है कि दोनों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर अमेरिका में दाखिले, स्कॉलरशिप और वीजा के नाम पर परिवार से रकम ली और फर्जी दस्तावेजों के जरिए धोखा दिया।
The Media Line और पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नौमान को इस्लामाबाद के H-13 इलाके में छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियां उसके मोबाइल फोन से मिली सामग्री और अन्य संभावित मामलों में उसकी भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। इन अतिरिक्त आरोपों की पुष्टि अभी जांच से होनी बाकी है। फातिमा सरवर की भूमिका और मामले में अन्य संभावित लोगों की संलिप्तता की जांच भी जारी है।
FIA के महानिदेशक उस्मान अनवर ने इस मामले को सामान्य शिक्षा सलाहकार धोखाधड़ी के बजाय पहचान और संपर्कों का झांसा देकर किए गए कथित फर्जीवाड़े के रूप में देखा है। आरोप है कि एक महिला को अमेरिका में संपर्क के तौर पर पेश किया गया, जिसके जरिए स्कॉलरशिप और वित्तीय प्रायोजन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने का दावा किया गया।
प्रधानमंत्री ने दिए जांच के निर्देश
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने लायबा की मौत को बेहद दुखद बताते हुए मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, उन्होंने इस्लामाबाद पुलिस से जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार करने और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। इसके बाद गृह मंत्री मोहसिन नकवी और गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने शनिवार को पीड़ित परिवार से मुलाकात की।
इस मामले ने पाकिस्तान में विदेश में पढ़ाई के लिए सेवाएं देने वाले निजी सलाहकारों के नियमन पर भी सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में शिक्षा सलाहकार बिलाल रांझा और युवा अधिकार कार्यकर्ता नाहीद खान ने कहा कि विदेश में पढ़ने की आकांक्षा रखने वाले छात्रों को फर्जी दस्तावेजों और झूठे वादों से बचाने के लिए सख्त निगरानी, बेहतर सत्यापन व्यवस्था और प्रभावी कानून लागू करने की जरूरत है।
छात्रों और परिवारों के लिए क्या है सबक?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका और यूरोप के विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए छात्रों को किसी एजेंट के दावों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए। विश्वविद्यालय के आधिकारिक ईमेल, वेबसाइट और प्रवेश कार्यालय के जरिए दाखिले तथा स्कॉलरशिप दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि करना जरूरी है। किसी भी सलाहकार के कहने पर बड़ी रकम देने से पहले उसकी पहचान, पंजीकरण और सेवाओं की वैधता की जांच की जानी चाहिए।
लायबा का मामला केवल कथित आर्थिक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है। यह उन परिवारों की उम्मीदों और जोखिमों को भी सामने लाता है, जो अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए अपनी जमा-पूंजी, संपत्ति और गहने तक दांव पर लगा देते हैं। हालांकि, उनकी मौत की परिस्थितियों और कथित धोखाधड़ी के बीच संबंधों की अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
[rekhamkit_whatsaapp]

