
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और गंभीर खुलासा किया है। ED के अनुसार, कर्नाटक कैडर के 2016 बैच के IAS अधिकारी और KPSC के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार ने कथित तौर पर एक बिचौलिए को परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने में मदद की। एजेंसी का आरोप है कि इसके बदले अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूले गए।
ED के मुताबिक, प्रश्नपत्र परीक्षा से एक दिन पहले बिचौलिए तक पहुंचाया गया था। मामले में गंगवार और कथित बिचौलिए बसवराज कन्नाले को गिरफ्तार किया जा चुका है। ED ने बताया है कि दोनों की गिरफ्तारी क्रमशः 18 और 17 सितंबर 2026 को हुई थी।
परीक्षा से एक दिन पहले लीक हुआ था प्रश्नपत्र
मामला जनवरी 2026 में हुई KPSC की पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। इस परीक्षा के जरिए राज्य में करीब 400 Veterinary Officer पदों पर भर्ती की जानी थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, गंगवार उस समय KPSC में परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। ED का आरोप है कि उन्होंने परीक्षा से एक दिन पहले कथित बिचौलिए बसवराज कन्नाले को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने में मदद की। इसके बाद कथित तौर पर प्रश्नपत्र और उसके उत्तर कुछ अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए। ED के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों से प्रश्नपत्र और उत्तर हासिल करने के लिए 30 से 40 लाख रुपये प्रति उम्मीदवार तक लिए गए।
बेंगलुरु के रिसॉर्ट में बुलाए गए अभ्यर्थी
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित रिसॉर्ट और लग्जरी विला में ठहराया गया था। आरोप है कि यहां उन्हें कथित तौर पर पहले से उपलब्ध प्रश्नपत्र दिए गए और उनके उत्तर याद कराने की व्यवस्था की गई। CID की जांच में भी ऐसे अभ्यर्थियों और बिचौलियों के बीच संपर्क तथा परीक्षा से पहले रिसॉर्ट में ठहराए जाने की जानकारी सामने आई थी।
जांच में टॉप रैंकर्स पर भी उठे सवाल
मामले की जांच आगे बढ़ने पर केवल पेपर लीक ही नहीं, बल्कि परीक्षा परिणाम और चयन प्रक्रिया में कथित हेरफेर के संकेत भी मिले हैं। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में सांख्यिकीय संभावना परीक्षण के जरिए जनवरी में हुई परीक्षा के 14 शीर्ष रैंक वाले अभ्यर्थियों के उत्तरों में असाधारण समानता पाई गई। जांचकर्ताओं के अनुसार, सही उत्तरों के साथ-साथ कुछ गलत उत्तरों का पैटर्न भी एक जैसा था। एक अन्य जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 11 अभ्यर्थियों द्वारा कथित तौर पर प्रश्नपत्र हासिल करने के लिए बड़ी रकम देने की बात सामने आई है। जांच में कुल कथित रिश्वत लेनदेन करीब 1.52 करोड़ रुपये तक पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है।
हालांकि, इन सभी आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी बाकी है और जांच जारी है।
IAS अधिकारी को 18 सितंबर को ED ने गिरफ्तार किया
ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को कर्नाटक CID ने पहले गिरफ्तार किया था। इसके बाद KPSC भर्ती मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच कर रही ED ने 18 सितंबर 2026 को उन्हें गिरफ्तार किया। ED के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, गंगवार और बसवराज कन्नाले को पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र कथित तौर पर अवैध रकम के बदले लीक करने के मामले में गिरफ्तार किया गया। दोनों को विशेष PMLA अदालत ने ED हिरासत में भेजा था। इससे पहले बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने गंगवार की जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी। अदालत के सामने जांच एजेंसी ने कथित मनी ट्रेल और गंगवार तथा बिचौलिए के बीच संपर्क से जुड़े साक्ष्य पेश किए थे।
कौन हैं IAS ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार?
ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार कर्नाटक कैडर के 2016 बैच के IAS अधिकारी हैं। वे उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के नवाबगंज क्षेत्र के चमरौआ गांव से आते हैं। उन्होंने IIT-JEE परीक्षा पास करने के बाद IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में B.Tech किया। इसके बाद करीब चार से पांच साल तक निजी क्षेत्र में इंजीनियर और कंसल्टेंट के तौर पर काम किया। बाद में उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की।
उन्होंने UPSC Civil Services Examination 2015 में 314वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की और 2016 में उन्हें कर्नाटक कैडर आवंटित हुआ।
कर्नाटक में संभालीं कई अहम जिम्मेदारियां
IAS बनने के बाद गंगवार ने कर्नाटक में कई प्रशासनिक पदों पर काम किया। इनमें:
- भाल्की, बीदर में Assistant Commissioner
- बीदर जिला पंचायत के CEO
- मैसूरु स्थित Administrative Training Institute में Joint Director (Training)
- कर्नाटक Urban Water Supply and Drainage Board में Joint Managing Director
- Karnataka Food and Civil Supplies Corporation में Managing Director
- KPSC में Controller of Examinations
शामिल हैं। फरवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच वे KPSC के परीक्षा नियंत्रक रहे। जून 2026 में उन्हें कर्नाटक के Commerce and Industries Department में MSME विभाग का Director नियुक्त किया गया था।
मामला सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं?
KPSC भर्ती मामले की जांच में ED और CID को कथित तौर पर भर्ती प्रक्रिया के दूसरे चरणों में भी अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। Indian Express के अनुसार, जांचकर्ताओं को कुछ KPSC अधिकारियों से बरामद दस्तावेजों में विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की shortlist में कथित हेरफेर से जुड़े संकेत मिले हैं।
इसलिए जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में पेपर लीक एक अलग घटना थी या इसके पीछे भर्ती प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर काम करने वाला कोई नेटवर्क था।
फिलहाल मामले में जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगा।

