कटनी जमीन सौदा मामले में निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया पर इनाम बढ़ा, तीनों आरोपी अब भी फरार; SIT की कार्रवाई पर उठे सवाल

कटनी जमीन सौदा मामले में फरार निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया की तलाश करती SIT
कटनी जमीन सौदा मामले में फरार निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया समेत तीन आरोपियों की तलाश जारी है।

₹1.07 करोड़ की जमीन ₹18.20 लाख में रजिस्ट्री कराने के आरोपों से जुड़ा है मामला, जबलपुर रेंज DIG ने इनाम ₹10 हजार से बढ़ाकर ₹20 हजार किया

कटनी (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के कटनी जिले के चर्चित जमीन सौदा और पद के कथित दुरुपयोग मामले में फरार चल रहीं निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया और उनके दो कथित सहयोगियों की गिरफ्तारी पुलिस के लिए अब भी चुनौती बनी हुई है। मामले में फरार तीनों आरोपियों पर पहले 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, जिसे अब जबलपुर रेंज के डीआईजी अतुल सिंह ने बढ़ाकर 20-20 हजार रुपये कर दिया है। इसके बावजूद FIR दर्ज होने के करीब दो महीने बाद भी पुलिस तीनों आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की तलाश के लिए आठ सदस्यीय SIT गठित की गई है। टीम ने संभावित ठिकानों पर दबिश भी दी है, लेकिन अब तक निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी में से किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। यही वजह है कि इनाम बढ़ाए जाने के बाद एक बार फिर SIT की कार्रवाई और पुलिस की गिरफ्तारी रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं।

हत्या के आरोपी के परिवार की जमीन से शुरू हुआ विवाद

पूरा मामला कटनी के कुठला थाना क्षेत्र में दर्ज एक हत्या के प्रकरण से जुड़ा बताया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, हत्या के मामले में आरोपी आकाश लोधी को समय पर चालान पेश नहीं होने के कारण जुलाई 2026 में डिफॉल्ट जमानत मिली थी। जेल से बाहर आने के बाद आकाश लोधी और उसके परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि तत्कालीन CSP नेहा पच्चीसिया ने पुलिस कार्रवाई का दबाव बनाकर परिवार को कन्हवारा स्थित जमीन बेचने के लिए मजबूर किया।

जांच से जुड़े आरोपों के मुताबिक, जमीन का क्षेत्रफल करीब 2.15 हेक्टेयर था। सरकारी गाइडलाइन के अनुसार इसकी कीमत करीब ₹82.86 लाख बताई गई, जबकि विभिन्न रिपोर्टों में जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य करीब ₹1.07 करोड़ तक बताया गया है। आरोप है कि यह जमीन महज ₹18.20 लाख में मारूफ अहमद हनफी के नाम रजिस्टर्ड कराई गई।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जमीन की कीमत और सौदे की रकम को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में कुछ अंतर दिखाई देता है, लेकिन जांच का केंद्रीय आरोप यही है कि जमीन को कथित तौर पर उसके मूल्य से काफी कम कीमत पर हस्तांतरित कराया गया।

पैसे के लेनदेन ने बढ़ाया संदेह

जांच में सामने आए कथित वित्तीय लेनदेन को भी मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, जमीन मारूफ अहमद हनफी के नाम पर खरीदी गई थी, जबकि उसके खाते में जमीन खरीदने से पहले बहुत कम रकम थी। आरोप है कि जमीन की खरीद के लिए क्षितिज राज बारापात्रे के खाते से मारूफ के खाते में रकम भेजी गई।

इसी वित्तीय कड़ी के आधार पर जांच एजेंसियों ने तीनों आरोपियों के बीच संबंध और कथित भूमिका की जांच की। हालांकि, इन आरोपों का अंतिम कानूनी निर्धारण अभी अदालत में होना बाकी है।

शिकायतों के बाद शुरू हुई विभागीय जांच

जमीन सौदे को लेकर परिवार की ओर से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन समेत वरिष्ठ अधिकारियों के पास शिकायत किए जाने के बाद मामला विभागीय स्तर पर जांच के दायरे में आया। इसी दौरान ट्रांसपोर्टरों से कथित अवैध वसूली और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी शिकायतों की भी जांच किए जाने की जानकारी सामने आई।

जबलपुर रेंज के तत्कालीन आईजी के निर्देश पर जांच की जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक IPS अनु बेनीवाल को दी गई थी। विभागीय जांच के बाद कुठला थाने में तीनों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। रिपोर्टों के अनुसार, मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र, पद के कथित दुरुपयोग और भ्रष्टाचार निवारण कानून से जुड़ी धाराएं लगाई गईं।

FIR के बाद निलंबन और पुलिस विभाग में कार्रवाई

FIR दर्ज होने के बाद नेहा पच्चीसिया को निलंबित कर भोपाल पुलिस मुख्यालय से अटैच किए जाने की कार्रवाई की गई। उनके कार्यालय और स्टाफ रूम को सील किए जाने की भी जानकारी सामने आई थी। मामले में लापरवाही के आरोपों को लेकर उनके रीडर, गनमैन और ड्राइवर समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर भी विभागीय कार्रवाई की गई।

तीनों मुख्य आरोपी FIR दर्ज होने के बाद से फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस ने पहले उनकी गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। बाद में जब लंबे समय तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी तो यह राशि बढ़ाकर 20-20 हजार रुपये कर दी गई।

कोर्ट से भी नहीं मिली अग्रिम जमानत की राहत

गिरफ्तारी से बचने के लिए नेहा पच्चीसिया और अन्य आरोपियों की ओर से अदालत का रुख किया गया। कटनी की जिला अदालत ने नेहा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद मामले को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

सितंबर में हाईकोर्ट में FIR निरस्त करने और अंतरिम राहत से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने तत्काल FIR पर रोक लगाने जैसी राहत नहीं दी और मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा। प्रकरण की आगे की न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।

गिरफ्तारी वारंट, लुकआउट और अब इनाम दोगुना

पुलिस की कार्रवाई के दौरान तीनों आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने की भी जानकारी सामने आई थी। इससे पहले उनके विदेश जाने की आशंका को देखते हुए लुकआउट सर्कुलर की कार्रवाई भी शुरू की गई थी।

इसके बाद SIT ने आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी। एक कार्रवाई में मारूफ अहमद हनफी के घर पर ताला मिला और आसपास के लोगों से पूछताछ की गई। लेकिन इन कार्रवाइयों के बावजूद तीनों आरोपी पुलिस की पकड़ में नहीं आए।

अब इनाम की राशि दोगुनी किए जाने से पुलिस की ओर से आरोपियों की तलाश तेज किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही है कि लंबे समय से फरार चल रहे तीनों आरोपियों तक पुलिस और SIT आखिर कब पहुंच पाती है।

फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस की जांच, बरामद दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।


Nagendra sahu
Nagendra sahu
नागेन्द्र साहू छत्तीसगढ़ के भिलाई से हैं। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक (BJMC) और वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (MJ) की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वीडियो एडिटिंग ( Ex- भिलाई Times Sr Editor ) और डिजिटल कंटेंट में भी विशेषज्ञता के साथ वर्तमान में रेखांकित न्यूज़ का संचालन कर रहे हैं।
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