₹5,000 करोड़ के बकाये पर कटोरा लेकर सड़क पर उतरे जल जीवन मिशन के ठेकेदार, रायपुर में अर्धनग्न प्रदर्शन

 रायपुर में जल जीवन मिशन के बकाया भुगतान की मांग को लेकर कटोरा लेकर प्रदर्शन करते ठेकेदार
जल जीवन मिशन के बकाया भुगतान की मांग को लेकर रायपुर में ठेकेदारों का प्रदर्शन।

रायपुर | रेखांकित न्यूज़

छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के तहत निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों ने लंबित भुगतान के विरोध में मंगलवार, 27 अक्टूबर को रायपुर में प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में ठेकेदार अर्धनग्न होकर और हाथों में कटोरा लेकर सड़क पर उतरे। एसोसिएशन का दावा है कि मिशन के तहत किए गए कामों का करीब 5,000 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है और इससे प्रदेश के लगभग 2,000 ठेकेदार प्रभावित हैं।

ठेकेदारों का कहना है कि लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण उनकी पूंजी निर्माण कार्यों में फंसी हुई है। बैंक ऋण की किस्तें चुकाने, मजदूरों की मजदूरी देने और निर्माण सामग्री के सप्लायर्स का बकाया चुकाने में उन्हें परेशानी हो रही है।

कटोरा लेकर प्रदर्शन, भुगतान की मांग

ठेकेदारों ने बकाया राशि जारी करने की मांग को लेकर रायपुर में विरोध प्रदर्शन किया। एसोसिएशन के मुताबिक, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और संबंधित विभागों के अधिकारियों के सामने कई बार यह मुद्दा उठाया गया, लेकिन भुगतान को लेकर ठोस समाधान नहीं निकल पाया।

प्रदर्शन के जरिए ठेकेदारों ने सरकार और संबंधित विभागों तक अपनी आर्थिक परेशानियां पहुंचाने की कोशिश की। उनकी प्रमुख मांग है कि लंबित भुगतान की स्थिति स्पष्ट की जाए और पात्र निर्माण एजेंसियों को बकाया राशि जल्द जारी की जाए।

तीन साल से भुगतान अटके होने का दावा

जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक नल के माध्यम से पेयजल पहुंचाना है। इसके तहत गांवों में पानी की टंकियां, पाइपलाइन, नलकूप, सौर ऊर्जा आधारित जल योजनाओं और अन्य निर्माण कार्यों पर काम कराया गया।

छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन का दावा है कि इन कार्यों के लिए करीब 5,000 करोड़ रुपये का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। एसोसिएशन के अनुसार, कई ठेकेदारों ने अपनी जमा-पूंजी लगाने के साथ बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेकर काम पूरे किए।

हालांकि, लंबित भुगतान की कुल राशि, उसकी अवधि और अलग-अलग निर्माण एजेंसियों के बकाये की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग के आंकड़ों से होना बाकी है।

बैंक की किस्तें, मजदूरी और सप्लायर्स का भुगतान प्रभावित

ठेकेदारों के मुताबिक, समय पर भुगतान नहीं मिलने से बैंक ऋण की मासिक किस्तें चुकाना मुश्किल हो गया है। निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों की मजदूरी और सामग्री उपलब्ध कराने वाले सप्लायर्स की रकम भी फंसी हुई है।

एसोसिएशन का कहना है कि लगातार आर्थिक दबाव के कारण कुछ ठेकेदारों के सामने बैंक डिफॉल्टर होने का खतरा पैदा हो गया है। भुगतान में देरी का असर निर्माण एजेंसियों की आगे काम करने की क्षमता पर भी पड़ रहा है।

केंद्र-राज्य की प्रक्रिया और विभागीय समन्वय पर सवाल

छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने भुगतान में देरी के लिए केंद्र और राज्य सरकार की वित्तीय प्रक्रियाओं तथा पंचायतों और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के बीच समन्वय की कमी को जिम्मेदार बताया है।

एसोसिएशन के मुताबिक, ठेकेदार पहले भी ज्ञापन देकर अपनी मांग रख चुके हैं। उनका कहना है कि भुगतान में देरी के कारणों को स्पष्ट करते हुए संबंधित विभागों को समयबद्ध समाधान निकालना चाहिए।

फिलहाल भुगतान अटकने के विभागीय कारणों और राशि जारी करने की समयसीमा पर संबंधित सरकार या विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।

तैयार टंकियों और पाइपलाइन के बावजूद जलापूर्ति पर सवाल

ठेकेदारों का दावा है कि कुछ गांवों में पानी की टंकियां और पाइपलाइन तैयार होने के बावजूद जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि बकाया भुगतान मिलने से लंबित काम पूरे करने और योजनाओं को चालू करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, सभी प्रभावित गांवों की स्थिति और जलापूर्ति शुरू नहीं होने के कारणों का आकलन संबंधित विभाग के रिकॉर्ड से किया जाना जरूरी है। जल जीवन मिशन का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब निर्माण के साथ योजनाओं का संचालन भी सुनिश्चित हो और ग्रामीण परिवारों तक नियमित पेयजल पहुंचे।

अब विभागीय जवाब और भुगतान पर नजर

रायपुर में हुए प्रदर्शन के बाद अब प्रमुख सवाल यह है कि लंबित भुगतान की वास्तविक स्थिति क्या है, कितनी राशि का भुगतान स्वीकृत या लंबित है और ठेकेदारों को राहत देने के लिए विभाग क्या कदम उठाएगा।

ठेकेदारों की मांग है कि बकाया भुगतान की प्रक्रिया तेज की जाए। वहीं, भुगतान की राशि, देरी के कारणों और आगे की समयसीमा पर संबंधित विभाग का आधिकारिक जवाब इस विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण होगा


Nagendra sahu
Nagendra sahu
नागेन्द्र साहू छत्तीसगढ़ के भिलाई से हैं। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक (BJMC) और वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (MJ) की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वीडियो एडिटिंग ( Ex- भिलाई Times Sr Editor ) और डिजिटल कंटेंट में भी विशेषज्ञता के साथ वर्तमान में रेखांकित न्यूज़ का संचालन कर रहे हैं।
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