
आजमगढ़, 25 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के शंभूपुर हत्याकांड के बाद जिले के एसएसपी डॉ. अनिल कुमार चर्चा में हैं। घटना में अपने माता-पिता और भाई को खो चुकीं दो बच्चियों की जिम्मेदारी उठाने का फैसला उन्होंने किया है। एसएसपी ने दोनों बच्चियों को गोद लेने के साथ उनकी पढ़ाई से लेकर भविष्य तक की जिम्मेदारी उठाने की बात कही है। इसके अलावा उन्होंने अपनी एक महीने की सैलरी दोनों बच्चियों के नाम एफडी कराने का निर्णय लिया है। आजमगढ़ पुलिस के करीब 5 हजार पुलिसकर्मी भी एक-एक दिन का वेतन बच्चियों के लिए देने की घोषणा कर चुके हैं।
10 साल की परी और 11 महीने की शानवी की जिम्मेदारी उठाएंगे SSP
हत्याकांड के बाद 10 साल की परी और 11 महीने की शानवी परिवार में अकेली रह गई हैं। एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने दोनों बच्चियों को गोद लेने और उनकी पढ़ाई से लेकर शादी तक की जिम्मेदारी उठाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि उनका पहले से एक बेटा और एक बेटी है और अब उनके परिवार में दो बेटियां और जुड़ गई हैं
एसएसपी ने अपनी एक महीने की सैलरी बच्चियों के नाम एफडी कराने का फैसला किया है। पुलिसकर्मियों की ओर से मिलने वाली राशि भी बच्चियों के नाम सावधि जमा कराने की बात कही गई है, जिसका उपयोग उनके बालिग होने के बाद किया जा सकेगा।
जिला प्रशासन की ओर से भी दोनों बच्चियों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की बात कही गई है।
कौन हैं IPS डॉ. अनिल कुमार?
डॉ. अनिल कुमार 2016 बैच के IPS अधिकारी हैं। वे मूल रूप से राजस्थान के झुंझुनूं जिले के रहने वाले हैं। पुलिस सेवा में आने से पहले उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई की और डॉक्टर के रूप में भी काम किया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने जोधपुर से MBBS की पढ़ाई की और दिल्ली के गुरु तेग बहादुर तथा हिंदू राव अस्पतालों में जूनियर डॉक्टर के तौर पर सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की।
रिपोर्टों के अनुसार, 2016 में उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा के लिए हुआ और उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला। वे प्रशिक्षण के दौरान नोएडा में ASP रहे और इसके बाद वाराणसी में भी ASP के पद पर तैनात रहे। बाद में उन्होंने चंदौली, प्रतापगढ़ और अन्य जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। वर्तमान में वे आजमगढ़ के SSP हैं।
क्या है आजमगढ़ का शंभूपुर हत्याकांड?
यह मामला आजमगढ़ के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव का है। पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, घटना के दौरान अरविंद सिंह ने अपनी पत्नी, बेटे और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद वह अपने बच्चों के साथ एक कमरे में बंद हो गया।

पुलिस ने बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कई घंटे तक बातचीत और समझाने का प्रयास किया। पुलिस के मुताबिक, बाद में कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज आई। कार्रवाई के दौरान अरविंद घायल हुआ और उसकी मौत हो गई। उसका 9 वर्षीय बेटा शौर्य भी गोली लगने से गंभीर रूप से घायल मिला और बाद में उसकी मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि बच्चे को गोली अरविंद ने ही मारी थी। इस दावे को लेकर सामने आए परिजनों के आरोपों के जवाब में पुलिस ने अपनी ओर से अलग तथ्य रखे हैं।

इस घटना के बाद दो बच्चियां सुरक्षित बचीं, लेकिन उन्होंने अपने माता-पिता और भाई को खो दिया। अब एसएसपी डॉ. अनिल कुमार और आजमगढ़ पुलिस ने उनके भविष्य के लिए आर्थिक और व्यक्तिगत जिम्मेदारी उठाने की घोषणा की है।




