अग्रवाल-वैश्य और हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने जताया समर्थन, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को ज्ञापन देने की बात; प्रदर्शन में SIR को लेकर भी समर्थन के स्वर

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद के बीच दिल्ली में उनके समर्थन में भी प्रदर्शन हुआ। 27 सितंबर को अग्रवाल-वैश्य और हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने धरना देकर ज्ञानेश कुमार के समर्थन में नारे लगाए और उन्हें भारत रत्न देने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग पोस्टर और बैनर लेकर पहुंचे। इनमें ज्ञानेश कुमार के समर्थन के साथ-साथ Special Intensive Revision (SIR) को जरूरी बताते हुए मतदाता सूची की जांच और सुधार की प्रक्रिया का समर्थन किया गया।

धरने में उठी भारत रत्न देने की मांग
प्रदर्शनकारियों के हाथों में ऐसे पोस्टर दिखाई दिए, जिनमें ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की गई थी। कई पोस्टरों पर उनके समर्थन में नारे लिखे थे। प्रदर्शन के दौरान “ज्ञानेश कुमार तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं” जैसे नारे भी लगाए गए।
आयोजकों की ओर से कहा गया कि SIR के जरिए मतदाता सूची की जांच और सुधार की प्रक्रिया जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने ज्ञानेश कुमार के काम का समर्थन करते हुए उनके लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान की मांग रखी।
प्रदर्शन से जुड़े लोगों की ओर से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नाम ज्ञापन देने की बात भी सामने आई है।

बिरला मंदिर के बाहर भी जुटे समर्थक
दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के समर्थन में प्रदर्शन का एक कार्यक्रम बिरला मंदिर के बाहर भी हुआ। यहां हिंदू-वैश्य संगठनों से जुड़े लोगों ने धरना दिया और भारत रत्न की मांग उठाई।
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध को लेकर भी अपनी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची को लेकर चलाए जा रहे अभियान को राजनीतिक विवाद के बजाय चुनावी प्रक्रिया के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।
SIR को लेकर क्या है समर्थन करने वालों का तर्क?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मतदाता सूची में गलत, अपात्र या संदिग्ध नामों की पहचान करना जरूरी है। उनके अनुसार SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को दोबारा जांचना और उसमें मौजूद संभावित गड़बड़ियों को दूर करना है।
इसी वजह से प्रदर्शन में SIR के समर्थन में भी पोस्टर दिखाई दिए। कुछ पोस्टरों में बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का दावा किया गया। ये प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए दावे हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।


समर्थन और विरोध, दोनों तरफ सड़क पर उतरे लोग
ज्ञानेश कुमार को लेकर दिल्ली में इस समय दो अलग-अलग तरह की तस्वीरें सामने आ रही हैं। एक तरफ उनके समर्थन में संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं और भारत रत्न देने की मांग उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और कुछ अन्य संगठनों ने SIR तथा निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध प्रदर्शन किए हैं।
25 सितंबर को दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की गई थी। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया था। इसके बाद 27 सितंबर को उनके समर्थन में हुए प्रदर्शनों ने इस पूरे विवाद की एक दूसरी तस्वीर सामने रखी।

विवाद के केंद्र में SIR
ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रही राजनीतिक बहस का एक बड़ा हिस्सा SIR से जुड़ा है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दल प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग और SIR के समर्थकों का कहना है कि मतदाता सूची की जांच और उसे अपडेट करना चुनावी प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है।
हाल के दिनों में निर्वाचन आयोग के भीतर SIR से जुड़े कुछ मुद्दों पर चर्चा और आपत्तियों को लेकर भी सवाल उठे हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसके महत्वपूर्ण निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं और विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है।
इसी विवाद के बीच दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के समर्थन में हुए प्रदर्शन ने मामले को एक नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम दिया है।

प्रदर्शनकारियों ने क्या मांग रखी?
समर्थन प्रदर्शन में मुख्य रूप से तीन बातें सामने आईं—
- ज्ञानेश कुमार के समर्थन में प्रदर्शन और नारेबाजी
- SIR की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का समर्थन
- ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग
इसके अलावा प्रदर्शनकारियों की ओर से विरोध करने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई गई। हालांकि, ऐसी मांगें प्रदर्शन में शामिल संगठनों और उनके प्रतिनिधियों की राजनीतिक-सामाजिक राय हैं।

क्या भारत रत्न देने का कोई फैसला हुआ है?
नहीं। ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की कोई सरकारी घोषणा नहीं हुई है। यह मांग दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे संगठनों की ओर से उठाई गई है। इसे फिलहाल एक मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
दिल्ली में हुआ यह प्रदर्शन इसलिए चर्चा में है क्योंकि SIR को लेकर चल रहे विरोध के बीच पहली बार बड़ी संख्या में लोगों ने खुले तौर पर CEC के समर्थन में सड़क पर उतरकर उनके पक्ष में नारे लगाए और भारत रत्न जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान की मांग रखी।

