दुर्ग में अर्नब का असर: पानी में डूबी धान की फसल, कर्ज की चिंता में किसान; बीमा से मुआवजे की मांग

दुर्ग जिले में बारिश के बाद पानी में डूबी धान की फसल और नुकसान से चिंतित किसान
दुर्ग जिले के गांवों में धान की फसल पर बारिश का असर, किसान फसल बीमा और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट | रिसामा, मातरोडीह, बोरीगारका और आसपास के गांव | 29 अक्टूबर 2026

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में चक्रवाती तूफान अर्नब के बाद हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पकने के करीब पहुंच चुकी धान की फसल पानी में डूबी हुई है। जिन किसानों को इस साल अच्छी पैदावार और मुनाफे की उम्मीद थी, अब वे फसल खराब होने, वजन घटने और खेती के लिए लिए गए कर्ज को चुकाने की चिंता में हैं।

रेखांकित न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम ने 29 अक्टूबर को दुर्ग जिले के रिसामा, मातरोडीह, बोरीगारका और आसपास के गांवों में पहुंचकर किसानों से बातचीत की। खेतों के बीच खड़े होकर हालात देखे तो कई जगह धान की लहलहाती फसल पानी में झुकी और डूबी नजर आई। किसानों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल है—अगर फसल खराब हुई, तो उनकी आर्थिक भरपाई कैसे होगी?

अर्नब कमजोर हुआ, लेकिन किसानों की मुश्किलें बरकरार

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवाती तूफान अर्नब 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकराने के बाद कमजोर हुआ। 29 अक्टूबर की सुबह यह दक्षिण छत्तीसगढ़ और दक्षिण ओडिशा के आसपास अवदाब के रूप में मौजूद था। मौसम विभाग ने इसके आगे उत्तर की ओर बढ़ने और धीरे-धीरे कमजोर होने का अनुमान जताया था। Mausam+1

हालांकि, तूफान की तीव्रता कम होने का मतलब यह नहीं है कि खेतों में जमा पानी और फसल को हुआ नुकसान भी तुरंत खत्म हो जाएगा। दुर्ग जिले के ग्रामीण इलाकों में किसानों की चिंता अब खेतों से पानी निकलने, धान की गुणवत्ता बचाने और संभावित नुकसान की भरपाई को लेकर है।

महिला किसान अपने नुकास हुए फसल को देखते हुए- दुर्ग मात्रोडी

खेतों में पानी, फसल बर्बाद होने का डर

रिसामा, मातरोडीह और बोरीगारका सहित आसपास के गांवों में ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान खेतों में पानी भरा हुआ दिखाई दिया। धान की फसल पानी के दबाव और बारिश के कारण झुक गई है। किसानों को आशंका है कि यदि खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहा, तो फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और उपज का वजन भी घट सकता है।

धान की फसल खराब होने का असर केवल पैदावार तक सीमित नहीं रहेगा। किसानों को मंडी में मिलने वाली कीमत, उत्पादन लागत की भरपाई और अगले कृषि सीजन की तैयारी पर भी इसका असर झेलना पड़ सकता है।

खेती के लिए कर्ज लिया, अब चुकाने की चिंता

किसानों ने बताया कि उन्होंने धान की खेती के लिए कर्ज लिया था। हर साल की तरह इस बार भी उन्हें उम्मीद थी कि फसल तैयार होने के बाद खर्च निकालकर कुछ मुनाफा बचेगा। लेकिन बेमौसम बारिश और तूफान के असर ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेरने की आशंका पैदा कर दी है।

किसानों की चिंता यह है कि फसल को नुकसान होने पर उनकी आमदनी घट सकती है, जबकि कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी बनी रहेगी। ऐसे में यदि उपज कम हुई या धान की गुणवत्ता खराब होने से उसकी कीमत घटी, तो आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

यह स्थिति उन किसानों के लिए ज्यादा मुश्किल हो सकती है जिनके पास नुकसान सहने के लिए पर्याप्त बचत नहीं है और जिनकी अगली खेती भी इसी फसल से मिलने वाली रकम पर निर्भर है।

फसल बीमा का प्रीमियम कटता है, तो संकट में मदद क्यों नहीं?

ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान किसानों ने फसल बीमा को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि सहकारी समितियों के माध्यम से खाद, बीज और कीटनाशक जैसी कृषि सामग्री लेने के दौरान उनके खातों से फसल बीमा का प्रीमियम भी काटा जाता है। किसानों के मुताबिक, प्रीमियम की राशि खेती और क्षेत्रफल के हिसाब से निर्धारित होती है।

किसानों का सवाल है कि जब फसल बीमा प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान के समय आर्थिक सुरक्षा देने के लिए लिया जाता है, तो ऐसी परिस्थिति में उन्हें इसका लाभ कैसे मिलेगा? उनका कहना है कि वे नियमित रूप से प्रीमियम देते हैं, लेकिन उन्हें अब तक अपेक्षित सहायता नहीं मिल पाई है।

इस बार किसान चाहते हैं कि उनके नुकसान का आकलन किया जाए और पात्र किसानों को बीमा योजना के नियमों के तहत मुआवजा दिलाया जाए।

यहां प्रशासन और बीमा व्यवस्था के सामने कुछ अहम सवाल हैं:

  • प्रभावित गांवों में फसल नुकसान का सर्वे कब और किस तरीके से होगा?
  • पानी में डूबी धान की फसल को नुकसान के आकलन में किस आधार पर शामिल किया जाएगा?
  • जिन किसानों का फसल बीमा है, उनके दावों का निपटारा कितने समय में होगा?
  • पात्र किसानों को बीमा राशि के अलावा किसी अन्य सरकारी राहत का लाभ मिलेगा या नहीं?

इन सवालों के जवाब किसानों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि नुकसान का आकलन और राहत मिलने में देरी होने पर उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है।

कृषि विश्वविद्यालय की सलाह: पकी फसल काटें, खेतों से पानी निकालें

तूफान और बारिश के संभावित असर को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर की ओर से जारी कृषि सलाह में किसानों को फसल की स्थिति के अनुसार कदम उठाने की सलाह दी गई थी।

सलाह के मुताबिक, जिन किसानों की धान की फसल पक चुकी है, उन्हें मौसम की स्थिति और खेतों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फसल की कटाई कर उसे सुरक्षित स्थान पर रखने का प्रयास करना चाहिए। वहीं, जिन खेतों में फसल अभी कटाई के लिए तैयार नहीं है और पानी भर गया है, वहां से पानी निकालने की व्यवस्था करने की सलाह दी गई।

रबी की फसलों को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा गया था। अत्यधिक नमी और प्रतिकूल मौसम की स्थिति में दलहन की बुवाई या रोपाई को टालने तथा गेहूं, गोभी, ब्रोकली और अन्य सब्जियों में कीटनाशक या फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव करने से पहले उचित मौसम और कृषि विशेषज्ञों की सलाह को ध्यान में रखने की बात कही गई थी। रबी की बुवाई का समय स्थानीय मौसम और खेत की नमी की स्थिति के अनुसार तय करना जरूरी है।

अब प्रशासन की जिम्मेदारी: सर्वे, बीमा और राहत

दुर्ग जिले के प्रभावित गांवों में किसानों के सामने तत्काल चुनौती खेतों से पानी निकालने और बची हुई फसल को सुरक्षित रखने की है। इसके साथ ही नुकसान का निष्पक्ष आकलन और बीमा दावों की प्रक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

प्रशासन को प्रभावित खेतों का सर्वे कराना, किसानों को दावा प्रक्रिया की जानकारी देना और पात्रता के अनुसार राहत उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाने होंगे। फसल बीमा का लाभ मिलने के लिए संबंधित योजना की शर्तें, बीमित फसल, अधिसूचित क्षेत्र और नुकसान की निर्धारित प्रक्रिया महत्वपूर्ण होंगी।

किसानों की मांग साफ है—सिर्फ नुकसान दर्ज करने तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि उन्हें समय पर राहत भी मिले, ताकि फसल खराब होने के बाद वे कर्ज के और गहरे बोझ में न दब जाएं।

देखिए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट

रिसामा, मातरोडीह, बोरीगारका और आसपास के गांवों में किसानों ने अपनी फसल, मौसम और आर्थिक स्थिति को लेकर क्या बताया? खेतों में पानी भरने से उनकी क्या मुश्किलें बढ़ी हैं और फसल बीमा से उन्हें क्या उम्मीदें हैं?

देखिए रेखांकित न्यूज़ की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट—खेतों के बीच से, किसानों की जुबानी।


Nagendra sahu
Nagendra sahu
नागेन्द्र साहू छत्तीसगढ़ के भिलाई से हैं। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक (BJMC) और वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (MJ) की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वीडियो एडिटिंग ( Ex- भिलाई Times Sr Editor ) और डिजिटल कंटेंट में भी विशेषज्ञता के साथ वर्तमान में रेखांकित न्यूज़ का संचालन कर रहे हैं।
spot_imgspot_img

ट्रेंडिंग

खबर जो मायने रखती है

महादेव सट्टा ऐप का कथित सरगना सौरभ चंद्राकर ओमान से भारत लाया गया, सोमवार को रायपुर की विशेष अदालत में होगी पेशी

महादेव ऑनलाइन बुक ऐप मामले के प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर का ओमान से प्रत्यर्पण कर भारत लाया गया है। CBI उसे 2 नवंबर को रायपुर की विशेष अदालत में पेश करेगी।

अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन: हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में ली अंतिम सांस, 78 वर्ष की उम्र में हुआ निधन

छत्तीसगढ़ के अहिवारा से भाजपा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का शुक्रवार को हैदराबाद में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे लंबे समय से फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे।

मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप: भूपेश बघेल ने वार्डवार आंकड़े रखे, आपत्तियों के बाद हाईकोर्ट जाने की चेतावनी

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दुर्ग जिले के चार नगरीय निकायों की प्रारंभिक मतदाता सूची में मतदाताओं के वार्ड बदलने का आरोप लगाया है। कांग्रेस 30 अक्टूबर तक आपत्तियां दर्ज कराएगी।

छत्तीसगढ़ में EOW-ACB का बड़ा एक्शन: शराब, कोल और DMF मामलों में कई शहरों में छापेमारी

शराब, कोल लेवी और DMF मामलों की जांच के बीच EOW-ACB ने छत्तीसगढ़ के कई शहरों में एक साथ छापेमारी की। कारोबारियों और अन्य संबंधित लोगों के ठिकानों पर दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।