दिल्ली पुलिस का CJP को दोटूक संदेश: “प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन शहर को ठप नहीं किया जा सकता”; जंतर-मंतर पर फिर जुटने की तैयारी के बीच सुरक्षा पर जोर

दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में प्रदर्शन की अनुमति, भीड़ नियंत्रण और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर रखी अपनी दलीलें। जुलाई के प्रदर्शन में हिंसा, पुलिसकर्मियों के घायल होने और तय अवधि से अधिक समय तक धरना चलने का भी किया जिक्र।

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026। दिल्ली में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना पक्ष रखा है। पुलिस ने कहा कि लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन इसके साथ शहर में रहने वाले लोगों, कामगारों, कारोबारियों और सार्वजनिक संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने, भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात व शहर की सामान्य गतिविधियों को जारी रखने के लिए प्रतिबंध लगाए गए हैं।

दिल्ली पुलिस ने अपनी पोस्ट में कहा कि प्रदर्शन का अधिकार और शहर के सामान्य कामकाज को सुरक्षित बनाए रखना, दोनों महत्वपूर्ण हैं। पुलिस का कहना है कि उसकी जिम्मेदारी ऐसी परिस्थितियां तैयार करना है, जिनमें प्रदर्शनकारी अपनी बात रख सकें और आसपास के लोगों की सुरक्षा भी बनी रहे। इसी आधार पर जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा संबंधी इंतजाम किए जा रहे हैं।

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस का बयान और जंतर-मंतर की सुरक्षा व्यवस्था
दिल्ली पुलिस ने CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सुरक्षा और अनुमति प्रक्रिया को लेकर अपना पक्ष रखा।

जुलाई के प्रदर्शन का हवाला, अनुमति नहीं मिलने की वजह भी बताई

दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में जुलाई में हुए पिछले प्रदर्शन का उल्लेख किया। पुलिस के अनुसार, उस समय एक दिन के प्रदर्शन की अनुमति ली गई थी, लेकिन प्रदर्शन करीब एक महीने तक जारी रहा। पुलिस ने दावा किया कि उस दौरान 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए और झड़पों में छात्र भी चोटिल हुए थे। पुलिस का कहना है कि वह ऐसी स्थिति दोबारा नहीं चाहती।

पुलिस ने यह भी कहा कि जंतर-मंतर सीमित जगह वाला क्षेत्र है, जहां एक समय में करीब 1,000 लोगों को अनुमति देने की व्यवस्था है। ऐसे में भीड़ की संख्या, सुरक्षा, यातायात और आपातकालीन सेवाओं की पहुंच को ध्यान में रखकर आयोजन की योजना बनाना जरूरी है।

दिल्ली पुलिस ने CJP के 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया है। पुलिस ने इसकी वजह आवेदन कम समय पहले दिए जाने और पिछले प्रदर्शन के दौरान नियमों तथा आयोजकों की ओर से दिए गए आश्वासनों के कथित उल्लंघन को बताया है। दूसरी ओर, प्रदर्शन का उद्देश्य मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जवाबदेही की मांग करना बताया गया है।

“अनुमति लेना लोकतंत्र विरोधी नहीं”

दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन आयोजित करने के लिए पहले से अनुमति लेना लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ नहीं है। इससे प्रशासन को प्रदर्शनकारियों की संभावित संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात डायवर्जन और आपातकालीन रास्तों की योजना बनाने का समय मिलता है।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार बना हुआ है, लेकिन आयोजकों को निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करना होगा। पुलिस का तर्क है कि प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय निवासियों, दुकानदारों, कर्मचारियों और वहां से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

सुरक्षा इंतजामों के बीच कल प्रस्तावित प्रदर्शन

10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग, भीड़ नियंत्रण और हिरासत केंद्रों की तैयारी की है। यातायात और मेट्रो सेवाओं को लेकर भी एहतियाती कदम उठाए जाने की खबरें हैं।

इस पूरे मामले में मुख्य सवाल यह है कि प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए। दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में इसी संतुलन को सुरक्षा प्रतिबंधों का आधार बताया है।


Nagendra sahu
Nagendra sahu
नागेन्द्र साहू छत्तीसगढ़ के भिलाई से हैं। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक (BJMC) और वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (MJ) की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वीडियो एडिटिंग ( Ex- भिलाई Times Sr Editor ) और डिजिटल कंटेंट में भी विशेषज्ञता के साथ वर्तमान में रेखांकित न्यूज़ का संचालन कर रहे हैं।
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