कनाडा की Allison Inquiry में अमेरिकी कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पीटर मैक्कलॉ ने COVID-19 वैक्सीन और स्पाइक प्रोटीन को लेकर कई गंभीर दावे किए। उन्होंने वैक्सीन लेने वालों को “जिंदा बचने के लिए भाग्यशाली” बताया और SARS-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन को gain-of-function research से जोड़ते हुए वैक्सीन से होने वाली कई बीमारियों का दावा किया। लेकिन इंक्वायरी खुद तथ्यात्मक निष्कर्ष देने वाली जांच नहीं है और उपलब्ध वैज्ञानिक साहित्य इन दावों के सभी हिस्सों का समर्थन नहीं करता।

11 सितंबर 2026,ओटावा: कनाडा की संसद परिसर में सितंबर 2026 में हुई Allison Inquiry में COVID-19 वैक्सीन और कथित वैक्सीन इंजरी को लेकर कई गवाहों ने अपनी बातें रखीं। 11 सितंबर को अमेरिकी कार्डियोलॉजिस्ट और इंटरनिस्ट डॉ. पीटर मैक्कलॉ ने करीब 67 मिनट तक गवाही दी। उन्होंने अपनी प्रस्तुति में COVID-19 वैक्सीन के mRNA, स्पाइक प्रोटीन, myocarditis, blood clots, कैंसर और SARS-CoV-2 के कथित gain-of-function research से संबंध को लेकर कई दावे किए।
मैक्कलॉ ने गवाही के दौरान कहा कि COVID-19 वैक्सीन लेने वाले लोग कई मायनों में “जिंदा बचने के लिए भाग्यशाली” हैं। उनका तर्क था कि अलग-अलग लोगों की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और आनुवंशिक अंतर यह तय करते हैं कि किसी व्यक्ति में स्पाइक प्रोटीन से कथित नुकसान होगा या नहीं।
हालांकि, इन बयानों को समझने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि Allison Inquiry का घोषित उद्देश्य तथ्यात्मक निष्कर्ष निकालना नहीं है। उसके Terms of Reference में स्पष्ट है कि यह एक ऐसा मंच है जहां COVID-19 वैक्सीन से नुकसान का अनुभव बताने वाले कनाडाई लोगों की बातें सुनी जाती हैं। इसमें विशेषज्ञों को संदर्भ देने के लिए बुलाया जा सकता है, लेकिन इंक्वायरी को तथ्य निर्धारित करने या निष्कर्ष निकालने का अधिकार नहीं दिया गया है।


मैक्कलॉ ने क्या दावा किया?
मैक्कलॉ ने अपनी प्रस्तुति में SARS-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन को gain-of-function research से जोड़ते हुए दावा किया कि वायरस का स्पाइक प्रोटीन मानव कोशिकाओं में प्रवेश करने और नुकसान पहुंचाने के लिए जानबूझकर बदला गया था। उन्होंने आगे कहा कि यही स्पाइक प्रोटीन COVID-19 वैक्सीनों का मुख्य antigenic target था और वैक्सीन के जरिए इसके genetic code को मानव शरीर में पहुंचाया गया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि SARS-CoV-2 स्वयं gain-of-function biological research का उत्पाद है और Wuhan Institute of Virology से जुड़े अमेरिकी-चीनी सहयोग को इस संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।
लेकिन यह स्थापित वैज्ञानिक तथ्य नहीं है कि SARS-CoV-2 को gain-of-function research के जरिए बनाया गया था। WHO की Scientific Advisory Group for the Origins of Novel Pathogens यानी SAGO ने 2025 में प्रकाशित अपने व्यापक आकलन में कहा था कि उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों का भार zoonotic spillover यानी जानवर से इंसान में संक्रमण की ओर अधिक इशारा करता है। साथ ही WHO ने यह भी कहा कि उपलब्ध जानकारी अधूरी है और lab-leak hypothesis को पूरी तरह खारिज करने के लिए पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इसलिए “lab leak की संभावना पर जांच जारी है” और “वायरस gain-of-function research से बनाया गया था” — दोनों को एक ही बात मानना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है।

स्पाइक प्रोटीन को लेकर क्या पता है?
mRNA COVID-19 वैक्सीन शरीर की कोशिकाओं को SARS-CoV-2 के spike protein का एक हिस्सा बनाने के निर्देश देती हैं। इसका उद्देश्य प्रतिरक्षा प्रणाली को उस प्रोटीन को पहचानने और उसके खिलाफ immune response तैयार करने के लिए प्रशिक्षित करना है।
मैक्कलॉ ने दावा किया कि वैक्सीन से बनने वाला स्पाइक प्रोटीन शरीर में लंबे समय तक रह सकता है और कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने अपनी गवाही में अपने एक मरीज का उदाहरण भी दिया और दावा किया कि उसके शरीर में वैक्सीन और स्पाइक प्रोटीन के संकेत टीकाकरण के साढ़े तीन साल बाद भी मिले।
यहां उपलब्ध शोध को अलग-अलग स्तरों पर देखना जरूरी है।
कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में टीकाकरण के बाद mRNA या spike protein के कुछ संकेत सीमित अवधि तक lymph nodes, blood या अन्य नमूनों में पाए गए हैं। उदाहरण के लिए, एक peer-reviewed अध्ययन ने पहले के शोधों का हवाला देते हुए बताया कि कुछ लोगों में vaccine mRNA और spike protein lymph nodes में 60 दिन तक detect किए गए और कुछ अध्ययनों में circulating spike protein कई दिनों या कुछ हफ्तों तक पाया गया।
लेकिन इन observations से यह निष्कर्ष अपने आप नहीं निकलता कि वैक्सीन का mRNA या spike protein सामान्य रूप से वर्षों तक पूरे शरीर में सक्रिय अवस्था में रहता है या इससे व्यापक बीमारी होती है। इस विषय में persistence, मात्रा, जैविक प्रभाव और clinical disease के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।


वैक्सीन से Myocarditis का संबंध वास्तविक है, लेकिन इसकी तस्वीर क्या है?
मैक्कलॉ की गवाही का एक बड़ा हिस्सा myocarditis यानी हृदय की मांसपेशियों में सूजन पर केंद्रित था। उन्होंने इसे COVID-19 vaccination से गंभीर नुकसान के प्रमाण के रूप में पेश किया।
यहां उपलब्ध आधिकारिक चिकित्सा डेटा मैक्कलॉ के एक हिस्से को समर्थन देता है: mRNA COVID-19 vaccines के बाद myocarditis और pericarditis का एक दुर्लभ जोखिम वास्तव में पहचाना गया है।
अमेरिकी CDC के अनुसार, उपलब्ध safety-monitoring systems ने mRNA COVID-19 vaccines और myocarditis/pericarditis के बीच causal association का समर्थन किया है। मामले सबसे अधिक adolescent और young adult males में, विशेषकर दूसरी dose के बाद, देखे गए हैं।
Health Canada भी myocarditis और pericarditis को COVID-19 vaccines के rare adverse events में शामिल करता है। उसके अनुसार ये मामले अक्सर दूसरी dose के बाद और 12 से 29 वर्ष की उम्र के युवाओं में, खासकर पुरुषों में, सामने आए हैं। अधिकांश प्रभावित लोग उपचार के बाद तेजी से ठीक होते हैं।
इसलिए “COVID वैक्सीन के बाद myocarditis का कोई जोखिम नहीं है” कहना सही नहीं होगा। लेकिन इससे यह निष्कर्ष भी नहीं निकलता कि वैक्सीन से व्यापक स्तर पर cardiac deaths या अन्य सभी बीमारियां होती हैं। किसी adverse event का vaccination के बाद होना और उसका vaccine के कारण होना अलग-अलग वैज्ञानिक प्रश्न हैं।



क्या वैक्सीन लेने वाले लोग “जिंदा बचने के लिए भाग्यशाली” हैं?
यह मैक्कलॉ का स्पष्ट मूल्यांकन था, वैज्ञानिक consensus नहीं।
उनका कहना था कि कुछ लोगों की antibodies स्पाइक प्रोटीन को पर्याप्त रूप से neutralize कर देती हैं, जबकि अन्य लोगों में यही protein अलग-अलग organ systems को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने vaccine-injured patients में cardiovascular, neurological, thrombotic और immunological syndromes का उल्लेख किया।
इसके विपरीत WHO का जुलाई 2026 का position paper COVID-19 vaccines की safety, effectiveness और population-specific use की समीक्षा करता है और वर्तमान evidence के आधार पर high-risk groups में vaccination की सिफारिशों को जारी रखता है। WHO का कहना है कि दुनिया भर में 13 अरब से अधिक doses दिए जा चुके हैं और गंभीर adverse events अत्यंत दुर्लभ रहे हैं।
इसका अर्थ यह नहीं है कि vaccine injuries के मामलों को नजरअंदाज किया जाना चाहिए। बल्कि यही कारण है कि adverse-event surveillance और pharmacovigilance महत्वपूर्ण हैं।
कनाडा के मौजूदा surveillance dashboard के अनुसार 2024 में COVID समेत सभी vaccines के लिए 2,835 adverse-event reports दर्ज हुईं, जिनमें 226 serious reports थीं। Health Canada स्पष्ट करता है कि vaccination के बाद हुई medical event अपने आप में vaccine causation साबित नहीं करती; ऐसी घटनाओं की चिकित्सकीय समीक्षा और safety monitoring की आवश्यकता होती है।




कैंसर को लेकर भी मैक्कलॉ ने गंभीर दावे किए
मैक्कलॉ ने अपनी गवाही में COVID infection और vaccination को कैंसर के बढ़ते मामलों से जोड़ने की संभावना पर जोर दिया। उन्होंने कुछ मरीजों के tissue samples में vaccine genetic material मिलने का दावा भी किया और कहा कि ऐसे observations की आगे जांच होनी चाहिए।
यह क्षेत्र अभी भी वैज्ञानिक जांच का विषय है। किसी tumor में genetic material का कोई fragment मिल जाना अपने आप यह साबित नहीं करता कि उसी material ने कैंसर पैदा किया या tumor की growth तेज की।
मैक्कलॉ ने स्वयं अपनी गवाही में एक जगह स्वीकार किया कि cancer trends को लेकर observational explanation संभव है और यह भी कहा कि कैंसर महामारी से पहले भी बढ़ रहा था। इसके बावजूद उन्होंने vaccination और cancer के बीच संभावित संबंध की जांच को आवश्यक बताया।
यही अंतर इस बहस में महत्वपूर्ण है—किसी संभावित biological mechanism या observed association को causal relationship साबित करने के लिए नियंत्रित और स्वतंत्र शोध की आवश्यकता होती है।


Gain-of-function और वैक्सीन के बीच क्या संबंध है?
मैक्कलॉ ने दो अलग-अलग वैज्ञानिक सवालों को अपनी गवाही में एक-दूसरे से जोड़ा।
पहला सवाल है—SARS-CoV-2 की उत्पत्ति क्या थी और क्या laboratory research की इसमें कोई भूमिका थी?
दूसरा सवाल है—COVID-19 vaccines कितनी सुरक्षित हैं और इनके दुर्लभ adverse events क्या हैं?
दोनों सवाल महत्वपूर्ण हैं, लेकिन एक का उत्तर दूसरे का उत्तर नहीं देता।
WHO की 2025 SAGO assessment ने कहा कि available evidence zoonotic spillover के पक्ष में अधिक है, जबकि पर्याप्त data उपलब्ध नहीं होने के कारण lab-leak hypothesis को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता।
अमेरिकी Government Accountability Office ने 2026 की एक रिपोर्ट में gain-of-function research of concern को एक वास्तविक biosafety और biosecurity concern बताया, लेकिन यह भी कहा कि इस तरह के research ने pathogen biology की समझ बढ़ाई है और COVID-19 vaccines या therapeutics के development से इसके सीधे संबंध की सीमा पर व्यापक सहमति नहीं है।
इसलिए gain-of-function research का अस्तित्व और SARS-CoV-2 का उसी research से बनाया जाना दो अलग दावे हैं।

Allison Inquiry का महत्व और उसकी सीमा
Allison Inquiry का आयोजन कनाडाई सांसद Dean Allison की अध्यक्षता में हुआ। आधिकारिक Terms of Reference के अनुसार इसका उद्देश्य COVID-19 vaccine injuries का व्यक्तिगत अनुभव सुनना है। इसमें experts को contextual testimony के लिए बुलाया जा सकता है, लेकिन inquiry को facts पर formal findings या conclusions देने का mandate नहीं दिया गया है।
इसलिए मैक्कलॉ की गवाही को एक विशेषज्ञ गवाह द्वारा रखे गए दावों और व्याख्याओं के रूप में देखना चाहिए, न कि इंक्वायरी द्वारा प्रमाणित वैज्ञानिक निष्कर्ष के रूप में।
उनकी गवाही में कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिनके समर्थन में वैज्ञानिक और regulatory evidence मौजूद है—जैसे mRNA vaccines के बाद rare myocarditis का जोखिम। दूसरी ओर, उनके कई व्यापक दावे—जैसे spike protein को “lethal” कहना, SARS-CoV-2 को gain-of-function engineered virus बताना या vaccination को व्यापक कैंसर और multi-organ damage का कारण बताना—मौजूदा वैज्ञानिक consensus से मेल नहीं खाते या उनके लिए पर्याप्त स्थापित causal evidence उपलब्ध नहीं है।

बहस का असली सवाल
COVID-19 महामारी के बाद वैक्सीन सुरक्षा पर बहस अब केवल यह पूछने तक सीमित नहीं है कि vaccines से side effects होते हैं या नहीं। वैज्ञानिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों के सामने इससे अधिक कठिन सवाल हैं—किस adverse event का vaccine से causal संबंध है, उसका जोखिम किस population में कितना है, किन लोगों को अतिरिक्त सावधानी की जरूरत है और suspected vaccine injury के मामलों की पहचान और उपचार कैसे बेहतर किया जाए।
इसी तरह SARS-CoV-2 की उत्पत्ति को लेकर भी वैज्ञानिक जांच समाप्त नहीं हुई है। WHO ने कहा है कि उपलब्ध evidence zoonotic origin की ओर अधिक झुकता है, लेकिन पर्याप्त जानकारी साझा नहीं होने के कारण सभी hypotheses को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता।
मैक्कलॉ की एलिसन इंक्वायरी में गवाही ने इन दोनों बहसों—वैक्सीन सुरक्षा और वायरस की उत्पत्ति—को एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। लेकिन गवाही में किए गए दावों और स्थापित वैज्ञानिक निष्कर्षों के बीच अंतर बनाए रखना इस पूरी बहस को समझने के लिए उतना ही जरूरी है।

