
5 नवंबर को देवेंद्र यादव और पूर्व विधायक चंद्रदेव राय समेत अनुपस्थित आरोपियों की अगली पेशी; देवेंद्र बोले- भाजपा विपक्ष को डराने और फंसाने की राजनीति कर रही
रायपुर, 6 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के कथित कोल लेवी घोटाले की जांच में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने सोमवार को रायपुर की विशेष अदालत में करीब 9,500 पन्नों की छठी पूरक चार्जशीट पेश की। इसमें भिलाई नगर से कांग्रेस विधायक देवेंद्र सिंह यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, पूर्व IAS अधिकारी जयप्रकाश मौर्य समेत कुल 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी ने जब्त डायरियों और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर कथित लेवी नेटवर्क में 477.56 करोड़ रुपए की आवक दर्ज होने का दावा किया है।
EOW की यह कार्रवाई उस मामले में हुई है, जिसमें जांच एजेंसियां वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन से कथित अवैध वसूली के नेटवर्क की जांच कर रही हैं। एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क में कारोबारी, बिचौलिए, अधिकारी और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की गई है। अलग-अलग जांच चरणों में इस मामले को करीब 500 से 570 करोड़ रुपए की कथित लेवी से जोड़ा गया है। हालांकि, अलग-अलग दस्तावेजों और जांच चरणों में रकम के आंकड़ों में अंतर रहा है।
चार्जशीट में 12 लोगों के नाम
छठी पूरक चार्जशीट में देवेंद्र यादव, रामगोपाल अग्रवाल, विनोद तिवारी, रामप्रताप सिंह, चंद्रदेव राय, जयप्रकाश मौर्य, पीयूष कुमार साहू, जोगेंद्र सिंह, अनुराग चौरसिया, दीपेश टांक, सुनील कुमार अग्रवाल और राहुल मिश्रा के नाम शामिल हैं। EOW ने इनके खिलाफ कथित लेन-देन, वसूली नेटवर्क, राजनीतिक गतिविधियों और संपत्तियों में निवेश से जुड़े दस्तावेजों तथा साक्ष्यों का उल्लेख किया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कोयला परिवहन पर कथित तौर पर 25 रुपए प्रति टन की लेवी वसूली जाती थी। इसके अलावा गारे-पलमा कोयले और लौह अयस्क-पैलेट परिवहन से जुड़े अलग-अलग मामलों में अधिक दरों पर वसूली किए जाने का भी आरोप है।
EOW के अनुसार, जुलाई 2020 में ई-परमिट व्यवस्था में बदलाव के बाद इस कथित वसूली तंत्र को संचालित करने की परिस्थितियां बनीं। जांच एजेंसी का आरोप है कि पहले निर्धारित भुगतान के बाद ई-परमिट जारी होने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत स्वचालित थी, लेकिन बदलाव के बाद जिला खनिज अधिकारी की भौतिक जांच और मैनुअल मंजूरी की व्यवस्था आई। आरोप है कि इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल परिवहनकर्ताओं से नकद रकम लेने के लिए किया गया और भुगतान नहीं करने पर परमिट की मंजूरी रोकने अथवा परिवहन प्रभावित करने का दबाव बनाया जाता था।
डायरियों में कूट शब्दों के जरिए लेन-देन का दावा
EOW के मुताबिक, कथित लेवी से जुड़े लेन-देन का हिसाब डायरियों और व्हाट्सऐप समूहों में रखा जाता था। जांच में पाल समूह, टुडे समूह, दुर्ग समूह और जुगनू समूह जैसे नामों से बने समूहों का उल्लेख सामने आया है।
एजेंसी का दावा है कि रकम और संबंधित लोगों की पहचान छिपाने के लिए ‘भवन’, ‘सी पार्टी’, ‘डी’, ‘आरपी’, ‘एमयू’, ‘नवाज’, ‘चंद्र’ और ‘मौर्य जी’ जैसे कूट शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इसी तरह रकम के लिए मिश्री, शक्कर और गुड़ तथा भुगतान या सामग्री से जुड़े संदेशों में गिट्ठी, रेती और मुरूम जैसे शब्दों के इस्तेमाल का दावा किया गया है।
रामगोपाल अग्रवाल से जुड़ी प्रविष्टियों में 104.20 करोड़ का दावा
EOW के अनुसार, रामगोपाल अग्रवाल से संबंधित बताई गई डायरियों में ‘भवन’ और ‘सी पार्टी’ नाम से 32 प्रविष्टियां मिली हैं, जिनमें कुल 104.20 करोड़ रुपए दर्ज होने का दावा किया गया है।
देवेंद्र यादव से जुड़ी प्रविष्टियों में करीब 3 करोड़ रुपए का उल्लेख होने की बात चार्जशीट में कही गई है। एजेंसी के अनुसार, इनमें खैरागढ़ विधानसभा उपचुनाव से संबंधित करीब 30 लाख रुपए सहित अन्य रकम का उल्लेख है। वहीं विनोद तिवारी से जुड़ी प्रविष्टियों में 2.12 करोड़, आरपी सिंह से संबंधित रिकॉर्ड में 2.93 करोड़ और पूर्व विधायक चंद्रदेव राय से जुड़ी प्रविष्टियों में 49.50 लाख रुपए का उल्लेख होने का दावा किया गया है।
चंद्रदेव राय के संबंध में जांच एजेंसी ने सोने के आभूषण से जुड़ी एक प्रविष्टि का भी उल्लेख किया है। इन सभी प्रविष्टियों की वास्तविक कानूनी स्थिति का निर्धारण अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद होगा।
IAS अधिकारी पर भी रकम लेने का आरोप
चार्जशीट में तत्कालीन खनिज एवं भूविज्ञान विभाग से जुड़े IAS अधिकारी जयप्रकाश मौर्य की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। EOW के अनुसार, उन पर पैलेट उद्योग से जुड़े कारोबारियों से प्रति टन कथित वसूली के निर्देश देने के एवज में करीब 1 करोड़ रुपए लेने का आरोप है। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य रकम की प्रविष्टियों का भी उल्लेख किया गया है।
वहीं जोगेंद्र सिंह से जुड़े रिकॉर्ड में कई फर्मों के माध्यम से कथित वित्तीय लेन-देन और बैंक प्रविष्टियों का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी ने इन लेन-देन को कथित नेटवर्क में रकम के प्रवाह और उसे अलग-अलग स्तरों पर इस्तेमाल किए जाने से जोड़कर देखा है।
रकम के इस्तेमाल को लेकर भी जांच एजेंसी के दावे
EOW के मुताबिक, कथित लेवी से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल चुनावी गतिविधियों, राजनीतिक कार्यालय से जुड़े भुगतान, अचल संपत्तियों की खरीद, कोल वाशरी, वाहन और निर्माण कार्यों में किए जाने की जांच की गई है।
एजेंसी का आरोप है कि रकम को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय कुछ कंपनियों और फर्मों के खातों में असुरक्षित ऋण के रूप में डालकर उसके वित्तीय स्रोत को वैध दिखाने की कोशिश की गई। इस तरह अलग-अलग खातों और संस्थाओं के बीच रकम स्थानांतरित कर उसकी कई परतें बनाए जाने की बात भी चार्जशीट में कही गई है।
कोर्ट में पहुंचे देवेंद्र यादव, बोले- भाजपा डराने और फंसाने की राजनीति कर रही
छठे पूरक चालान की सुनवाई से पहले कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव समेत नौ आरोपी अदालत पहुंचे। अदालत में पेशी के दौरान देवेंद्र यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया और संविधान पर भरोसा है। उन्होंने भाजपा पर विपक्षी नेताओं को डराने और झूठे मामलों में फंसाने की राजनीति करने का आरोप लगाया। यह देवेंद्र यादव का राजनीतिक आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
देवेंद्र यादव ने यह भी कहा कि उनकी आवाज दबाई नहीं जा सकती और वह न्यायिक प्रक्रिया का सामना करेंगे।
5 नवंबर को अगली पेशी
जिन आरोपियों की सोमवार को अदालत में उपस्थिति नहीं हुई, उनके लिए अदालत की ओर से अगली तारीख 5 नवंबर तय की गई है। देवेंद्र यादव और चंद्रदेव राय को लेकर भी अगली पेशी की प्रक्रिया शुरू की गई है। अदालत में पेश की गई चार्जशीट अभी साक्ष्य के न्यायिक परीक्षण की प्रक्रिया से गुजरेगी।
इस मामले में EOW ने अभी अंतिम चार्जशीट पेश नहीं की है। छठा पूरक चालान जांच के दौरान सामने आए नए दस्तावेजों और कथित वित्तीय लेन-देन को रिकॉर्ड पर लाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं और किसी आरोपी की दोषसिद्धि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी।

