अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से हिरासत में लिया गया था। एयर इंडिया ने विमान में पुलिस के प्रवेश को लेकर विमानन सुरक्षा नियामक BCAS से स्पष्टीकरण मांगा; पूर्व IPS अधिकारियों ने कानून और सुरक्षा नियमों के अलग-अलग पहलुओं पर रखी राय।

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास को शनिवार, 10 अक्टूबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान के भीतर से हिरासत में ले लिया गया। इस कार्रवाई के बाद सवाल उठे हैं कि पुलिस किन परिस्थितियों में किसी यात्री को विमान के अंदर से हिरासत में ले सकती है और क्या ऐसी कार्रवाई के लिए एयरलाइन या विमान के पायलट की अनुमति जरूरी होती है।
अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया ने विमानन सुरक्षा नियामक ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) से स्पष्टीकरण मांगा है कि पुलिस को विमान के भीतर प्रवेश कैसे दिया गया और संबंधित एयरलाइन को इस कार्रवाई की जानकारी क्यों नहीं दी गई। इस घटनाक्रम ने विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल और पुलिस की कानूनी शक्तियों के बीच तालमेल को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।
विमान के अंदर क्या हुआ था?
CJP नेताओं को दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होना था। शनिवार को मुंबई से दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें विमान के भीतर ही हिरासत में ले लिया गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में अभिजीत दीपके पुलिसकर्मियों से कहते दिखाई दिए कि वह कार्रवाई से डरते नहीं हैं और गिरफ्तारी के लिए तैयार हैं।
दीपके ने वीडियो में आरोप लगाया कि विमान के भीतर हिरासत में लिया जाना तानाशाही जैसा है। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उनके साथ मौजूद नेताओं ने महिला पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पुरुष पुलिसकर्मियों को बुलाने की मांग की थी।
दिल्ली पुलिस ने बाद में बताया कि तीनों नेताओं को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत एहतियातन हिरासत में लिया गया था। रविवार, 11 अक्टूबर को उन्हें दिल्ली कैंट स्थित विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। अदालत ने एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे आचरण की शर्त पर 50 हजार रुपये के सिक्योरिटी बॉन्ड के बाद उन्हें रिहा कर दिया।
क्या पुलिस विमान के अंदर जाकर हिरासत में ले सकती है?
पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, भारत के अधिकार क्षेत्र में पुलिस कानून के तहत गिरफ्तारी या अपराध की रोकथाम से जुड़ी कार्रवाई कर सकती है। पूर्व IPS अधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने BBC से बातचीत में कहा कि यदि विमान भारत की सीमा में है, तो केवल विमान के भीतर होने से पुलिस की कानूनी शक्तियां समाप्त नहीं हो जातीं।
पूर्व IPS अधिकारी अरुण कुमार ने भी कहा कि भारतीय क्षेत्र में संभावित अपराध को रोकने या कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस कदम उठा सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने की वैधता इस बात पर निर्भर करती है कि कार्रवाई किस कानूनी आधार पर की गई, संबंधित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं और विमानन सुरक्षा से जुड़े नियमों का अनुपालन किया गया या नहीं।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि पुलिस हर परिस्थिति में बिना किसी प्रक्रिया या अनुमति के विमान में प्रवेश कर सकती है। पुलिस की शक्तियों और विमान तक पहुंचने की सुरक्षा प्रक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है।
विमानन सुरक्षा नियम क्या कहते हैं?
नागर विमानन मंत्रालय ने विमानन सुरक्षा से संबंधित प्रावधानों के तहत Aircraft (Security) Rules, 2023 अधिसूचित किए हैं। इन नियमों में हवाई अड्डे और उसके नियंत्रित क्षेत्रों में प्रवेश, सुरक्षा व्यवस्था तथा विमानन सुरक्षा से जुड़े दायित्वों का उल्लेख है। नियम 22 में एयरोड्रोम में प्रवेश के लिए निर्धारित प्रवेश-पास और अधिकृत अनुमति से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
हालांकि, हवाई अड्डे के किसी हिस्से में प्रवेश की अनुमति और विमान के भीतर किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने की प्रक्रिया एक ही सवाल नहीं हैं। किसी विशेष मामले में यह देखना जरूरी होता है कि विमान किस स्थिति में था, सुरक्षा एजेंसियों को किस स्तर की अनुमति मिली थी, कार्रवाई किसके समन्वय से हुई और लागू नियमों का पालन किया गया या नहीं।
विमान के कमांडिंग पायलट की भूमिका पर भी चर्चा
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में एक एयरलाइन अधिकारी के हवाले से कहा गया कि उड़ान से पहले विमान के दरवाजे बंद होने और पार्किंग के बाद दरवाजे खुलने के बीच विमान की परिचालन स्थिति को लेकर विशेष प्रक्रियाएं लागू होती हैं। अधिकारी के अनुसार, इस दौरान विमान के कमांडिंग पायलट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और दरवाजे खुलने के बाद गंभीर मामलों में सुरक्षा एजेंसियां विमान में प्रवेश कर सकती हैं।
हालांकि, यह किसी अधिकारी की मीडिया को दी गई जानकारी है, न कि इस मामले में लागू सभी नियमों की संपूर्ण कानूनी व्याख्या। विमान में पुलिस के प्रवेश और हिरासत की वैधता का आकलन करने के लिए संबंधित सुरक्षा नियमों, विमान की स्थिति और कार्रवाई के दस्तावेजों को देखना जरूरी होगा।
एयर इंडिया द्वारा BCAS से स्पष्टीकरण मांगने का मुद्दा इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि इस कार्रवाई के दौरान एयरलाइन, हवाई अड्डा सुरक्षा और पुलिस के बीच किस तरह का समन्वय हुआ था।
क्या पुलिस एयरलाइन से यात्रियों की सूची मांग सकती है?
इस मामले में यह सवाल भी उठा कि क्या जांच एजेंसियां किसी उड़ान में यात्रा कर रहे यात्रियों की जानकारी एयरलाइन से मांग सकती हैं। पूर्व IPS अधिकारी अरुण कुमार के अनुसार, जांच या अपराध की रोकथाम के लिए जरूरत पड़ने पर एजेंसियां ऐसी जानकारी मांग सकती हैं। उन्होंने कहा कि हर मामले में FIR दर्ज होना ही पूर्वनिवारक कार्रवाई के लिए अनिवार्य शर्त नहीं है।
हालांकि, यात्रियों की जानकारी मांगने की शक्ति और उस जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने की वैधता अलग-अलग कानूनी प्रश्न हैं। संबंधित कार्रवाई का आधार, उद्देश्य और प्रक्रिया कानून के अनुरूप होना जरूरी है।
क्या महिला पुलिसकर्मी पुरुषों को हिरासत में ले सकती हैं?
CJP नेताओं ने हिरासत के समय महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए थे। पूर्व IPS अधिकारियों की राय के अनुसार, पुलिस की कानूनी शक्तियां केवल अधिकारी के महिला या पुरुष होने के आधार पर सीमित नहीं होतीं। किसी मामले में महिला पुलिस अधिकारी भी पुरुष आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है या उससे पूछताछ कर सकती है, बशर्ते कार्रवाई लागू कानून और प्रक्रियाओं के अनुरूप हो।
महिलाओं की गिरफ्तारी, तलाशी और हिरासत के दौरान गरिमा तथा सुरक्षा से संबंधित अलग-अलग कानूनी सुरक्षा उपाय भी लागू हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष कार्रवाई का मूल्यांकन उसके तथ्यों और संबंधित नियमों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
हिरासत की वैधता और सुरक्षा प्रक्रिया पर नजर
CJP नेताओं को विमान के भीतर से हिरासत में लेने की कार्रवाई अब दो अलग पहलुओं पर चर्चा का विषय है। पहला, पुलिस ने BNSS के तहत एहतियातन हिरासत की कार्रवाई किस आधार पर की। दूसरा, विमान में पुलिस के प्रवेश और कार्रवाई के दौरान विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किस तरह हुआ।
तीनों नेताओं को मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद रिहा किया जा चुका है। एयर इंडिया की ओर से BCAS से स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद विमान में प्रवेश और हिरासत की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि पुलिस ने विमानन नियमों का उल्लंघन किया या कार्रवाई पूरी तरह नियमों के अनुरूप थी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों का जवाब और आधिकारिक दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।

