अमेरिका में मृत्युदंड की कोशिश नाकाम, दो घातक इंजेक्शन के बाद भी जिंदा रही महिला कैदी

अमेरिका के टेनेसी में मृत्युदंड की कोशिश के बाद क्रिस्टा पाइक का मामला
टेनेसी में क्रिस्टा पाइक को घातक इंजेक्शन से मृत्युदंड देने की कोशिश नाकाम रही।

टेनेसी में क्रिस्टा पाइक को पेंटोबार्बिटल की दो खुराक देने के बाद भी मौत नहीं हुई। अस्पताल में जिंदगी बचाने की कोशिश जारी; घटना के बाद राज्यपाल ने 2026 की बाकी सभी फांसी पर रोक लगाई और स्वतंत्र जांच के आदेश दिए

नैशविल: अमेरिका के टेनेसी राज्य में मृत्युदंड देने की एक कोशिश उस समय नाकाम हो गई, जब 50 वर्षीय क्रिस्टा पाइक को घातक इंजेक्शन की दो खुराक दिए जाने के बाद भी उनकी सांसें चलती रहीं। पाइक को 1995 में 19 वर्षीय कॉलिन स्लेमर की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। अगर उनकी फांसी सफल होती, तो वह करीब दो सदियों में टेनेसी में मृत्युदंड पाने वाली पहली महिला होतीं।

घटना 30 सितंबर 2026 को नैशविल स्थित रिवरबेंड मैक्सिमम सिक्योरिटी इंस्टीट्यूशन में हुई। पाइक को सुबह 10 बजे घातक इंजेक्शन से मृत्युदंड दिया जाना था। हालांकि, फांसी के निर्धारित समय से कुछ घंटे पहले छठी सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने उनकी फांसी पर रोक लगा दी। इसके बाद अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने उस रोक को हटा दिया और टेनेसी को फांसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति मिल गई।

शाम को अधिकारियों ने पाइक को मृत्युदंड देने की प्रक्रिया शुरू की। इसके लिए पेंटोबार्बिटल का इस्तेमाल किया गया। टेनेसी के सुधार विभाग के मुताबिक अधिकारियों ने राज्य के निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की। विभाग ने बाद में बताया कि पाइक को जेल से बाहर एक चिकित्सा केंद्र ले जाया गया।

अमेरिका में फांसी की कोशिश नाकाम, दो इंजेक्शन के बाद भी जिंदा रही महिला कैदी

पहली खुराक के बाद भी पाइक होश में रहीं

मीडिया को फांसी की प्रक्रिया देखने के लिए एक अलग गवाह कक्ष में रखा गया था। वहां मौजूद पत्रकारों के मुताबिक पाइक को बिस्तर पर बांधा गया था। पहली खुराक दिए जाने के बाद भी वह अपेक्षित तरीके से बेहोश नहीं हुईं।

गवाहों के मुताबिक उन्होंने अपना सिर उठाया और अपने हाथ में महसूस हो रही चीज के बारे में जेल अधिकारियों से सवाल किया। इसके बाद भी उनकी सांसें चलती रहीं।

करीब एक घंटे बाद पाइक को पेंटोबार्बिटल की दूसरी खुराक दी गई। इसके बाद पर्दा बंद कर दिया गया। गवाहों ने बताया कि कुछ समय तक माइक्रोफोन के जरिए उनकी सांसों और खर्राटों की आवाज सुनाई देती रही। बाद में माइक्रोफोन का संपर्क काट दिया गया और मीडिया गवाहों को वहां से बाहर ले जाया गया।

पाइक के वकीलों ने बाद में अदालत में दावा किया कि घातक दवा ठीक तरह से रक्तप्रवाह में नहीं पहुंची और उनकी बांहों में गंभीर सूजन और जलने जैसी चोटें आईं। वकीलों के अनुसार पाइक की नसों तक पहुंचने में पहले से कठिनाई थी और उन्हें एक रक्त संबंधी बीमारी भी थी। हालांकि, इन दावों की विस्तृत जांच अभी बाकी है।

घटना के बाद पाइक को अस्पताल ले जाया गया, जहां वह गंभीर हालत में जीवन रक्षक उपचार पर हैं। उनके वकीलों ने कहा है कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है और घटना से जुड़े चिकित्सकीय तथा कानूनी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

पेंटोबार्बिटल क्या है?

पेंटोबार्बिटल बार्बिट्यूरेट समूह की दवा है। इसका इस्तेमाल चिकित्सा में केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की गतिविधि को दबाने के लिए किया जाता है। खुराक के आधार पर यह नींद या गहरी बेहोशी पैदा कर सकती है और अधिक मात्रा में सांस तथा हृदय संबंधी गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

अमेरिका में कुछ राज्यों ने इसका इस्तेमाल घातक इंजेक्शन के लिए किया है। लेकिन पेंटोबार्बिटल से मृत्युदंड की प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से कानूनी और चिकित्सकीय विवाद भी रहे हैं।

क्रिस्टा पाइक के मामले में यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि निर्धारित घातक दवा की दो खुराक देने के बाद भी उनकी मृत्यु नहीं हुई।

मृत्युदंड की नाकाम कोशिश के बाद पाइक को इलाज के लिए ले जाता जेल प्रशासनतस्वीर: George Walker IV/AP Photo/dpa/picture alliance

नस में दवा पहुंचने को लेकर उठा सवाल

पाइक के वकीलों ने आरोप लगाया है कि दवा सही तरीके से नस में नहीं पहुंची और उसका कुछ हिस्सा आसपास के ऊतकों में चला गया। उनका कहना है कि इससे पाइक को गंभीर शारीरिक पीड़ा और चोट पहुंची।

मृत्युदंड की प्रक्रिया पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, घातक इंजेक्शन में नस तक सही पहुंच बनाना एक महत्वपूर्ण चरण है। अतीत में भी अमेरिका में कुछ फांसी की कोशिशें नसों तक पहुंच बनाने में कठिनाई के कारण लंबे समय तक चली हैं। हालांकि पाइक का मामला अलग इसलिए माना जा रहा है क्योंकि दो खुराक दिए जाने के बाद भी वह काफी समय तक जीवित रहीं। डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर ने इसे टेनेसी में हाल की गंभीर रूप से विफल हुई फांसी की घटनाओं में शामिल किया है।

1995 में हत्याकांड के वक्त 18 साल की थी क्रिस्टा पाइकतस्वीर: J. Miles Cary/Knoxville News Sentinel/USA TODAY NETWORK/REUTERS

पाइक को मौत की सजा क्यों मिली थी?

क्रिस्टा पाइक को 1995 में हुई 19 वर्षीय कॉलिन स्लेमर की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। घटना के समय पाइक 18 वर्ष की थीं।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक पाइक और उनके तत्कालीन 17 वर्षीय प्रेमी ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर स्लेमर को टेनेसी के एक कैंपसाइट पर बुलाया था। वहां उसकी हत्या की गई। अभियोजन ने अदालत में हत्या के पीछे ईर्ष्या को एक कारण बताया था।

1996 में अदालत ने पाइक को मौत की सजा सुनाई, जबकि उनके नाबालिग प्रेमी को आजीवन कारावास की सजा मिली।

पाइक के मामले में बाद के वर्षों में उनके बचपन के कथित शोषण, उपेक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को लेकर भी कानूनी दलीलें दी गईं। उनकी कानूनी टीम ने कहा था कि मूल मुकदमे में सजा तय करते समय इन परिस्थितियों को पर्याप्त रूप से सामने नहीं रखा गया। हालांकि अदालतों ने उनकी फांसी रोकने के लिए इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

अब आगे क्या होगा?

फांसी की कोशिश नाकाम होने के बाद पाइक की कानूनी टीम ने तत्काल अदालतों का रुख किया है। उनका कहना है कि दो घातक इंजेक्शन दिए जाने के बावजूद जीवित बची पाइक को दोबारा उसी तरीके से मौत देने की कोशिश उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगी।

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने भी अमेरिका से अपील की है कि पाइक को दोबारा मृत्युदंड देने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र ने घटना के बाद मृत्युदंड और उसके तरीकों को लेकर मानवाधिकार संबंधी चिंताओं को फिर सामने रखा है।

इस बीच टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने 2026 में होने वाली बाकी सभी निर्धारित फांसियों को रोक दिया है और घटना की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं। इसका मतलब यह है कि राज्य अब अपने मौजूदा मृत्युदंड प्रोटोकॉल और 30 सितंबर की घटना में वास्तव में क्या हुआ, इसकी समीक्षा करेगा।

घटना ने कई सवाल छोड़ दिए

क्रिस्टा पाइक का मामला केवल एक फांसी के असफल होने तक सीमित नहीं है। इसमें यह सवाल भी शामिल है कि घातक इंजेक्शन की प्रक्रिया कितनी विश्वसनीय है, चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन कैसे सुनिश्चित किया जाता है और यदि पहली कोशिश नाकाम हो जाए तो राज्य के पास आगे क्या कानूनी और चिकित्सकीय विकल्प हैं।

फिलहाल पाइक की मौत नहीं हुई है और वह अस्पताल में गंभीर हालत में उपचाराधीन हैं। वहीं, टेनेसी सरकार की जांच और अदालतों में चल रही कानूनी प्रक्रिया यह तय करेगी कि इस घटना के बाद उनके मामले में आगे क्या होगा।

नतीजा: फांसी की कोशिश सफल नहीं हुई; पाइक को अस्पताल ले जाया गया

बाद की कार्रवाई: टेनेसी ने 2026 की बाकी निर्धारित फांसियों पर रोक लगाई और स्वतंत्र समीक्षा शुरू की।

Nagendra sahu
Nagendra sahu
नागेन्द्र साहू छत्तीसगढ़ के भिलाई से हैं। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक (BJMC) और वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (MJ) की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वीडियो एडिटिंग ( Ex- भिलाई Times Sr Editor ) और डिजिटल कंटेंट में भी विशेषज्ञता के साथ वर्तमान में रेखांकित न्यूज़ का संचालन कर रहे हैं।
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