पूर्व मंत्री ने मतदाता सूची में 24.99 लाख मतदाताओं की कमी पर उठाए सवाल, 33 जिलों में 1,08,807 नाम कटने का दिया हवाला; निर्वाचन आयोग से कार्रवाई और जवाब की मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता नजर आ रहा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले Form-7 के कथित दुरुपयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग से Form-7 के जरिए दर्ज आपत्तियों, उनके सत्यापन और मतदाता सूची से नाम हटाने की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
मोहम्मद अकबर ने दावा किया कि वर्ष 2023 से अब तक छत्तीसगढ़ की आबादी बढ़ने के बावजूद मतदाता सूची में लगभग 24 लाख 99 हजार मतदाताओं की कमी आई है। उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कम होने के पीछे क्या कारण हैं और कितने नाम Form-7 के आधार पर हटाए गए हैं।
कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि यदि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर गलत जानकारी या झूठी घोषणा देकर किसी मतदाता का नाम कटवाने की कोशिश की है, तो उसके खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इस धारा में एक वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों का प्रावधान है।
24.99 लाख मतदाताओं की कमी पर सवाल
मोहम्मद अकबर ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2023 से अब तक राज्य की आबादी में वृद्धि हुई है, लेकिन मतदाता सूची में लगभग 24,99,000 मतदाता कम हो गए हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग से इस अंतर का कारण स्पष्ट करने की मांग की।
उनका कहना है कि मतदाता सूची में इतनी बड़ी कमी को सामान्य प्रक्रिया मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह जानना जरूरी है कि कितने नाम मृत्यु, स्थायी रूप से स्थानांतरण, दोहरी प्रविष्टि या अन्य वैध कारणों से हटाए गए और कितने नामों को Form-7 के माध्यम से दर्ज आपत्तियों के आधार पर हटाया गया।
कांग्रेस नेता ने आयोग से यह भी पूछा कि क्या सभी मामलों में निर्धारित नियमों का पालन किया गया और क्या प्रभावित मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिला।
Form-7 के दुरुपयोग का आरोप, प्रक्रिया की जांच की मांग
मतदाता सूची में किसी नाम को हटाने के लिए Form-7 के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराने की व्यवस्था है। मोहम्मद अकबर का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में SIR के दौरान इस प्रक्रिया का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग कर मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा कि केवल Form-7 दाखिल कर देने से किसी मतदाता का नाम स्वतः मतदाता सूची से नहीं हट जाता। आपत्ति की जांच और निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
अकबर के मुताबिक, निर्वाचन अधिकारियों को आपत्ति की वैधता से संतुष्ट होना चाहिए और संबंधित मतदाता को निर्णय से पहले अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आपत्तियां दर्ज कराने वाले लोगों की पहचान और उनके दावों की सत्यता की जांच किस तरह की गई।
इस मामले में प्रमुख सवाल यह है कि क्या सभी आपत्तियों की निष्पक्ष जांच की गई, क्या संबंधित मतदाताओं को सुनवाई का अवसर मिला और क्या नाम हटाने के आदेश निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप पारित किए गए।
33 जिलों में 1,08,807 नाम कटने का दावा
मोहम्मद अकबर ने राज्य के 33 जिलों में कुल 1,08,807 मतदाताओं के नाम काटे जाने का आंकड़ा सामने रखा। उन्होंने जिला स्तर पर नाम हटाए जाने के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए निर्वाचन आयोग से इनकी प्रक्रिया और आधार स्पष्ट करने को कहा।
उनके द्वारा बताए गए प्रमुख जिलों के आंकड़े इस प्रकार हैं:
| जिला | नाम हटाए जाने की बताई गई संख्या |
| रायपुर | 31,028 |
| कोरबा | 15,187 |
| दुर्ग | 7,209 |
| बालोद | 3,903 |
| कबीरधाम | 2,234 |
| बलौदाबाजार-भाटापारा | 2,662 |
ये आंकड़े मोहम्मद अकबर द्वारा दिए गए विवरण पर आधारित हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि और यह स्पष्ट होना अभी बाकी है कि इनमें से कितने नाम Form-7 के आधार पर हटाए गए।
कांग्रेस नेता ने निर्वाचन आयोग से सवाल किया कि कुल 1,08,807 हटाए गए नामों में Form-7 से जुड़े मामलों की संख्या कितनी है। कितनी आपत्तियों को सही पाया गया और कितने मामलों में शिकायतें गलत या फर्जी साबित हुईं?
झूठी शिकायत पर क्या है कानूनी प्रावधान?
मोहम्मद अकबर ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता सूची से संबंधित किसी मामले में जानबूझकर गलत कथन या झूठी घोषणा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इस धारा के तहत दोष सिद्ध होने पर एक वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों का प्रावधान है।
उन्होंने निर्वाचन आयोग से पूछा कि यदि Form-7 के जरिए झूठी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं, तो ऐसे मामलों की पहचान के लिए क्या कदम उठाए गए? कितने मामलों में आपत्तिकर्ताओं के बयान दर्ज किए गए और कितने मामलों में कानून के तहत कार्रवाई की गई?
कांग्रेस और भाजपा के बीच जीत-हार के अंतर से की तुलना
मोहम्मद अकबर ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और भाजपा के बीच चुनावी जीत-हार के अंतर का उल्लेख करते हुए मतदाता सूची में आई कमी पर चिंता जताई।
उन्होंने दावा किया कि दोनों दलों के बीच जीत-हार का अंतर लगभग 6 लाख 32 हजार वोटों का रहा, जबकि वर्ष 2023 से अब तक मतदाताओं की संख्या में करीब 24 लाख 99 हजार की कमी बताई जा रही है।
उनका तर्क है कि मतदाताओं की संख्या में यह अंतर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आयोग से इस अंतर का तथ्यात्मक स्पष्टीकरण देने की मांग की।
हालांकि, मतदाता सूची में कमी और चुनावी जीत-हार के अंतर की तुलना अपने आप में किसी चुनावी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है। इसके लिए मतदाता सूची के आधिकारिक आंकड़ों, नाम हटाए जाने के कारणों और संबंधित चुनावों के परिणामों का अलग-अलग विश्लेषण आवश्यक है।
पुरानी सूची बहाल करने या हटाए गए नाम जोड़ने की मांग
मोहम्मद अकबर ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम फिर से जोड़ने अथवा पुरानी मतदाता सूची बहाल करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है कि कोई भी पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न हो। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो उसे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत दोबारा शामिल करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने आयोग से पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मतदाताओं की शिकायतों का समयबद्ध समाधान करने की अपील की।
निर्वाचन आयोग से इन सवालों के जवाब मांगे
मोहम्मद अकबर ने मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग से कई सवालों पर जवाब मांगा है:
– वर्ष 2023 से अब तक मतदाताओं की संख्या में लगभग 24.99 लाख की कमी के क्या कारण हैं?
– 33 जिलों में बताए गए 1,08,807 हटाए गए नामों में से कितने Form-7 के आधार पर हटाए गए?
– क्या आपत्तिकर्ताओं के बयान और उनकी शिकायतों की वैधता का सत्यापन किया गया?
– क्या जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए, उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिला?
– कितनी शिकायतें झूठी पाई गईं और कितने मामलों में आपत्तिकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई?
– क्या जानबूझकर गलत घोषणा करने वालों के विरुद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई हुई?
– गलत तरीके से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
इन सवालों के जवाब से SIR के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया, नाम हटाने के आधार और शिकायतों के निपटारे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
पारदर्शिता और मताधिकार का सवाल
छत्तीसगढ़ में SIR के दौरान Form-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर मोहम्मद अकबर की मांग ने मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस को फिर सामने ला दिया है।
एक ओर निर्वाचन आयोग के लिए मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित रखना महत्वपूर्ण है, वहीं दूसरी ओर यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे। यदि किसी मामले में नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई जरूरी होगी।
फिलहाल, मोहम्मद अकबर ने आंकड़ों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। अब आयोग का आधिकारिक पक्ष, Form-7 से संबंधित जिला-वार आंकड़े और नाम हटाने की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज इस विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

