किसान नेता एवं जनपद सदस्य ढालेश साहू ने धान खरीदी की तैयारी समय रहते पूरी करने की मांग की। प्रस्तावित खरीदी अवधि में छुट्टियों और शनिवार को खरीदी बंद रहने की आशंका के बीच पटवारी संघ की पीवी ऐप को लेकर जारी हड़ताल से किसानों के पंजीयन और राजस्व संबंधी काम प्रभावित होने की चिंता।

दुर्ग, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की धान खरीदी को लेकर तैयारियां शुरू होने के बीच राज्य सरकार के सामने समय पर लक्ष्य पूरा करने की चुनौती खड़ी हो सकती है। किसान नेता एवं जनपद सदस्य ढालेश साहू ने सरकार से मांग की है कि प्रस्तावित खरीदी अवधि में उपलब्ध कार्यदिवसों की समीक्षा कर अभी से ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने आशंका जताई कि 16 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक की प्रस्तावित अवधि में शनिवार, रविवार और अन्य शासकीय अवकाशों के कारण खरीदी के लिए सीमित दिन ही उपलब्ध रह सकते हैं।
इस बीच, छत्तीसगढ़ में पटवारी संघ की पीवी ऐप से जुड़े मुद्दे पर जारी हड़ताल भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। पटवारी राजस्व और भूमि संबंधी कई कामों से जुड़े होते हैं। यदि हड़ताल जारी रहती है और इन सेवाओं से संबंधित काम लंबित होते हैं, तो धान खरीदी की तैयारी के दौरान किसानों को अतिरिक्त दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसे में धान खरीदी की समय-सीमा, केंद्रों की क्षमता, किसानों के पंजीयन और राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं को सुचारु रखने की व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी होगा। हालांकि, पटवारियों की हड़ताल के कारण धान खरीदी कितनी प्रभावित होगी, यह संबंधित सेवाओं में वास्तविक बाधा और सरकार की वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
77 दिनों की अवधि में 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी की चुनौती
ढालेश साहू के मुताबिक, आगामी खरीफ विपणन वर्ष के लिए प्रस्तावित धान खरीदी अवधि 16 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक कुल 77 दिनों की है। उनका कहना है कि शनिवार को खरीदी बंद रहने, रविवार और अन्य संभावित शासकीय अवकाशों को जोड़ने पर करीब 27 दिन प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में लगभग 50 कार्यदिवसों में 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य पूरा करना चुनौतीपूर्ण होगा।
उन्होंने राज्य सरकार से उपलब्ध कार्यदिवसों और प्रतिदिन की खरीदी क्षमता का आकलन कर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि निर्धारित समय में पंजीकृत किसानों की उपज खरीदी जा सके।
पटवारी संघ की पीवी ऐप को लेकर हड़ताल से बढ़ सकती है परेशानी
धान खरीदी की तैयारियों के बीच पटवारी संघ की पीवी ऐप को लेकर जारी हड़ताल भी चिंता का विषय बन सकती है। प्रदेशभर में पटवारियों के हड़ताल पर रहने से राजस्व विभाग से जुड़े काम प्रभावित होने की आशंका है। इसका असर उन किसानों पर पड़ सकता है जिन्हें भूमि संबंधी जानकारी, रिकॉर्ड में सुधार या अन्य राजस्व सेवाओं की जरूरत है।
धान खरीदी की प्रक्रिया में किसान पंजीयन और भूमि संबंधी रिकॉर्ड की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यदि जरूरी राजस्व कार्य समय पर पूरे नहीं होते, तो कुछ किसानों को पंजीयन या रिकॉर्ड संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे खरीदी शुरू होने के समय केंद्रों पर दबाव बढ़ने की आशंका भी रहेगी।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पटवारियों की हड़ताल से धान खरीदी सीधे कितनी प्रभावित होगी, इसका आकलन संबंधित विभागों के कामकाज और उपलब्ध वैकल्पिक व्यवस्थाओं के आधार पर ही किया जा सकता है। राज्य सरकार को हड़ताल के समाधान के साथ-साथ किसानों के जरूरी राजस्व कार्यों के लिए भी व्यवस्था करनी होगी।
टोकन, बारदाने और तौल में देरी से बचाने की मांग
ढालेश साहू ने कहा कि धान खरीदी में देरी या अव्यवस्था का सीधा असर किसानों पर पड़ता है। टोकन नहीं मिलने, खरीदी केंद्रों में भीड़, सर्वर की समस्या, बारदाने की कमी, तौल में देरी और धान के उठाव में परेशानी के कारण किसानों को अनावश्यक इंतजार करना पड़ता है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि खरीदी शुरू होने से पहले सभी केंद्रों में पर्याप्त बारदाने, तौल उपकरण, हमाल, भंडारण और परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, सर्वर संबंधी तकनीकी समस्याओं से निपटने के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए जाएं, ताकि किसानों को बार-बार खरीदी केंद्रों के चक्कर न लगाने पड़ें।
शनिवार को भी खरीदी और अवधि बढ़ाने पर विचार करने की मांग
ढालेश साहू ने राज्य सरकार से धान खरीदी की अवधि और उपलब्ध कार्यदिवसों की समीक्षा करने की मांग की है। उनके मुताबिक, सरकार को जरूरत के अनुसार शनिवार को भी खरीदी केंद्र संचालित करने और खरीदी की समय-सीमा बढ़ाने जैसे विकल्पों पर विचार करना चाहिए।
उन्होंने पर्याप्त टोकन जारी करने, किसानों की सुविधाओं को प्राथमिकता देने और खरीदी केंद्रों की क्षमता के अनुरूप व्यवस्था करने पर जोर दिया। उनका कहना है कि यदि समय रहते योजना नहीं बनाई गई, तो सीमित कार्यदिवसों में निर्धारित लक्ष्य हासिल करने का दबाव किसानों और खरीदी व्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है।
किसानों की सुविधा और समय पर भुगतान व्यवस्था पर जोर
ढालेश साहू ने कहा कि धान खरीदी केवल सरकारी लक्ष्य हासिल करने का विषय नहीं है, बल्कि प्रदेश के लाखों किसानों की मेहनत और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी प्रक्रिया है। इसलिए सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी पंजीकृत किसान अपनी उपज बेचने से वंचित न रहे।
धान खरीदी की समय-सीमा, पटवारियों की हड़ताल और राजस्व संबंधी कामकाज की संभावित बाधाओं को देखते हुए सरकार के सामने तैयारी समय पर पूरी करने की चुनौती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार खरीदी केंद्रों की व्यवस्था मजबूत करने, पटवारी संघ की हड़ताल से उत्पन्न समस्याओं का समाधान करने और किसानों के लंबित काम पूरे कराने के लिए क्या कदम उठाती है।

