
रायपुर | स्वास्थ्य विभाग | मेडिकल कॉलेजों में भर्ती
छत्तीसगढ़ में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के लिए चार असिस्टेंट प्रोफेसरों का चयन तो कर लिया, लेकिन नियुक्ति आदेश जारी करने की प्रक्रिया में चूक के कारण इन डॉक्टरों की जॉइनिंग अटकी हुई है। इंटरव्यू हुए करीब साढ़े तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन राज्य शासन से नियुक्ति आदेश नहीं आने के कारण संबंधित डॉक्टर अब तक कॉलेज में सेवा शुरू नहीं कर पाए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, चयनित डॉक्टरों में कार्डियक एनेस्थेटिस्ट, एनेस्थेटिस्ट और पीडियाट्रिक सर्जन जैसे विशेषज्ञ शामिल हैं। नियुक्ति में देरी का असर केवल डॉक्टरों के करियर पर ही नहीं, बल्कि अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है।
चयन सूची जारी हुई, लेकिन नियुक्ति आदेश का इंतजार
रिपोर्ट के मुताबिक, CGPSC ने 14 जुलाई को एनेस्थीसिया विभाग के लिए कार्डियक एनेस्थेटिस्ट के चयन की सूची जारी की थी। इसके बाद चयन प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ी सामने आने की बात कही गई।
रिपोर्ट में उल्लेख है कि आयोग ने एक ऐसे डॉक्टर का चयन कर लिया था, जिसकी संबंधित पद के लिए आवश्यक योग्यता पर सवाल उठे। बाद में आयोग ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए दोबारा इंटरव्यू कराने की प्रक्रिया अपनाई। हालांकि, चयन के बाद भी नियुक्ति आदेश जारी नहीं होने से संबंधित पदों पर जॉइनिंग नहीं हो सकी।
तकनीकी गलती सुधारने के बाद भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी
रिपोर्ट में कार्डियक एनेस्थीसिया के पद से जुड़े चयन में तकनीकी त्रुटि का उल्लेख किया गया है। इसमें डॉ. अनिल गुप्ता और डॉ. संकल्प दीवान के नाम सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रारंभिक चयन के बाद दोबारा इंटरव्यू की प्रक्रिया अपनाई गई और योग्यता के आधार पर चयन में सुधार किया गया।
हालांकि, चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद नियुक्ति आदेश जारी नहीं होने से मामला अटका हुआ है। इस देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने और पूरी प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है।
CGPSC ने चयन सूची शासन को नहीं भेजी?
रिपोर्ट में चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) के अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि CGPSC ने चयनित डॉक्टरों की सूची राज्य शासन को नहीं भेजी है। इसी वजह से शासन की ओर से नियुक्ति आदेश जारी नहीं हो पाए हैं।
यदि चयन सूची भेजने की प्रक्रिया ही लंबित है, तो सवाल उठता है कि इंटरव्यू और चयन के बाद फाइल आगे बढ़ाने में इतनी देरी क्यों हुई।
बच्चों के इलाज पर भी पड़ सकता है असर
रिपोर्ट में पीडियाट्रिशियन यानी बाल रोग विशेषज्ञ के पद पर नियुक्ति में देरी का मुद्दा भी उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि संबंधित संस्थान में बाल रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता की जरूरत है और नियुक्ति में देरी से बच्चों के इलाज पर असर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, पीडियाट्रिक सर्जन का पद डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल से संबंधित है, जबकि जनरल मेडिसिन के असिस्टेंट प्रोफेसर को भी मेडिकल कॉलेज में नियुक्त किया जाना है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी होने पर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ सकता है या उपचार के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
शासन और आयोग से उठते सवाल
इस मामले में तीन प्रमुख सवाल सामने आते हैं:
- चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्ति आदेश जारी करने में देरी क्यों हुई?
- चयन सूची राज्य शासन को भेजने की जिम्मेदारी किस स्तर पर लंबित है?
- विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति में देरी से मरीजों को होने वाली परेशानी दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
इन सवालों पर CGPSC, चिकित्सा शिक्षा संचालनालय और राज्य शासन का आधिकारिक जवाब सामने आना जरूरी है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि देरी तकनीकी प्रक्रिया, दस्तावेजों या प्रशासनिक स्तर पर किस कारण से हुई।
छत्तीसगढ़ में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति से जुड़ा यह मामला भर्ती प्रक्रिया की समयबद्धता और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठाता है। रिपोर्ट के अनुसार, चार डॉक्टरों के चयन के बाद भी नियुक्ति आदेश जारी नहीं हो सके हैं। अब संबंधित विभागों को चयन सूची की स्थिति स्पष्ट कर नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी करने की जरूरत है, ताकि डॉक्टरों की सेवाएं मरीजों को मिल सकें।

