लोहा चोरी मामले में HTC सुपरवाइजर अखिलेश तिवारी को अग्रिम जमानत, कोर्ट ने कहा- प्रत्यक्ष संलिप्तता का स्पष्ट तथ्य नहीं

भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट (BSP) से स्क्रैप परिवहन के दौरान कथित लोहा चोरी से जुड़े मामले में हैवी ट्रांसपोर्ट कंपनी (HTC) के सुपरवाइजर अखिलेश कुमार तिवारी को अग्रिम जमानत मिल गई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भिलाई-3 भानु प्रताप सिंह त्यागी ने 23 सितंबर 2026 को अग्रिम जमानत आवेदन पर आदेश पारित किया।

कोर्ट ने केस डायरी और पुलिस के प्रतिवेदन सहित उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद माना कि फिलहाल अखिलेश तिवारी की अपराध में प्रत्यक्ष संलिप्तता का कोई स्पष्ट तथ्य सामने नहीं आया है। हालांकि पुलिस उनकी भूमिका की जांच कर रही है।

यह मामला थाना पुरानी भिलाई के अपराध क्रमांक 277/2026 से संबंधित है।

HTC में सुपरवाइजर हैं अखिलेश तिवारी

पुलिस के प्रतिवेदन के मुताबिक, अखिलेश कुमार तिवारी HTC में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हैं। उनके अधीन आने वाले कुछ वाहन भिलाई स्टील प्लांट में स्क्रैप परिवहन के लिए लगाए गए थे।

जांच के दौरान पुलिस को ऐसे लोगों के संपर्क में रहने की जानकारी भी मिली, जिनका संबंध इस मामले से बताया गया है। पुलिस ने अखिलेश तिवारी का बयान भी दर्ज किया है।

हालांकि पुलिस के अनुसार, अब तक उनके खिलाफ अपराध में प्रत्यक्ष संलिप्तता अथवा अन्य आवश्यक अभियोजन योग्य साक्ष्य पर्याप्त रूप से स्थापित नहीं हुए हैं। इसी कारण उन्हें इस स्तर पर मामले में गिरफ्तार या आरोपी के रूप में नामांकित नहीं किया गया था।

पुलिस कर रही भूमिका की जांच

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि अखिलेश तिवारी की भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है। इसमें संबंधित लोगों से उनके संपर्क, वाहनों के संचालन और निगरानी से जुड़े पहलुओं के अलावा तकनीकी एवं दस्तावेजी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि यदि जांच के दौरान पर्याप्त और विधिसम्मत साक्ष्य सामने आते हैं, तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त लोक अभियोजक ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए आवेदन खारिज करने की मांग की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने केस डायरी, पुलिस के अंतिम प्रतिवेदन और संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया।

सहआरोपियों को मिल चुकी है जमानत

अखिलेश तिवारी की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि इसी मामले में कई अन्य आरोपियों को पहले ही हाईकोर्ट और सत्र न्यायालय से जमानत मिल चुकी है।

अदालत के आदेश में दर्ज जानकारी के अनुसार संजय सिंह, हिमांशु खंडेलवाल, अभय सिंह, हिमांशु भूषण मलिक, उपेंद्र उर्फ पिंटू ओझा और मनोज कुमार देवांगन को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है।

इसके अलावा गिरीश खंडेलवाल, शिव कुमार कौटियार और अन्य सहआरोपियों को भी अलग-अलग न्यायिक आदेशों के जरिए अग्रिम अथवा नियमित जमानत का लाभ मिलने की बात आदेश में दर्ज है।

अखिलेश तिवारी की ओर से दलील दी गई कि उनकी भूमिका पहले से जमानत प्राप्त कर चुके सहआरोपियों से अलग नहीं है। इसलिए समानता के आधार पर अग्रिम जमानत दिए जाने का अनुरोध किया गया।

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि पुलिस की जांच पूरी हो चुकी है, आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए जा चुके हैं और अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया जा चुका है।

25 हजार रुपए के मुचलके पर मिली राहत

अदालत ने अखिलेश तिवारी को ₹25,000 के मुचलके पर अग्रिम जमानत का लाभ दिया है। इसके साथ कोर्ट ने कई शर्तें भी निर्धारित की हैं।

जमानत की प्रमुख शर्तों में—

  • गवाहों को डराने, धमकाने या प्रभावित नहीं करना होगा।
  • जांच में पूरा सहयोग करना होगा।
  • विवेचक द्वारा बुलाए जाने पर संबंधित स्थान पर उपस्थित होकर जांच में सहयोग करना होगा।
  • अभियोग पत्र पेश होने के बाद ट्रायल कोर्ट की प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित रहना होगा।
  • जमानत की शर्तों का उल्लंघन होने पर राहत समाप्त की जा सकती है।

यह अग्रिम जमानत थाना पुरानी भिलाई के अपराध क्रमांक 277/2026 में गिरफ्तारी की स्थिति में लागू होगी।

HTC के डायरेक्टर इंद्रजीत सिंह (छोटू)

HTC कार्यालय में GST की कार्रवाई का भी जिक्र

इसी बीच, जिस हैवी ट्रांसपोर्ट कंपनी (HTC) में अखिलेश तिवारी सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत हैं, उसके कार्यालय में 24 अगस्त 2026 को GST विभाग की 12 सदस्यीय टीम ने जांच की थी।

बताया गया कि GST टीम ने कंपनी के वाहनों के संचालन और कारोबार से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की थी। HTC के डायरेक्टर के रूप में इंद्रजीत सिंह (छोटू) का नाम बताया गया है और कंपनी के पास करीब 1,500 से अधिक ट्रकों के होने की जानकारी सामने आई है।

GST कार्रवाई के बाद कंपनी पर जुर्माना लगाए जाने की जानकारी भी सामने आने का दावा किया जा रहा है। हालांकि उपलब्ध सामग्री में जुर्माने की राशि या आदेश का विवरण नहीं है, इसलिए इसे फिलहाल पुष्ट तथ्य के रूप में नहीं लिखा जा सकता।

जांच में आगे क्या सामने आता है, इस पर नजर

BSP से स्क्रैप परिवहन से जुड़े इस मामले में पहले से कई लोगों की भूमिका जांच के दायरे में है। अखिलेश तिवारी को फिलहाल अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई है, जबकि पुलिस उनकी भूमिका से जुड़े पहलुओं की जांच जारी रखे हुए है।

इस स्तर पर अदालत के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि मामले में उनकी भूमिका पूरी तरह प्रमाणित या खारिज हो गई है। अदालत ने फिलहाल उपलब्ध सामग्री के आधार पर गिरफ्तारी से संरक्षण दिया है, जबकि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला है।

Nagendra sahu
Nagendra sahu
नागेन्द्र साहू छत्तीसगढ़ के भिलाई से हैं। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक (BJMC) और वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (MJ) की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वीडियो एडिटिंग ( Ex- भिलाई Times Sr Editor ) और डिजिटल कंटेंट में भी विशेषज्ञता के साथ वर्तमान में रेखांकित न्यूज़ का संचालन कर रहे हैं।
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