
दुर्ग/भिलाई। भिलाई नगर निगम में पेवर ब्लॉक लगाने के कार्य को लेकर विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। लोक निर्माण विभाग की जांच रिपोर्ट में निगम के 8 सब इंजीनियरों की जिम्मेदारी तय किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के आधार पर 7 अधिकारियों से करीब 16 लाख रुपये की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी निगम प्रशासन ने दी है। वहीं, पूरे मामले में ठेका एजेंसी की भूमिका की भी जांच की मांग उठ रही है।
यह मामला निगम की परियोजना शाखा के अंतर्गत कराए गए पेवर ब्लॉक कार्यों से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इन कार्यों की कुल लागत करीब 12.66 करोड़ रुपये बताई जा रही है। कार्यों में कथित आर्थिक अनियमितता और प्रक्रिया संबंधी गड़बड़ियों की शिकायत के बाद कलेक्टर के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग को जांच सौंपी गई थी।

जांच रिपोर्ट में 8 सब इंजीनियरों की जिम्मेदारी
जांच रिपोर्ट में अर्पित बंजारे, श्वेता महेश्वर, श्वेता वर्मा, रीमा जामुलकर, पुरुषोत्तम सिन्हा, प्रभा टोप्पो, कृष्णा जंघेल और चंदन निर्मलकर के नाम जिम्मेदारी तय किए जाने वालों में शामिल बताए गए हैं।
रिपोर्ट के आधार पर 7 अधिकारियों से करीब 16 लाख रुपये की रिकवरी की कार्रवाई शुरू किए जाने की बात सामने आई है। निगम प्रशासन की ओर से संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया की भी जानकारी दी गई है। हालांकि, मामले का दायरा केवल अधिकारियों तक सीमित रहेगा या इसमें संबंधित ठेका एजेंसी और अन्य पक्षों की भी जिम्मेदारी तय होगी, यह आगे की जांच के बाद स्पष्ट होगा।

विधायक रिकेश सेन ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने अधिकारियों से केवल रिकवरी को पर्याप्त नहीं बताते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई और बर्खास्तगी की मांग की है। विधायक की ओर से राज्य शासन को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है।
विधायक ने यह भी कहा है कि यदि उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं होती है तो आगामी विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे को उठाया जाएगा।

ठेका एजेंसी की भूमिका पर भी उठे सवाल
वार्ड क्रमांक 17 के पार्षद संतोष मौर्य ने मामले को लेकर ठेका एजेंसी की भूमिका की जांच की मांग की है। मौर्य का दावा है कि पेवर ब्लॉक से संबंधित काम का कुल मामला 45 करोड़ रुपये से अधिक का है। उन्होंने संबंधित एजेंसी के खिलाफ एफआईआर और रिकवरी की मांग भी की है।
पार्षद ने मामले से संबंधित कुछ फाइलों के गायब होने का आरोप भी लगाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में फाइलों के संबंध में वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

महापौर बोले- संतुष्ट नहीं तो दोबारा जांच की मांग संभव
भिलाई नगर निगम के महापौर नीरज पाल ने कहा है कि पेवर ब्लॉक मामले को लेकर पक्ष और विपक्ष, दोनों की ओर से शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इसके बाद जांच कराई गई।
महापौर के मुताबिक यदि किसी पार्षद या जनप्रतिनिधि को मौजूदा जांच रिपोर्ट पर आपत्ति या असंतोष है तो वह दोबारा जांच की मांग कर सकता है।

आयुक्त ने कहा- जांच अभी पूरी नहीं हुई
निगम आयुक्त सुरुचि सिंह के मुताबिक जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने और रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि पेवर ब्लॉक से जुड़े कार्यों का क्षेत्र बड़ा है और जांच अभी जारी है। यदि जांच के दौरान ठेका एजेंसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस बयान से स्पष्ट है कि मौजूदा जांच में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय किए जाने के बावजूद पूरे मामले पर प्रशासनिक स्तर पर पड़ताल अभी समाप्त नहीं हुई है।
भाजपा ने एफआईआर की मांग की, निगम घेराव की चेतावनी
मामले को लेकर भाजपा जिला संगठन ने भी निगम प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ाया है। भाजपा नेताओं ने निगम आयुक्त से मुलाकात कर मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
भाजपा जिला प्रभारी रामजी भारती ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर एफआईआर दर्ज नहीं की गई तो भाजपा जिला भिलाई की ओर से निगम मुख्यालय का घेराव कर आंदोलन किया जाएगा।
भाजपा ने जांच में अब तक सामने नहीं आए अन्य बिंदुओं को भी शामिल करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि आर्थिक अनियमितता में जिसकी भी भूमिका सामने आए, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
महापौर नीरज पाल का भाजपा पर पलटवार
मामले में भाजपा की ओर से लगातार उठाए जा रहे सवालों के बीच महापौर नीरज पाल ने भाजपा पार्षदों और नेताओं पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि पेवर ब्लॉक से जुड़े जिन 32 प्रकरणों की चर्चा की जा रही है, वे सभी एक-एक करोड़ रुपये से कम के कार्य हैं।
महापौर के अनुसार एक करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव महापौर परिषद यानी MIC में लाए जाते हैं, जबकि एक करोड़ रुपये से कम के कार्यों के प्रस्ताव तैयार करने, प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति देने और बिल पास करने की प्रक्रिया आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में आती है।
महापौर ने दावा किया कि इन कार्यों में तत्कालीन आयुक्त के स्तर से अभियंताओं, उप अभियंताओं और सहायक अभियंताओं के माध्यम से परियोजना शाखा में प्रस्ताव तैयार कराए गए, स्थल चयन और स्थल प्रतिवेदन की प्रक्रिया हुई, इसके बाद कार्य कराए गए और भुगतान किया गया। उनका कहना है कि इन कार्यों में महापौर परिषद की भूमिका नहीं थी।
‘हमने खुद जांच की मांग की थी’
नीरज पाल ने कहा कि जब पार्षद संतोष मौर्य ने सामान्य सभा में पेवर ब्लॉक से संबंधित मुद्दा उठाया था, तब उन्होंने स्वयं सदन के माध्यम से कलेक्टर से जांच की मांग की थी।
महापौर के मुताबिक कांग्रेस के पार्षदों ने भी कलेक्टर को ज्ञापन देकर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। उन्होंने दावा किया कि MIC सदस्यों की ओर से भी प्रेस वार्ता कर यह कहा गया था कि यदि गड़बड़ी हुई है तो अधिकारी हो या ठेका एजेंसी, जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई होनी चाहिए।
उनका कहना है कि इन्हीं मांगों के बाद कलेक्टर के स्तर से जांच कराई गई और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
CBI और EOW जांच की मांग पर महापौर का तंज
भाजपा नेताओं की ओर से मामले की गंभीर जांच की मांग के संदर्भ में महापौर ने कहा कि यदि उन्हें मौजूदा जांच पर भरोसा नहीं है तो वे राज्य सरकार, नगरीय निकाय मंत्री, मुख्यमंत्री या अन्य जांच एजेंसियों के समक्ष शिकायत कर सकते हैं।
उन्होंने EOW और CBI जैसी एजेंसियों से जांच कराने की मांग को लेकर भी भाजपा नेताओं पर सवाल उठाए। हालांकि, महापौर ने भाजपा नेताओं के कुछ आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया और आरोप लगाया कि मामले को आगामी नगर निगम चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।
महापौर ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित काम करने वाली एजेंसियों और ठेकेदारों को लेकर भाजपा नेताओं के हित जुड़े हुए हैं। यह महापौर का राजनीतिक आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।

चुनाव से पहले पेवर ब्लॉक मामला बना राजनीतिक मुद्दा
भिलाई नगर निगम चुनाव से पहले पेवर ब्लॉक कार्यों को लेकर सामने आया विवाद अब प्रशासनिक जांच के साथ राजनीतिक टकराव का विषय भी बन गया है। एक ओर भाजपा जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों के खिलाफ एफआईआर तथा विस्तृत जांच की मांग कर रही है, वहीं महापौर नीरज पाल का कहना है कि मौजूदा जांच उन्हीं की ओर से उठाई गई मांग के बाद शुरू हुई और यदि किसी को जांच पर संदेह है तो वह दोबारा या उच्चस्तरीय जांच की मांग कर सकता है।
फिलहाल जांच रिपोर्ट में 8 सब इंजीनियरों की जिम्मेदारी तय किए जाने, 7 अधिकारियों से करीब 16 लाख रुपये की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू होने और ठेका एजेंसी की भूमिका पर आगे जांच की संभावना की बात सामने आई है। मामले में अंतिम जिम्मेदारी और किसी अन्य पक्ष के खिलाफ कार्रवाई का निर्धारण जांच की अगली प्रक्रिया और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर होगा।


