
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026। दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के नेता यासीन मलिक समेत सात आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय करने का आदेश दिया है। मामला कथित तौर पर विदेशी फंडिंग और हवाला चैनलों के जरिए धन पहुंचाए जाने से जुड़ा है।
विशेष NIA जज प्रशांत शर्मा ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री सभी सात आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया ऐसी स्थिति बनाती है, जिससे उनके विरुद्ध गंभीर संदेह पैदा होता है। अदालत ने आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 3, जो धारा 4 के तहत दंडनीय है, के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया।
हालांकि, आरोप तय होना दोषसिद्धि नहीं है। मामले में अभियोजन को आरोपों को आगे की न्यायिक कार्यवाही में साबित करना होगा।
सात आरोपियों के खिलाफ आरोप तय
मामले में यासीन मलिक के अलावा इन आरोपियों के नाम हैं:
- जाहूर अहमद शाह वटाली
- अब्दुल राशिद शेख
- शब्बीर अहमद शाह
- मसरत आलम भट
- नवल किशोर कपूर
- M/s Trison Farms and Constructions Pvt. Ltd.
अदालत ने उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद सभी सात आरोपियों के खिलाफ PMLA के तहत कार्रवाई आगे बढ़ाने का आदेश दिया है।
ED ने 8.94 करोड़ रुपये की कथित आपराधिक आय का दावा किया
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुसार, इस मामले से जुड़े अनुसूचित अपराधों से कथित तौर पर ₹8,94,87,639 की आपराधिक आय उत्पन्न हुई। एजेंसी का आरोप है कि इस धन को अलग-अलग माध्यमों से प्राप्त करने, स्थानांतरित करने, छिपाने, रखने और इस्तेमाल करने की प्रक्रिया में आरोपी शामिल थे।
ED के मुताबिक, कथित फंडिंग नेटवर्क में पाकिस्तान से जुड़े स्रोतों और हवाला चैनलों का इस्तेमाल किया गया। एजेंसी का आरोप है कि धन को अलग-अलग माध्यमों और कैश कूरियर के जरिए आगे पहुंचाया गया।
यासीन मलिक को कितनी रकम मिलने का आरोप?
मामले में यासीन मलिक से जुड़ी रकम को लेकर जांच एजेंसी ने अलग-अलग दस्तावेजों का हवाला दिया है।
अदालत ने NIA की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में दर्ज जानकारी का उल्लेख करते हुए कहा कि मलिक को सऊदी अरब से ₹15,75,595 मिलने की बात सामने आई है।
ED के मामले में मलिक को मिले कथित विदेशी फंड की कुल राशि ₹30,75,595 बताई गई है। यह राशि जांच एजेंसियों द्वारा कथित आपराधिक आय के तौर पर पेश की गई है।
2017 के NIA मामले से जुड़ा है मनी लॉन्ड्रिंग केस
मनी लॉन्ड्रिंग की यह कार्रवाई उस मामले से जुड़ी है जिसे NIA ने 2017 में दर्ज किया था। मूल मामले में जम्मू-कश्मीर में कथित आतंकवादी और अलगाववादी गतिविधियों के लिए अवैध माध्यमों से धन जुटाने और पहुंचाने के आरोपों की जांच की गई थी।
बाद में ED ने इसी मामले से जुड़े कथित अपराध से हासिल धन की मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच शुरू की। एजेंसी के मुताबिक, धन का इस्तेमाल कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और अन्य गतिविधियों के लिए किया गया।
हवाला नेटवर्क को लेकर क्या आरोप है?
ED का आरोप है कि कथित फंडिंग नेटवर्क में हवाला चैनलों और अन्य माध्यमों से धन पहुंचाया गया। एजेंसी के अनुसार, कुछ धनराशि कैश कूरियर के जरिए पाकिस्तान हाई कमीशन, नई दिल्ली से जुड़े स्रोतों से आगे पहुंचाई गई और फिर अलगाववादी नेतृत्व तक पहुंची।
जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि 2015-16 के दौरान यासीन मलिक, शब्बीर अहमद शाह और मसरत आलम को जाहूर अहमद शाह वटाली के माध्यम से कथित विदेशी योगदान प्राप्त हुआ था। इन दावों का आधार जांच में जब्त दस्तावेज और अन्य सामग्री बताई गई है।
यासीन मलिक को पहले ही मिल चुकी है उम्रकैद
यासीन मलिक को मई 2022 में NIA की विशेष अदालत ने आतंकवाद के वित्तपोषण से जुड़े मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वह वर्तमान में जेल में है।
मनी लॉन्ड्रिंग का मौजूदा मामला अलग कानूनी कार्यवाही है, जिसमें अब PMLA के तहत आरोप तय किए गए हैं।
30 अक्टूबर को अगली सुनवाई
आरोपियों को 30 सितंबर को अदालत में पेश होकर आरोप स्वीकार या अस्वीकार करने की प्रक्रिया से गुजरना था। हालांकि, सुरक्षा कारणों से कुछ आरोपियों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं किया जा सका। इसके बाद अदालत ने ED को जेल में बंद आरोपियों से आरोप संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को होगी।

महत्वपूर्ण: अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि सभी आरोपी दोषी साबित हो गए हैं। इस स्तर पर अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया आरोप तय करने का आदेश दिया है; आरोपों की अंतिम न्यायिक पुष्टि आगे की कार्यवाही में होगी।
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