CG Breaking: नक्सल मुक्त दावे के बाद कांकेर की खदान में आग: 3 पोकलेन मशीनें फूंकीं, ‘लाल सलाम’ वाले पर्चे मिले

चेमल की पुष्प स्टील लिमिटेड की लौह अयस्क खदान में रात के बाद सुबह जली मिलीं मशीनें; पर्चों में एक सप्ताह के भीतर मांगें मानने की चेतावनी, पुलिस ने नक्सली कनेक्शन की पुष्टि नहीं की—फॉरेंसिक टीम जुटा रही साक्ष्य

भानुप्रतापपुर/कांकेर, 6 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए लंबे सुरक्षा अभियान और 31 मार्च 2026 तक राज्य को सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त करने के सरकारी दावे के बीच कांकेर जिले से सामने आई एक आगजनी की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। लोहत्तर थाना क्षेत्र के ग्राम चेमल स्थित पुष्प स्टील लिमिटेड की लौह अयस्क खदान में खड़ी तीन पोकलेन मशीनें आग लगने के बाद बुरी तरह क्षतिग्रस्त मिली हैं। घटनास्थल से दो पर्चे भी बरामद होने की जानकारी है, जिनमें खदान के संचालन और मांगों को लेकर चेतावनी दी गई है तथा ‘लाल सलाम’ लिखा होने की बात सामने आई है।

हालांकि, इस पूरी घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पुलिस ने अभी तक इसे आधिकारिक रूप से नक्सली वारदात घोषित नहीं किया है। पर्चों की भाषा और आगजनी के तरीके के कारण नक्सली एंगल से जांच जरूर की जा रही है, लेकिन पुलिस के सामने यह संभावना भी है कि किसी व्यक्ति या दूसरे समूह ने नक्सली संगठन की शैली या नाम का इस्तेमाल कर घटना को अंजाम दिया हो। इसलिए फिलहाल इस मामले में ‘नक्सली हमला’ कहना जल्दबाजी होगी।

रात में खदान बंद हुई, सुबह मशीनें जली मिलीं

जानकारी के मुताबिक, खदान में दिन का काम पूरा होने के बाद मजदूर और कर्मचारी अपने-अपने कैंप और ठिकानों पर चले गए थे। इसके बाद रात में खदान परिसर में खड़ी भारी मशीनों को निशाना बनाया गया।

सुबह जब कर्मचारी दोबारा काम पर पहुंचे तो वहां का नजारा अलग था। खदान परिसर में खड़ी तीन पोकलेन/भारी मशीनें आग से बुरी तरह क्षतिग्रस्त मिलीं। मशीनों में आग कैसे लगी और घटना को अंजाम देने वाले लोग किस रास्ते से खदान परिसर तक पहुंचे, यह अब पुलिस जांच का अहम हिस्सा है।

घटना की सूचना पुलिस को दी गई। इसके बाद लोहत्तर थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए SDOP शेर बहादुर सिंह के घटनास्थल पर पहुंचने की जानकारी सामने आई है। फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया, ताकि आगजनी से जुड़े भौतिक साक्ष्यों को सुरक्षित किया जा सके।

घटनास्थल से मिले दो पर्चे क्यों महत्वपूर्ण हैं?

मशीनों में आग लगाए जाने के बाद घटनास्थल से मिले दो पर्चे अब जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में शामिल हो गए हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, इन पर्चों में खदान को नियमित रूप से संचालित करने और एक सप्ताह के भीतर मांगें पूरी करने की चेतावनी दी गई है। पर्चों पर ‘लाल सलाम’ लिखे होने की जानकारी भी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में पर्चों को धमकी भरा बताया गया है।

यही वजह है कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन पर्चों को वास्तव में किसने लिखा और इन्हें घटनास्थल पर किस उद्देश्य से छोड़ा गया।

तीन संभावनाओं पर जांच जरूरी

इस मामले में जांच के कम से कम तीन महत्वपूर्ण पहलू सामने आते हैं।

  • पहला, क्या वास्तव में किसी प्रतिबंधित नक्सली संगठन से जुड़े लोगों ने इस वारदात को अंजाम दिया?
  • दूसरा, क्या किसी स्थानीय विवाद, खदान संचालन से जुड़े असंतोष या किसी अन्य आपराधिक कारण के चलते किसी व्यक्ति या समूह ने नक्सली शैली में घटना को अंजाम दिया?
  • और सवाल तीसरा, क्या पर्चे केवल पुलिस और प्रशासन को भ्रमित करने के लिए छोड़े गए थे?

इन सवालों का जवाब केवल पर्चे की भाषा देखकर नहीं निकाला जा सकता। हस्तलेखन, कागज, स्याही, फिंगरप्रिंट या अन्य फॉरेंसिक साक्ष्य, घटनास्थल की परिस्थितियां, CCTV/तकनीकी साक्ष्य और संदिग्धों से पूछताछ—इन सभी को जोड़कर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

‘नक्सल मुक्त’ दावे के बाद घटना ने बढ़ाई चिंता

इस घटना का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह उस समय सामने आई है जब छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार लंबे समय से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य घोषित करते रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बस्तर और देश से नक्सलवाद खत्म करने की समयसीमा 31 मार्च 2026 बताई थी।

राज्य सरकार की ओर से भी मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद से छत्तीसगढ़ को मुक्त करने का लक्ष्य सार्वजनिक रूप से रखा गया था।

ऐसे माहौल में कांकेर जैसे जिले में खदान की मशीनों को निशाना बनाना और मौके से ‘लाल सलाम’ लिखे पर्चे मिलना स्वाभाविक रूप से सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर जांच का विषय है।

लेकिन यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा—किसी क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों के खिलाफ सफलता या नक्सल मुक्त होने के सरकारी दावे का अर्थ यह नहीं है कि किसी भी संदिग्ध आगजनी की घटना को बिना जांच नक्सली हमला मान लिया जाए। मौजूदा मामले में भी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना जरूरी है।

कांकेर में अब भी सुरक्षा का सवाल क्यों अहम है?

कांकेर लंबे समय तक बस्तर के उन इलाकों में रहा है जहां माओवादी गतिविधियों और सुरक्षा अभियानों का असर रहा है। पिछले वर्षों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ाने, नए कैंप स्थापित करने, आत्मसमर्पण और अभियानों के जरिए नक्सली नेटवर्क को कमजोर करने पर जोर दिया गया है। सरकार का दावा रहा है कि इन प्रयासों से बस्तर में सुरक्षा स्थिति में बड़ा बदलाव आया है।

ऐसे में चेमल की घटना को केवल तीन मशीनों में आग लगाए जाने तक सीमित करके देखना पर्याप्त नहीं होगा। यदि जांच में नक्सली कनेक्शन सामने आता है, तो यह सवाल महत्वपूर्ण होगा कि घटना को अंजाम देने वाले लोग सुरक्षा तंत्र की मौजूदगी के बावजूद खदान तक कैसे पहुंचे।

और यदि जांच में नक्सली कनेक्शन नहीं मिलता, तो दूसरा सवाल सामने आएगा कि आखिर किसने नक्सली शैली के पर्चों का इस्तेमाल कर खदान में आगजनी की और उसका उद्देश्य क्या था।

खदान संचालन से जुड़ी मांग भी जांच का हिस्सा

पर्चों में कथित तौर पर खदान को नियमित रूप से संचालित करने और एक सप्ताह के भीतर मांगें पूरी करने की बात लिखे होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में जांचकर्ताओं के लिए खदान से जुड़े स्थानीय विवाद, संचालन व्यवस्था, मजदूरों और ठेकेदारों से जुड़े विवाद तथा किसी संगठन या समूह की पूर्व शिकायतों की जानकारी जुटाना भी जरूरी होगा।

पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती होगी कि पर्चे में लिखी मांगों का वास्तविक संदर्भ क्या है और क्या उनका संबंध खदान से जुड़े किसी पुराने विवाद से है।

फॉरेंसिक जांच से मिल सकती है अहम कड़ी

मौके पर पहुंची फॉरेंसिक टीम अब आग लगने के तरीके और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों की जांच कर रही है। आग किस स्थान से शुरू हुई, मशीनों के किन हिस्सों में सबसे पहले आग लगी, क्या वहां ज्वलनशील पदार्थ के इस्तेमाल के संकेत हैं और क्या घटनास्थल पर बाहरी लोगों की मौजूदगी के कोई भौतिक साक्ष्य हैं—ये सभी सवाल जांच में महत्वपूर्ण होंगे।

इसके साथ ही आसपास के रास्तों, संभावित CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और घटना के समय इलाके में मौजूद लोगों की जानकारी भी जांच को आगे बढ़ा सकती है।

अभी सबसे बड़ा सवाल—नक्सली वारदात या नक्सली अंदाज में की गई साजिश?

फिलहाल इस मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है।

तीन भारी मशीनों को जलाया जाना अपने आप में गंभीर आपराधिक घटना है। इसके साथ घटनास्थल से मिले ‘लाल सलाम’ वाले पर्चे मामले को और संवेदनशील बना देते हैं। लेकिन पर्चा मिलना अकेले यह साबित नहीं करता कि घटना किसी प्रतिबंधित नक्सली संगठन ने ही की है।

इसलिए पुलिस के लिए सबसे अहम चुनौती पर्चों और आगजनी के बीच वास्तविक संबंध स्थापित करना होगी।

अगर फॉरेंसिक और तकनीकी जांच नक्सली नेटवर्क की ओर इशारा करती है तो यह मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चेतावनी बन सकता है। वहीं अगर जांच किसी स्थानीय विवाद या अन्य आपराधिक साजिश की ओर जाती है, तो नक्सली नाम और प्रतीकों के इस्तेमाल का अलग से कारण तलाशना होगा।

फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल से मिले पर्चे, जली मशीनें, फॉरेंसिक साक्ष्य और आसपास की गतिविधियों की जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि चेमल की इस वारदात के पीछे वास्तव में कौन था और उसका मकसद क्या था।

—‘नक्सल मुक्त’ दावे के बाद सामने आई इस घटना को लेकर अभी तथ्य क्या हैं, संदेह क्या हैं और किन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिलेंगे।

Nagendra sahu
Nagendra sahu
नागेन्द्र साहू छत्तीसगढ़ के भिलाई से हैं। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक (BJMC) और वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (MJ) की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वीडियो एडिटिंग ( Ex- भिलाई Times Sr Editor ) और डिजिटल कंटेंट में भी विशेषज्ञता के साथ वर्तमान में रेखांकित न्यूज़ का संचालन कर रहे हैं।
spot_imgspot_img

ट्रेंडिंग

खबर जो मायने रखती है

महादेव सट्टा ऐप का कथित सरगना सौरभ चंद्राकर ओमान से भारत लाया गया, सोमवार को रायपुर की विशेष अदालत में होगी पेशी

महादेव ऑनलाइन बुक ऐप मामले के प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर का ओमान से प्रत्यर्पण कर भारत लाया गया है। CBI उसे 2 नवंबर को रायपुर की विशेष अदालत में पेश करेगी।

अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन: हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में ली अंतिम सांस, 78 वर्ष की उम्र में हुआ निधन

छत्तीसगढ़ के अहिवारा से भाजपा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का शुक्रवार को हैदराबाद में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे लंबे समय से फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे।

मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप: भूपेश बघेल ने वार्डवार आंकड़े रखे, आपत्तियों के बाद हाईकोर्ट जाने की चेतावनी

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दुर्ग जिले के चार नगरीय निकायों की प्रारंभिक मतदाता सूची में मतदाताओं के वार्ड बदलने का आरोप लगाया है। कांग्रेस 30 अक्टूबर तक आपत्तियां दर्ज कराएगी।

छत्तीसगढ़ में EOW-ACB का बड़ा एक्शन: शराब, कोल और DMF मामलों में कई शहरों में छापेमारी

शराब, कोल लेवी और DMF मामलों की जांच के बीच EOW-ACB ने छत्तीसगढ़ के कई शहरों में एक साथ छापेमारी की। कारोबारियों और अन्य संबंधित लोगों के ठिकानों पर दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।