
भटगांव के मजराटोला में धर्म परिवर्तन को लेकर समाज के लोगों ने जताई आपत्ति, कई घंटे चली बातचीत के बाद बनी सहमति; हिंदू रीति-रिवाज से हुआ अंतिम संस्कार
धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के भटगांव के मजराटोला में एक महिला के अंतिम संस्कार को लेकर रविवार को विवाद की स्थिति बन गई। महिला की मौत के बाद परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था, लेकिन परिवार के कथित तौर पर ईसाई धर्म अपनाने की बात सामने आने के बाद समाज के कुछ लोगों ने अंतिम संस्कार में शामिल होने पर आपत्ति जताई। इसके बाद गांव में कई घंटे तक बैठक और बातचीत का दौर चला।
मामला इतना बढ़ा कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से जुड़े लोग भी मौके पर पहुंचे। बातचीत के बाद परिवार की ओर से हिंदू धर्म और समाज की परंपराओं को फिर से अपनाने पर सहमति जताई गई। इसके बाद गंगाजल, तुलसी और तिलक से धार्मिक प्रक्रिया पूरी की गई और महिला का अंतिम संस्कार गांव के शांति घाट में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार किया गया।
महिला की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद
जानकारी के मुताबिक, भटगांव के मजराटोला में सुरेश ध्रुव की पत्नी सरस्वती की 3 अक्टूबर की रात मौत हो गई थी। अगले दिन सुबह परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटा था। इसी दौरान समाज के कुछ लोगों ने परिवार के कथित धर्म परिवर्तन का मुद्दा उठाते हुए अंतिम संस्कार में सहयोग और शामिल होने पर आपत्ति जताई।
ग्रामीणों की ओर से दावा किया गया कि परिवार पिछले करीब चार वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहा था। इसी बात को लेकर समाज के लोगों और परिवार के बीच बातचीत शुरू हुई। विवाद बढ़ने के बाद गांव में बैठक बुलाई गई, जिसमें अंतिम संस्कार को लेकर सहमति बनाने की कोशिश की गई।

‘घर वापसी’ की प्रक्रिया के बाद बनी सहमति
कई घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद सुरेश ध्रुव की ओर से हिंदू धर्म और समाज की परंपराओं को दोबारा अपनाने की सहमति दिए जाने की बात सामने आई। इसके बाद ग्रामीणों और धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों की मौजूदगी में तिलक लगाया गया और गंगाजल पिलाया गया। तुलसी का पत्ता देकर पूजा-पाठ की प्रक्रिया भी कराई गई।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रक्रिया के बाद परिवार की ओर से आगे हिंदू रीति-रिवाजों और सामाजिक परंपराओं का पालन करने की सहमति जताई गई। इसके बाद समाज के लोगों ने महिला के अंतिम संस्कार में सहयोग किया।
इसके बाद हिंदू रीति-रिवाज से हुआ अंतिम संस्कार
सहमति बनने के बाद महिला सरस्वती के शव का गांव के शांति घाट में अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार संपन्न हुआ। विवाद के कारण पहले जो स्थिति बनी थी, वह बातचीत और सहमति के बाद शांत हुई।
गांव के सरपंच फांगूराम साहू ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मामला मजराटोला का है और महिला का अंतिम संस्कार गांव में ही कराया गया।
धर्म परिवर्तन का दावा ग्रामीणों की ओर से
इस पूरे मामले में परिवार के धर्म परिवर्तन को लेकर सामने आए दावे मुख्य रूप से ग्रामीणों और समाज के लोगों की ओर से बताए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, परिवार के सदस्य ने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में लौटने की बात कही है। हालांकि, इस घटनाक्रम में किसी तरह के दबाव या जबरदस्ती के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान और अंतिम संस्कार से जुड़े अधिकारों का सवाल संवेदनशील है। इसलिए ऐसे मामलों में स्थानीय सामाजिक सहमति के साथ-साथ कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन भी जरूरी है।
धमतरी में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे विवाद
धमतरी में इससे पहले भी धर्म परिवर्तन के आरोपों को लेकर अंतिम संस्कार से जुड़े विवाद सामने आए हैं। अगस्त 2026 में श्यामतराई में एक महिला के अंतिम संस्कार को लेकर ग्रामीणों और परिजनों के बीच विवाद हुआ था। उस मामले में प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में दूसरे स्थान पर अंतिम संस्कार कराया गया था।
भटगांव की ताजा घटना में हालांकि बातचीत के बाद परिवार और ग्रामीणों के बीच सहमति बनी और महिला का अंतिम संस्कार गांव में ही किया गया।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने धर्मांतरण, धार्मिक पहचान, सामाजिक परंपराओं और अंतिम संस्कार के अधिकार को लेकर एक बार फिर बहस खड़ी कर दी है। मामले में सामने आए धर्म परिवर्तन से जुड़े दावों को संबंधित पक्षों के बयानों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

