
रायपुर, 2 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के चर्चित Coal levy Scandal में भिलाई नगर विधायक देवेंद्र सिंह यादव को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की ओर से नोटिस जारी किया गया है। नोटिस के मुताबिक, मामले की जांच पूरी होने के बाद उनके खिलाफ विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जाना है और इसके लिए 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:30 बजे अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
EOW/ACB रायपुर कार्यालय से जारी नोटिस की तारीख 30 सितंबर 2026 बताई गई है। इसमें देवेंद्र यादव को मामले में आरोपी बनाए जाने तथा विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किए जाने की जानकारी दी गई है।
किन धाराओं में दर्ज है मामला?
यह कार्रवाई अपराध क्रमांक 03/2024 से संबंधित है। नोटिस में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के संशोधित प्रावधानों की धारा 7, 7A और 12 का उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420, 120-B, 384, 467, 468 और 471 के तहत अपराध दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
कोर्ट रिकॉर्ड में भी EOW/ACB की इसी FIR में देवेंद्र सिंह यादव समेत 35 आरोपियों के नाम दर्ज होने का उल्लेख मिलता है।
जांच के बाद अब अभियोग पत्र की प्रक्रिया
नोटिस में कहा गया है कि मामले की विवेचना पूरी होने के बाद विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), जिला रायपुर में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जाएगा।
अभियोग पत्र दाखिल किए जाने के दौरान आरोपी की अदालत में उपस्थिति आवश्यक होने के कारण देवेंद्र यादव को निर्धारित तारीख और समय पर न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे पहले सितंबर के अंत में भी EOW ने देवेंद्र यादव से पूछताछ की थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उनसे रायपुर स्थित EOW कार्यालय में करीब दो घंटे तक पूछताछ हुई थी। यह पूछताछ मामले की जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों से संबंधित बताई गई थी।
5 अक्टूबर को होगी अगली अहम प्रक्रिया
नोटिस के अनुसार देवेंद्र यादव को 5 अक्टूबर 2026, सुबह 10:30 बजे विशेष न्यायालय में उपस्थित होना है। नोटिस EOW/ACB रायपुर के विवेचना अधिकारी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की ओर से जारी किया गया है।
इसके बाद मामले में विशेष न्यायालय के समक्ष अभियोग पत्र प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
गौरतलब है कि आरोपी बनाए जाने या अभियोग पत्र दाखिल होने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। मामले में आरोपों की न्यायिक जांच और सुनवाई अदालत में होगी तथा अंतिम निष्कर्ष न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगा।

