डामर के दाम ने रोकी छत्तीसगढ़ की सड़कों की रफ्तार, 6 महीने में 50 हजार से बढ़कर 96,500 रुपए टन हुआ भाव

डामर की कीमत बढ़ने से छत्तीसगढ़ में प्रभावित सड़क निर्माण परियोजनाएं
डामर की बढ़ती कीमतों के कारण छत्तीसगढ़ में कई सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य प्रभावित होने का दावा।

करीब 2 हजार करोड़ रुपए के सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य प्रभावित होने का ठेकेदारों का दावा; डामरीकरण के 90% काम पर असर, रायपुर से बिलासपुर और भिलाई तक कई परियोजनाएं अटकीं

रायपुर/बिलासपुर/भिलाई, 6 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में डामर की बढ़ती कीमत अब सड़क निर्माण और मरम्मत के काम पर सीधा असर डाल रही है। ठेकेदारों के मुताबिक, पिछले छह महीनों में डामर की कीमत करीब 50 हजार रुपए प्रति टन से बढ़कर 96,500 रुपए प्रति टन तक पहुंच गई है। कीमत में इस तेज बढ़ोतरी के चलते पुराने अनुबंधों की दरों पर सड़क निर्माण करना ठेकेदारों के लिए घाटे का सौदा हो गया है। उनका दावा है कि प्रदेश में करीब 2 हजार करोड़ रुपए के सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य प्रभावित हो रहे हैं और डामरीकरण से जुड़े करीब 90 फीसदी काम किसी न किसी स्तर पर प्रभावित हुए हैं।

स्थिति का असर केवल नई सड़कों पर नहीं, बल्कि बारिश के बाद होने वाले पेचवर्क और सड़क नवीनीकरण के काम पर भी दिखाई दे रहा है। ठेकेदारों के अनुसार, कई जगह मरम्मत और पेचवर्क के टेंडर अनुमानित लागत से 50 से 60 फीसदी तक अधिक जा रहे हैं। कुछ स्थानों पर एजेंसियां काम शुरू करने से पीछे हट रही हैं, जबकि जहां काम शुरू हो चुका था, वहां भी डामर की बढ़ी कीमत के कारण काम की गति प्रभावित हुई है।

मामले को लेकर 25 सितंबर को लोक निर्माण विभाग के सचिव, ईएनसी और ठेकेदारों के बीच बैठक भी हुई थी। इसमें डामरीकरण के पीक सीजन में डामर की उपलब्धता और कीमतों में वृद्धि को प्रमुख चिंता के तौर पर उठाया गया। ठेकेदार संगठनों ने पुराने अनुबंधों की दरों में संशोधन की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा बाजार दर और अनुबंध दर के बीच बड़ा अंतर होने के कारण काम जारी रखना व्यावहारिक नहीं रह गया है।

राज्य में सड़क निर्माण पर सरकार का बड़ा निवेश पहले से चल रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में लोक निर्माण विभाग के लिए करीब 9,500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, जबकि नई सड़कों के निर्माण के लिए 2 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था।

रायपुर में 17 करोड़ का एक्सप्रेस-वे रिनुअल अटका

राजधानी रायपुर में स्टेशन से सद्दाणी दरबार तक एक्सप्रेस-वे के रिनुअल के लिए करीब 17 करोड़ रुपए का टेंडर जारी हो चुका है। लेकिन डामर की कीमत बढ़ने के बाद ठेका एजेंसी की ओर से अनुबंध प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने की बात सामने आई है। इसके चलते इस प्रमुख मार्ग का रिनुअल शुरू नहीं हो सका है।

यह सड़क शहर के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। काम में देरी होने पर सड़क की स्थिति के साथ यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका है।

महासमुंद-तुमगांव सड़क पर 5 किमी के बाद काम बंद

महासमुंद से तुमगांव तक करीब 9 किलोमीटर सड़क के नवीनीकरण का काम भी डामर की कीमत बढ़ने से प्रभावित हुआ है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एजेंसी करीब 5 किलोमीटर हिस्से में डामरीकरण का काम पूरा कर चुकी थी। इसके बाद डामर की कीमत में तेजी आई और काम रोक दिया गया। करीब 4 किलोमीटर हिस्सा अब भी बाकी है।

भैंसा भंडार-तेलसी मार्ग पर एजेंसी तय, लेकिन काम शुरू नहीं

रायपुर जिले में भैंसा भंडार से तेलसी तक करीब 30 किलोमीटर सड़क का डामरीकरण किया जाना है। एजेंसी का चयन हो चुका है, लेकिन बढ़ी हुई लागत के कारण काम शुरू नहीं हो पाया है। सड़क की खराब और ऊबड़-खाबड़ स्थिति के कारण ग्रामीणों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

खारुन पुल पर फिर डामरीकरण की जरूरत

दुर्ग-रायपुर मार्ग पर खारुन नदी के ओवरब्रिज पर भी डामरीकरण का काम दोबारा प्रस्तावित है। 1 अप्रैल से शुरू हुए पिछले काम में एजेंसी ने करीब एक महीने का ब्लॉक लिया था, लेकिन लगभग 16 दिन में काम पूरा कर दिया गया था। भारी वाहनों की आवाजाही के बाद सड़क की सतह पर फिर गड्ढे बनने लगे।

अब दोबारा डामरीकरण की तैयारी है, लेकिन डामर की उपलब्धता और बढ़ी कीमत के कारण काम शुरू होने में देरी हो रही है।

बिलासपुर में 177.73 करोड़ के 12 सड़क प्रोजेक्ट प्रभावित

डामर की कीमत और उपलब्धता का असर बिलासपुर में भी बड़े स्तर पर दिखाई दे रहा है। जिले में नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के करीब 177.73 करोड़ रुपए के 12 सड़क प्रोजेक्ट प्रभावित बताए जा रहे हैं। इनमें पांच परियोजनाएं नगर निगम और सात परियोजनाएं पीडब्ल्यूडी से जुड़ी हैं।

नगर निगम के करीब 50 करोड़ रुपए के पांच प्रमुख प्रोजेक्ट में 17 करोड़ रुपए का अशोक नगर-बिरकोना मार्ग, 11 करोड़ रुपए का अटल पथ, 10 करोड़ रुपए का अपोलो चौक-रपटा चौक मार्ग, 9 करोड़ रुपए का गुरुनानक चौक-राजकिशोर नगर मार्ग और 3 करोड़ रुपए का साइंस कॉलेज-चांटीडीह सब्जी मंडी मार्ग शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि इन सड़कों पर नाली, डिवाइडर और बेसवर्क जैसे काम पूरे हो चुके हैं, लेकिन अंतिम डामरीकरण का काम प्रभावित है। ठेकेदारों का कहना है कि मौजूदा दरों पर अंतिम परत बिछाने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

पीडब्ल्यूडी की सात परियोजनाओं की कुल लागत करीब 127.73 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इनमें 68.43 करोड़ रुपए का सिरगिट्टी-सरवानी-पासीद मार्ग और 32 करोड़ रुपए का नेहरू चौक-दर्रीघाट प्रोजेक्ट प्रमुख हैं। इसके अलावा तिफरा-अमेरी, गोंदइया-भरदैय्याडीह-कलमीटार, भद्रापारा-बरभाठा, सीपत-बेलतरा और लगरा-गतौरा-मोपका-खैरा-जयरामनगर मार्ग भी प्रभावित परियोजनाओं में शामिल हैं।

बिलासपुर में ठेकेदार संगठनों ने एस्टीमेट संशोधित करने की मांग उठाई है। पीडब्ल्यूडी कांट्रेक्टर एसोसिएशन के सौरव मिश्रा के मुताबिक डामर की उपलब्धता और कीमत दोनों ही बड़ी समस्या हैं। इस संबंध में निगम आयुक्त और पीडब्ल्यूडी मंत्री को पत्र भेजा गया है। नगर निगम ठेकेदार संघ के अध्यक्ष अभिषेक सिंह ठाकुर ने भी कहा है कि एस्टीमेट संशोधित किए बिना पुराने रेट पर काम करना मुश्किल है।

नगर निगम के कमिश्नर प्रकाश सर्वे के अनुसार ठेकेदारों की मांग शासन को भेजी गई है और शासन के निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी। वहीं, पीडब्ल्यूडी बिलासपुर के चीफ इंजीनियर आरके रात्रे के अनुसार डामर की बढ़ी दर को लेकर शासन से अभी कोई मार्गदर्शन नहीं मिला है, लेकिन इस संबंध में प्रक्रिया शासन स्तर पर चल रही है।

भिलाई में 10 करोड़ की सड़क परियोजनाएं आठ महीने से प्रभावित

भिलाई नगर निगम क्षेत्र में भी डामर की कमी और कीमत में बढ़ोतरी का असर सामने आया है। करीब 10 करोड़ रुपए की सड़क डामरीकरण परियोजनाएं पिछले आठ महीनों से प्रभावित बताई जा रही हैं।

इनमें वार्ड-18 की शास्त्री अस्पताल-साक्षरता चौक सर्विस रोड, वार्ड-17 का नेहरू भवन-शास्त्री अस्पताल मार्ग, वार्ड-21 का कैलाश नगर, वार्ड-23 का घासीदास नगर और वार्ड-25 का जवाहर नगर क्षेत्र की सड़कें शामिल हैं।

निगम अधिकारियों के मुताबिक डामर की कीमत बढ़ने के कारण पुराने अनुबंध की दरों पर काम करने में ठेकेदारों को नुकसान की आशंका है। इसके चलते कई कार्यों की गति प्रभावित हुई है। इसके अलावा बारिश के दौरान डामरीकरण पर लागू प्रतिबंध भी एक कारण है। 15 जून से 15 अक्टूबर तक बारिश के मौसम में ऐसे कामों पर रोक के बाद अब 15 अक्टूबर के बाद काम शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।

सिर्फ सड़क नहीं, निर्माण लागत और समयसीमा पर भी असर

डामर की कीमत में बढ़ोतरी का प्रभाव सड़क परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। जिन निर्माण कार्यों में डामर की जरूरत होती है, वहां लागत अनुमान और वास्तविक बाजार दर के बीच अंतर बढ़ने से परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित हो रही है।

यदि अनुबंध दरों में संशोधन नहीं होता और डामर की कीमत इसी स्तर पर बनी रहती है तो ठेकेदारों के लिए पुराने अनुबंधों पर काम जारी रखना मुश्किल हो सकता है। इसका सीधा असर परियोजनाओं की समयसीमा पर पड़ सकता है। सड़क निर्माण और मरम्मत के काम लंबे समय तक रुके तो इसका असर शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और आम लोगों की आवाजाही पर भी पड़ सकता है।

पीडब्ल्यूडी के ईएनसी वीके भतपहरी ने कहा है कि डामर और कांक्रीट से दिसंबर तक सड़क के गड्ढे भरने का लक्ष्य रखा गया है। उनके मुताबिक, जहां डामर की उपलब्धता में समस्या होगी, वहां संबंधित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की कोशिश की जाएगी।

क्या है असली चुनौती?

फिलहाल पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल डामर की बढ़ी बाजार कीमत और पुराने अनुबंधों की तय दर के बीच के अंतर का है। ठेकेदार एस्टीमेट संशोधन की मांग कर रहे हैं, जबकि विभागीय स्तर पर उनकी मांग शासन को भेजे जाने और प्रक्रिया चलने की बात कही जा रही है।

यानी आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार बढ़ी हुई लागत को लेकर क्या निर्णय लेती है। यदि दर संशोधन या कोई वैकल्पिक व्यवस्था जल्द नहीं बनती है तो डामरीकरण के लिए अनुकूल मौसम की छोटी अवधि में भी कई परियोजनाओं को गति देना चुनौती बन सकता है।


Nagendra sahu
Nagendra sahu
नागेन्द्र साहू छत्तीसगढ़ के भिलाई से हैं। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक (BJMC) और वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (MJ) की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वीडियो एडिटिंग ( Ex- भिलाई Times Sr Editor ) और डिजिटल कंटेंट में भी विशेषज्ञता के साथ वर्तमान में रेखांकित न्यूज़ का संचालन कर रहे हैं।
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