अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की मान्यता के नए नियम पर आपत्ति, शर्त हटाने की मांग; संचालक बोले- अनुभवी शिक्षक भी हो रहे अपात्र

CGBSE के अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की मान्यता के नए नियम के विरोध में निजी स्कूल संचालकों की मांग
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने CGBSE के अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की मान्यता से जुड़े नए नियमों में बदलाव की मांग की है।

रायपुर, 30 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) की ओर से अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की मान्यता और संबद्धता के लिए लागू किए गए नए प्रावधानों को लेकर निजी स्कूल संचालकों ने आपत्ति जताई है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने CGBSE के अध्यक्ष को पत्र भेजकर शिक्षकों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि से जुड़ी अंग्रेजी माध्यम की अनिवार्यता में बदलाव की मांग की है।

एसोसिएशन का कहना है कि नए नियम के तहत शिक्षकों के लिए कक्षा 12वीं से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से होना अनिवार्य किए जाने से खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के निजी स्कूलों के सामने व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो रही हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर चिंता

एसोसिएशन के पत्र के अनुसार, प्रदेश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ऐसे शिक्षकों की संख्या सीमित है, जिन्होंने 12वीं से लेकर स्नातकोत्तर तक की पूरी शिक्षा अंग्रेजी माध्यम से प्राप्त की हो।

संचालकों का कहना है कि इस शर्त के कारण स्कूलों में लंबे समय से पढ़ा रहे ऐसे शिक्षक भी पात्रता के दायरे से बाहर हो सकते हैं, जिनकी विषय पर मजबूत पकड़ है और जो अंग्रेजी में पढ़ाने में सक्षम हैं, लेकिन उनकी अपनी शैक्षणिक पढ़ाई का माध्यम हिंदी रहा है।

अंग्रेजी में पढ़ाने की क्षमता को बनाया जाए आधार

निजी स्कूल प्रबंधन संघ ने मांग की है कि शिक्षक की योग्यता तय करते समय केवल उसकी पिछली पढ़ाई के माध्यम को आधार न बनाया जाए। इसके बजाय विषय ज्ञान, अंग्रेजी में अध्यापन की क्षमता, परीक्षा या कार्य अनुभव जैसे मानकों को भी महत्व दिया जाए।

संघ ने अपने पत्र में CBSE और ICSE जैसे राष्ट्रीय शिक्षा बोर्डों का उदाहरण देते हुए कहा है कि वहां शिक्षक की विषय दक्षता और अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाने की क्षमता को महत्व दिया जाता है। संगठन का तर्क है कि CGBSE से संबद्ध अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में भी इसी तरह व्यावहारिक मानदंड अपनाए जा सकते हैं।

पहले से कार्यरत शिक्षकों को छूट देने की मांग

एसोसिएशन ने मांग की है कि नए नियम लागू करते समय स्कूलों में पहले से कार्यरत शिक्षकों को विशेष छूट दी जाए। संगठन का कहना है कि वर्षों से पढ़ा रहे अनुभवी शिक्षकों को केवल उनकी शैक्षणिक पढ़ाई के माध्यम के आधार पर अपात्र घोषित करने से स्कूलों में शिक्षकों की कमी पैदा हो सकती है।

इसका असर स्कूलों के संचालन के साथ-साथ विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी पड़ने की आशंका संगठन ने जताई है।

3 से 5 साल का समय देने का प्रस्ताव

निजी स्कूल संचालकों ने नए नियमों को पूरी तरह लागू करने से पहले 3 से 5 वर्ष का संक्रमण काल देने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इससे स्कूलों को नए मानकों के अनुरूप शिक्षक तैयार करने या नियुक्त करने का पर्याप्त समय मिल सकेगा।

एसोसिएशन ने यह भी सुझाव दिया है कि पूर्ण डिग्री अंग्रेजी माध्यम से होने की अनिवार्यता के स्थान पर अंग्रेजी में अध्यापन दक्षता का परीक्षण, मौखिक/लिखित परीक्षा अथवा संबंधित अनुभव को मान्यता का आधार बनाया जा सकता है।

स्कूल प्रबंधन ने CGBSE से पुनर्विचार की मांग की

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने CGBSE अध्यक्ष को भेजे पत्र में इन प्रावधानों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। संगठन का कहना है कि नियमों का उद्देश्य अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन इसके लिए शिक्षक की पूरी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बजाय उसकी विषय विशेषज्ञता और अंग्रेजी में पढ़ाने की वास्तविक क्षमता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

अब निजी स्कूल संचालकों की नजर CGBSE की ओर से इस मांग पर होने वाली कार्रवाई और नियमों में संभावित संशोधन पर है।


एक नजर में

  • विषय: CGBSE के अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की मान्यता के नए नियम
  • आपत्ति: 12वीं से स्नातकोत्तर तक अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की अनिवार्यता
  • संगठन: छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन
  • मुख्य चिंता: ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में योग्य शिक्षकों की कमी
  • मांग: अंग्रेजी में पढ़ाने की दक्षता को भी पात्रता का आधार बनाया जाए
  • अन्य मांग: पहले से कार्यरत शिक्षकों को छूट
  • संक्रमण अवधि: 3 से 5 वर्ष देने का प्रस्ताव

Nagendra sahu
Nagendra sahu
नागेन्द्र साहू छत्तीसगढ़ के भिलाई से हैं। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक (BJMC) और वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (MJ) की शिक्षा प्राप्त की है। पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वीडियो एडिटिंग ( Ex- भिलाई Times Sr Editor ) और डिजिटल कंटेंट में भी विशेषज्ञता के साथ वर्तमान में रेखांकित न्यूज़ का संचालन कर रहे हैं।
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