
रायपुर | 29 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ में चक्रवात अर्नब के प्रभाव से हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में धान और सब्जियों की फसलों को नुकसान पहुंचने की खबरों के बीच प्रदेश के आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा ने प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा देने की बात कही है। मंत्री के मुताबिक, फसल नुकसान का आकलन अनावरी रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा। पात्र किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) 6-4 के प्रावधानों के तहत सहायता देने की बात कही गई है।
हालांकि, किसानों को वास्तविक राहत कितनी और कब मिलेगी, यह नुकसान के आकलन, संबंधित योजनाओं की पात्रता और प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
अनावरी रिपोर्ट से तय होगा नुकसान का आकलन
मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि चक्रवात के प्रभाव से प्रदेश में हवा और बारिश की स्थिति बनी हुई है। कुछ स्थानों पर धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। ऐसे क्षेत्रों में फसल की स्थिति का आकलन अनावरी रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा।
सरकार की ओर से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और RBC 6-4 के तहत सहायता का भरोसा दिया गया है। इन दोनों व्यवस्थाओं की पात्रता और प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किसानों को मिलने वाली सहायता का निर्धारण संबंधित नियमों और नुकसान के सत्यापन के आधार पर होगा।
खेतों में पानी, किसानों को लागत निकलने की चिंता
बेमौसम बारिश के कारण धान की फसल प्रभावित होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट की आशंका बढ़ गई है। जिन किसानों की फसल पकने के करीब है, उनके लिए लगातार बारिश से कटाई और फसल को सुरक्षित रखने में मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को भी नुकसान की चिंता है।
फसल खराब होने या गुणवत्ता प्रभावित होने की स्थिति में किसानों की आमदनी घट सकती है, जबकि बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और अन्य कृषि खर्चों की भरपाई की जिम्मेदारी बनी रहती है।
ऐसे में किसानों के लिए जरूरी है कि नुकसान का सर्वे समय पर हो और पात्रता के अनुसार बीमा दावों तथा सरकारी राहत की प्रक्रिया में देरी न हो।
पटवारियों की हड़ताल पर मंत्री की नाराजगी
फसल नुकसान के बीच राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने प्रदेश में पटवारियों की हड़ताल को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राज्य के हजारों पटवारी पिछले 15 दिनों से हड़ताल पर हैं। मंत्री के अनुसार, पटवारियों ने व्हाट्सऐप के माध्यम से आवेदन देकर हड़ताल शुरू की, जबकि उन्हें अपनी मांगों और समस्याओं को सरकार के सामने रखकर समाधान के लिए चर्चा करनी चाहिए थी।
मंत्री ने कहा कि हड़ताल पर जाने से पहले बातचीत की जाती, तो समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास किया जा सकता था।
गिरदावरी और धान खरीदी के काम पर असर की आशंका
मंत्री ने बताया कि वर्तमान में धान खरीदी के लिए गिरदावरी का काम महत्वपूर्ण चरण में है। ऐसे समय में पटवारियों की हड़ताल से राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित होने की आशंका है।
गिरदावरी के दौरान खेतों, फसलों और कृषि भूमि से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाती है। यह जानकारी धान खरीदी समेत विभिन्न सरकारी प्रक्रियाओं में उपयोगी होती है। ऐसे में राजस्व अमले की हड़ताल का असर कृषि संबंधी कामकाज पर पड़ सकता है।
किसानों के सामने दोहरी चुनौती
एक ओर बेमौसम बारिश से फसल को हुए नुकसान की चिंता है, तो दूसरी ओर राजस्व संबंधी कार्यों में संभावित देरी का सवाल है। किसानों के लिए फसल नुकसान का समय पर आकलन, गिरदावरी से जुड़े काम और मुआवजे की प्रक्रिया का सुचारू रूप से चलना महत्वपूर्ण है।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे कब पूरा होता है, अनावरी रिपोर्ट में कितना नुकसान दर्ज किया जाता है और पात्र किसानों तक बीमा या सरकारी सहायता कब पहुंचती है।

